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वाराणसी से अयोध्या तक उद्योगों की नई क्रांति! जानिए क्यों निवेशकों की पसंद बन रहा है पूर्वांचल

उत्तर प्रदेश सरकार 75,000 एकड़ लैंड बैंक, 27 औद्योगिक क्लस्टर और बेहतर कनेक्टिविटी के दम पर पूर्वी यूपी को निवेश, उद्योग और रोजगार का बड़ा केंद्र बना रही है।

UP Additional Chief Secretary (Industrial Development) and Infrastructure and Industrial Development Commissioner Deepak Kumar

रणनीतिक स्थिति, कुशल कार्यबल, मजबूत कृषि आधार और तेजी से सुधरती कनेक्टिविटी का लाभ उठाकर उत्तर प्रदेश सरकार पूर्वी उत्तर प्रदेश को उद्योग और निवेश का प्रमुख केंद्र बना रही है। प्रदेश में अपर मुख्य सचिव (औद्योगिक विकास) और आईआईडीसी दीपक कुमार ने बताया कि किस तरह इससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और संतुलित क्षेत्रीय विकास होगा।

पूर्वी उत्तर प्रदेश विशेषकर वाराणसी को काफी निवेश प्रस्ताव मिल रहे हैं। सरकार इस क्षेत्र में जमीन कैसे उपलब्ध कराएगी?

उत्तर प्रदेश में जमीन बाधा नहीं है बल्कि दूसरों से होड़ में आने निकलने का मौका है। राज्य ने जीआईएस के जरिये 75,000 एकड़ से अधिक औद्योगिक लैंड बैंक तैयार किया है, जिससे निवेशक बुनियादी ढांचे, यूटिलिटीज और कनेक्टिविटी की पूरी जानकारी के साथ निवेश के लिए तैयार स्थल देख सकते हैं। एक्सप्रेसवे के बड़े नेटवर्क का फायदा उठाने के लिए प्रदेश प्रमुख एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों के किनारे 27 एकीकृत विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक्स क्लस्टर तैयार कर रहा है। पूर्वांचल में अयोध्या, सुल्तानपुर, बाराबंकी, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर, गोरखपुर, आजमगढ़ और अंबेडकर नगर में ये क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और मल्टीमोडल कनेक्टिविटी के साथ ‘प्लग ऐंड प्ले’ औद्योगिक तंत्र तैयार हो रहा है।

प्रदेश सरकार पूर्वी उत्तर प्रदेश में किस प्रकार के उद्योगों को बढ़ावा देना चाहती है?

हम भविष्य पर नजर रखते हुए इस क्षेत्र की मौजूदा ताकत को और बढ़ा रहे हैं। निवेश आकर्षित करने, रोजगार उत्पन्न करने और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश अपनी रणनीतिक स्थिति, कुशल कार्यबल, मजबूत कृषि आधार तथा तेजी से बढ़ती कनेक्टिविटी का उपयोग कर पूर्वी उत्तर प्रदेश को प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योग, वस्त्र और परिधान (बनारसी सिल्क तथा भदोही कालीन क्लस्टर), पर्यटन, आतिथ्य, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स तथा वेयरहाउसिंग, आईटी एवं आईटीईएस, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी), डेटा सेंटर और डिजिटल ढांचा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। इन क्षेत्रों में निवेश सुगम बनाने के लिए व्यापक नीतिगत तंत्र बना है, जिसमें 40 से अधिक क्षेत्रों की नीतियां तथा प्रोत्साहन योजनाएं हैं।

निवेशकों को पूर्वांचल निवेश के अनुकूल क्यों लग रहा है?

बुनियादी ढांचे से भरोसा आता है और भरोसा निवेश लाता है, जिससे रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व बदलाव से गुजरा पूर्वांचल विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी, नीतिगत सहयोग और कारोबारी सुगमता बढ़ने के कारण भारत के सबसे आकर्षक निवेश स्थलों में जगह बना रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और तैयार हो रहे गंगा एक्सप्रेसवे समेत बढ़ी हुई एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी निवेशकों का भरोसा बढ़ाती है। इसके अलावा राष्ट्रीय जलमार्ग-1 और वाराणसी में मल्टीमोडल टर्मिनल देश के भीतर माल की आवाजाही को किफायती बनाते हैं और सीधे पूर्वी बंदरगाहों तक पहुंचाते हैं। पूर्वी समर्पित माल गलियारा तथा व्यापक रेलवे नेटवर्क के कारण कनेक्टिविटी बढ़ने से भी माल ढुलाई की लागत घटी है और बाजार तक पहुंच बढ़ी है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में आईटी उद्योगों खास तौर पर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) तथा डेटा सेंटरों के लिए क्या संभावनाएं हैं?

प्रतिभा हर जगह मौजूद है तो अवसर भी हर जगह होने चाहिए। आगे प्रौद्योगिकी में निवेश महानगरों तक ही सीमित नहीं रहेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रौद्योगिकी और ज्ञान सेवाओं का अहम ठिकाना बन रहा है, जिसे जीसीसी नीति 2024, आईटी एवं आईटीईएस नीति 2022 तथा डेटा सेंटर नीति से मदद मिल रही है। पूर्वांचल आईआईटी-बीएचयू, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय तथा अन्य प्रमुख संस्थानों से आ रही प्रतिभा, कम परिचालन लागत, बढ़ती मल्टीमोडल कनेक्टिविटी तथा निवेश के लिए तैयार औद्योगिक बुनियादी ढांचे के बल पर दूसरे क्षेत्रों से होड़ में आगे रहता है। यह ताकत उत्तर प्रदेश के ‘हब ऐंड स्पोक’ जीसीसी मॉडल के अनुकूल है, जिससे कंपनियां लागत काबू में रखते हुए बेहतरीन प्रतिभा तक पहुंच सकती हैं। प्रयागराज, उन्नाव, झांसी और बुंदेलखंड में आईटी, आईटीईएस तथा डेटा सेंटरों में बढ़ता निवेश बताता है कि प्रदेश का प्रौद्योगिकी तंत्र एनसीआर से आगे बढ़ रहा है।

अगली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की कैसी तैयारी है और पूर्वी उत्तर प्रदेश से कितनी परियोजनाएं शुरू होने की उम्मीद है?

निवेशकों के बढ़ते भरोसे के कारण पिछले साल ही उत्तर प्रदेश में 4,860 नए कारखाने खुले हैं, जिससे पंजीकृत कारखानों की संख्या 32,332 तक पहुंच गई है। हमारी कामयाबी का अंदाजा यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 और चौथी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की सफलता से लगता है। इस समिट में 33.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव आए और चौथी सेरेमनी में 10 लाख रुपये से अधिक की 14,701 परियोजनाएं शुरू हुईं। अगली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की घोषणा मुख्यमंत्री सही समय पर करेंगे। इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश की महत्त्वपूर्ण भूमिका रहने की उम्मीद है, जहां वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, सुल्तानपुर, अयोध्या, बाराबंकी और अंबेडकरनगर जैसे जिलों में खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स, कपड़ा, पर्यटन, रक्षा विनिर्माण एवं औद्योगिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है।