परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी, निवेश, उद्योग और बुनियादी ढांचे के दम पर पूर्वांचल उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि का नया ग्रोथ इंजन बन रहा है।
उत्तर प्रदेश 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की कोशिश कर रहा है और पूर्वांचल कहलाने वाला प्रदेश का पूर्वी हिस्सा इसमें बेहद अहम भूमिका निभा रहा है। उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि पूर्वांचल असल में प्रदेश का नया ग्रोथ इंजन बनता जा रहा है।
कनेक्टिविटी की बात करते हुए सिंह ने कहा कि जो पूर्वांचल किसी जमाने में अपराध, अराजकता और पिछड़ेपन के लिए कुख्यात था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त कानून व्यवस्था के साथ सड़क, रेल और बुनियादी ढांचे का जाल बिछाकर उसकी सूरत ही बदल दी है। कनेक्टिविटी बढ़ने से इस क्षेत्र में निवेश, उद्योग और रोजगार की भारी आवक हो रही है।
उन्होंने कहा, ‘आज पूर्वांचल अपनी पुरानी छवि को भुलाकर निवेश का नया अड्डा बनता जा रहा है। केवल छह घंटे में मेरठ से प्रयागराज पहुंचने वाला व्यक्ति समझ पाता है कि पिछले कुछ समय में प्रदेश में सड़कें किस कदर सुधरी हैं। इससे कारोबारियों के लिए भी बहुत आसानी हो गई है, जो अपना माल बहुत कम समय में नए बाजारों में पहुंचा देते हैं। बनारसी साड़ी और पूर्वांचल के कई अनूठे उत्पादों को नए बाजार मिलना इसका सबूत है।’
मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को केवल भारत में ही मान्यता नहीं मिल रही है बल्कि अब दुनिया भर के लोग यहां योगी सरकार के बेहतरीन प्रशासनिक मॉडल की दाद दे रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की बहाली ने अभूतपूर्व विकास की बुनियाद रखी है, जिसके कारण राज्य को 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं।’
सिंह ने यह भी कहा कि वाराणसी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है और मुख्यमंत्री गोरखपुर से आते हैं, इसलिए पूर्वांचल की अहमियत अपने आप बढ़ जाती है। उन्होंने कहा, ‘उत्तर प्रदेश अपनी पुरानी छवि मिटा चुका है और अब पूरी दुनिया में इसके प्रशासन, तेज बुनियादी ढांचा विकास और निवेश के अनुकूल माहौल की चर्चा हो रही है।’
पूर्वांचल को भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और धार्मिक महत्ता वाले प्रयागराज, काशी, गोरखपुर, सारनाथ और कुशीनगर जैसे नगर इसी इलाके में हैं। प्रयागराज में पिछले साल हुए महाकुंभ के दौरान 65 करोड़ से अधिक लोगों के संगम स्नान का दावा करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक राजधानी कहलाने वाली काशी या वाराणसी नगरी अपनी आध्यात्मिक विरासत के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। उन्होंने भगवान बुद्ध की नगरी सारनाथ और कुशीनगर का भी जिक्र किया।
उन्होंने पूर्वांचल की सराहना करते हुए कहा कि इस क्षेत्र ने अपनी समृद्ध विरासत को जस का तस रखते हुए तेजी से आधुनिकीकरण और विकास का चोला ओढ़ा है। पिछले कुछ साल में विश्वस्तरीय सड़कों, सुधरे हुए शहरी बुनियादी ढांचे तथा बेहतर कनेक्टिविटी ने वाराणसी की तो सूरत ही बदल दी है और इसकी गिनती देश में पर्यटकों की सबसे ज्यादा आमद वाले शहरों में होती है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडॉर जैसी विराट परियोजनाएं पूरी करने का श्रेय दिया और कहा कि इससे श्रद्धालु मंदिर से सीधे गंगा नदी तक पहुंच जाते हैं। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि मशहूर बनारसी साड़ी को इस योजना की वजह से ज्यादा अच्छे बाजार और प्लेटफॉर्म मिले हैं।
उन्होंने कहा, ‘बलिया की बिंदी को पहले ओडीओपी योजना के तहत मान्यता दी गई थी मगर बाद में इस योजना के लिए सत्तू ज्यादा उपयुक्त लगा क्योंकि बलिया हमेशा से चने की खेती के लिए जाना जाता है। हमने मुख्यमंत्री से सत्तू को ओडीओपी में शामिल करने के लिए कहा और प्रस्ताव मान लिया गया।’ इसके बाद बलिया में सत्तू का रकबा 4,300 हेक्टेयर से बढ़कर 5,800 हेक्टेयर तक हो गया है और स्थानीय उद्यमी सत्तू का निर्यात भी कर रहे हैं।
बुनियादी ढांचा विकास का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि देश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश में ही है और पूर्वांचल को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तथा गंगा एक्सप्रेसवे समेत प्रमुख गलियारों से जोड़ा गया है। औद्योगिक विकास की बात करते हुए उन्होंने लखनऊ के बाहर हिंदुजा समूह की प्रमुख कंपनी अशोक लीलैंड द्वारा स्थापित मेगा इलेक्ट्रिक बस विनिर्माण संयंत्र का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘परियोजना केवल 16 महीने में पूरी कर ली गई और इससे उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी व्यवस्था मजबूत होगी।’
राज्य के परिवहन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि 38 फीसदी वायु प्रदूषण डीजल वाहनों के कारण ही होता है और इस पर काबू करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ावा दे रही है। उन्होंने बताया कि अब 43 जिलों में इलेक्ट्रिक बसें चलने लगी हैं और आगे चलकर 75 जिलों में इन्हें चलाया जाएगा।
प्रदेश के प्रमुख शहरों में चार्जिंग स्टेशन लगाए जा रहे हैं और बस डिपो, बस स्टेशन तथा पेट्रोल पंपों में चार्जिंग का बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बस चलाने में डीजल बस के मुकाबले बहुत कम खर्च आता है और खरीद कीमत ज्यादा होने पर भी ये पर्यावरण के लिहाज से टिकाऊ और आर्थिक रूप से फायदेमंद रहती हैं।
ग्रामीण कनेक्टिविटी पर बोलते हुए सिंह ने मुख्यमंत्री ग्राम जोड़ो योजना का जिक्र किया और बताया कि इसके जरिये उन 12,200 गांवों को जोड़ा जा रहा है, जहां अभी बस नहीं पहुंची हैं। इस योजना के जरिये गांवों से ब्लॉक, तहसील तथा जिला मुख्यालय के बीच नियमित बस सेवा चलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि करीब 1,100 बसें पहले ही चल रही हैं और 10,000 नई बसें जोड़ने का काम चल रहा है, जिससे रोजगार के प्रत्यक्ष तथा परोक्ष अवसर बड़ी संख्या में उत्पन्न होंगे।
