पाकिस्तान के कायद-ए-आजम यानि राष्ट्रपिता माने जाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना की जिंदगी काफी दिलचस्प थी. उनके जीवन की कई घटनाएं ऐसी हैं, जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं. जिक्र ये भी होता है कि उनका परिवार दरअसल हिंदू था, जिसने बाद में इस्लाम धर्म अपना लिया था.
इतिहास के बहुत से ऐसे तथ्य होते हैं, जो हमें चौंका देते हैं. एक ऐसा ही दिलचस्प तथ्य पाकिस्तान के कायद-ए-आजम मोहम्मद अली जिन्ना के बारे में है, जिन्होंने धर्म के आधार पर बंटवारे की मांग की थी. 25 दिसंबर, 1976 में पैदा हुए मोहम्मद अली जिन्ना भले ही पाकिस्तान के भाग्य विधाता रहे हों, उन्होंने भले ही मुस्लिमों के लिए अलग राष्ट्र की मांग की और पूरी कराई हो लेकिन उनका परिवार एक वक्त में हिंदू हुआ करता था.
जिन्ना के जीवन से जुड़ा एक दिलचस्प और विवादित तथ्य यह है कि उनका परिवार इस्लाम धर्म में नया था. कुछ रिपोर्टों के मुताबिक जिन्ना के पिता मुस्लिम नहीं थे. उनका नाम पुंजालाल ठक्कर था और वे पहले हिंदू थे. बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाया. पाकिस्तान क्रिश्चियन पोस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि जिन्ना के जन्म के समय भी उनके पिता हिंदू ही थे, यानी जन्म के समय जिन्ना भी हिंदू थे. बाद में उनके पिता ने उन्हें इस्लाम धर्म में प्रवेश दिलाया. हालांकि कई इतिहासकार उन्हें ईरानी भी बताते हैं और इसे लेकर विवाद रहा है.
हिंदू था मोहम्मद अली जिन्ना का परिवार
कई जगहों पर इस बात का जिक्र है कि जिन्ना के दादा प्रेमजीभाई ठक्कर गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र के एक लोहाना हिंदू थे. चूंकि वे मछली के व्यापार से जुड़े थे, ऐसे में उन्हें स्थानीय हिंदुओं के विरोध और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा. यही वजह रही कि उन्हें वो जगह छोड़कर कराची शिफ्ट होना पड़ा. कुछ जगहों पर कहा गया कि जिन्ना के पिता पुंजालाल ठक्कर ने जिन्ना के जन्म से पहले ही धर्म परिवर्तन कर लिया था लेकिन पाकिस्तान क्रिश्चियन पोस्ट की रिपोर्ट कहती है कि सामाजिक बहिष्कार से नाराज होकर पुंजालाल ठक्कर ने आगा खान संप्रदाय के शिया इस्लाम को अपनाया. यहां तक कि मैट्रिक स्कूल के रिकॉर्ड में भी जिन्ना का नाम एम. जेड. ठक्कर था. इसके बाद राजकोट की एक आगा खानी मस्जिद में जिन्ना और उनके भाइयों के नाम बदले गए.
पाकिस्तान में नहीं पढ़ाया गया सच
इस रिपोर्ट में पाकिस्तान क्रिश्चियन कांग्रेस के प्रेसिडेंट नजीर एस भट्टी के बयान का जिक्र है, जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि पाकिस्तानी इतिहासकारों ने अपने राष्ट्रपिता तक की जीवनी बदल डाली. उन्होंने कभी नहीं पढ़ाया कि जिन्ना का परिवार हिंदू था और वे बाद में इस्लाम में आए. उनके पिता ने बाद में इस्लाम धर्म अपनाया था. जिन्ना बाद में एक प्रसिद्ध वकील बने. वे पहले कांग्रेस और फिर मुस्लिम लीग के प्रमुख नेता रहे. उन्होंने पाकिस्तान को अलग देश बनाने के आंदोलन का नेतृत्व किया. यह भी माना जाता है कि वे लंबे समय तक मुस्लिम धार्मिक नेताओं में खास लोकप्रिय नहीं थे और 1937 के बाद ही उन्होंने पारंपरिक इस्लामी पहनावा यानि शेरवानी और टोपी अपनाई.
भारत के गुजरात में रहता था परिवार
भारत के पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने अपनी किताब ‘जिन्ना: इंडिया, पार्टिशन, इंडिपेंडेंस’ में लिखा है कि जिन्ना के दादा पूंजाभाई ठक्कर अपने तीन बेटों वलजीभाई, नथुभाई, जेनाभाई और एक बेटी मानबाई के साथ हमेशा पानेली गांव में रहे. वे आगे लिखते हैं -‘पूंजाभाई हैंडलूम के काम से परिवार का खर्च चलाते थे. लेकिन पूंजाभाई के सबसे छोटे बेटे जेनाभाई ने पानेली छोड़ने का जोखिम उठाया और पास के गोंदल में चले गए. यह पानेली गांव छोड़ने का पहला कदम था.’ आज भी 110 साल पुराना वो घर मौजूद है, जहां कभी जिन्ना का परिवार रहा करता था.
