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असम में कांग्रेस, बंगाल में टीएमसी के पाले में गए मुस्लिम वोटर, AIUDF और AIMIM को क्यों ठुकराया

     पांच राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद असम की सियासत में ‘मुस्लिम लीग’ वाले बयान ने आग लगा दी है। जहां एक तरफ बीजेपी 11 मई को सरकार बनाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष के 23 विधायकों में से सिर्फ 2 हिंदू चेहरों ने नई बहस छेड़ दी है।

गुवाहाटी: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार ने शपथ ली। अब असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी की बारी है। असम में 11 मई के बाद बीजेपी की नई सरकार शपथ लेगी।

असम में कांग्रेस का प्रदर्शन और मुस्लिम वोटरों का रुख

असम में कांग्रेस के 19 विधायक जीते, जिनमें 18 मुसलमान हैं। असम में AIUDF और AIMIM जैसी पार्टी थी, मगर बीजेपी विरोध के नेशनल ट्रेंड के कारण मुस्लिम वोटरों ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया। हिमंत बिस्वा सरमा ने इस आंकड़े को चुनाव में जीत के बाद खुले मंच से इसकी चर्चा की, फिर AIUDF नेता बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस पर हमला बोला। अजमल ने कांग्रेस को मुस्लिम लीग बता दिया।

केरल और बंगाल के चुनावी समीकरण

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सिर्फ केरल में वापसी की। इस चुनाव में केरल ही ऐसा राज्य रहा, जहां मुसलमान वोटरों ने परंपरागत पैटर्न पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का समर्थन किया। मुस्लिम लीग से सभी 22 विधायक मुसलमान हैं। हालांकि कांग्रेस के टिकट पर भी 8 मुस्लिम विधायक जीते। वाम मोर्चे से 6 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को जीत मिली। बंगाल में भी फरक्का और रानीगर से कांग्रेस के दो विधायकों को जीत मिली। संयोग यह है कि दोनों विधायक मुस्लिम हैं।

बंगाल में 36 में से 31 विधायक टीएमसी के

      पश्चिम बंगाल से कुल 36 मुसलमान जीते, जिनमें से 31 टीएमसी से जीते। टीएमसी ने 47 मुस्लिम कैंडिडेट मैदान में उतारे थे। बंगाल में हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी को दो सीटें मिलीं। इन दोनों सीटों पर खुद हुमायूं कबीर जीते, उनकी पार्टी से कोई नहीं जीता। बंगाल का मुस्लिम वोटर टीएमसी के पक्ष में गोलबंद रहा। AIMIM को 0.09 प्रतिशत वोट ही मिले।

 

असम विधानसभा में विपक्ष की तस्वीर

असम की कुल 126 सीटों में से 22 मुस्लिम विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे। AIUDF नेता बदरुद्दीन अजमल की पार्टी को दो सीट मिलीं। अखिल गोगोई की रजोदर दल से भी एक विधायक जीता। अब असम विधानसभा के विपक्ष में 23 विधायक नजर आएंगे, जिनमें सिर्फ दो हिंदू होंगे। एक कांग्रेस के जय प्रकाश दास और दूसरे अखिल गोगोई। तमिलनाडु में कुल 9 मुस्लिम विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं, जिनमें से एक कांग्रेस का है।

बदरुद्दीन अजमल का कांग्रेस पर तीखा हमला

AIUDF प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने असम में कांग्रेस के मुसलमान कैंडिडेट की जीत पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आपको यह न पता हो कि कांग्रेस पार्टी का गठन कैसे हुआ था। इसे हिंदुओं और मुसलमानों ने मिलकर बनाया था और यही इसका धर्मनिरपेक्ष स्वरूप था। आप दोनों समुदायों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित क्यों नहीं कर पाए? आप असमिया बहुल इलाकों से कुछ सीटें भी क्यों नहीं जीत पाए? इससे यह ज़ाहिर होता है कि आपकी पार्टी का पतन हो गया है और यह एक ‘मुस्लिम लीग’ जैसी पार्टी बन गई है।

कांग्रेस से पवन खेड़ा ने दिया जवाब

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी खुले तौर पर मुसलमानों का वोट लेने से इनकार करती है। हिमंत बिस्वा सरमा ने मुस्लिम मतदाताओं को ठुकराया। मुस्लिम वोटर ने तथाकथित बीजेपी जैसी मुस्लिम पार्टियों को भी ठुकराया। मुस्लिम वोटरों ने बदरुद्दीन अजमल और ओवैसी के बजाय राष्ट्रीय स्तर के कांग्रेस को चुना। कांग्रेस के 664 विधायक हैं, जिनमें से 78 प्रतिशत हिंदू और 12 प्रतिशत मुसलमान है। फिर ऐसे सवाल क्यों किए जा रहे हैं।