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यह एक साजिश है, या फिर एक हादसा……? 

भारत की विझिनजाम बंदरगाह से कुछ दूर पर एक चीनी मालवाहक जहाज में विस्फोट होना.. और फिर वह डूब जाना, क्या यह एक साजिश है, या फिर एक हादसा..!? 

ARUN KUMAR SINGH (EDITOR)

पोस्ट की विषयवस्तु पर जाने से पहले, इसको लेकर भारत की क्या तैयारी है, उसे पहले समझना होगा. भारत का लक्ष्य 2030 तक शीर्ष 10 जहाज निर्माता और 2047 तक शीर्ष 5 बनना है. भारत 2047 तक जहाज निर्माण में शीर्ष 5 में बनने के लिए सरकार द्वारा 10 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिन्हें आने वाले वर्षों में खर्च किया जाएगा और FDI निवेश लगभग 4 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है. भारत का प्रमुख लक्ष्य है रणनीतिक बंदरगाह, गहरे पानी के बंदरगाह, हजारों व्यापारी जहाज, तेल आपूर्ति टैंकर, कंटेनर और व्यापार और आपूर्ति के लिए आवश्यक सभी चीजें बनाना है.

● लेकिन यह यहीं तक सीमित नहीं है….
वाणिज्यिक जहाजों के साथ-साथ विज्ञान और अन्वेषण पर भी ध्यान दिया जा रहा है. भारत नॉर्वे के साथ मिलकर कोलकाता में पहला ध्रुवीय अन्वेषण जहाज बना रहा है. जापान और नॉर्वे जैसे देशों के साथ शुरुआती जहाज बनाने और तकनीक को समझने के लिए पहले ही सौदे हो चुके हैं. अगर आप लोग भारत की गंभीरता को देखना चाहते हैं, तो मंत्री सर्बानंद सोनोवाल खुद इस साल नॉर्वे में नोर शिपिंग इवेंट में निवेश लाने और पानी पर अपना दबदबा बनाने की भारत की योजना को प्रदर्शित करने जा रहे हैं. नॉर्वे के क्राउन प्रिंस और अधिक सौदों के लिए भारत का दौरा करने वाले हैं.
 क्या इससे चाइना और उसकी नौकरानी पाकिस्तान खुश हैं..!?
    बिल्कुल नहीं.. क्या आपने चीनी दूतावास को केरल बंदरगाह के पास बचाव अभियान के लिए भारतीय नौसेना की प्रशंसा करते हुए देखा है..!? इसका उत्तर देने से पहले इतना खुश मत होइए, यह चीन एक दिखावा है. पोस्ट को पढ़ते पढ़ते आपको अंत तक इसका कारण भी पता चल जाएगा. भारत ने हाल ही में अडानी Port’s द्वारा बनाए गए विझिनजाम डीप वाटर पोर्ट का उद्घाटन किया है. भारत के लिए यह आपूर्ति श्रृंखला और भू-रणनीतिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण बंदरगाह है.
     इससे हिन्द महासागर में चीन के प्रभुत्व को भारत ने सीधे चुनौती दिया है. 
चीन ने अपनी स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स परियोजना में हिंद महासागर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए भारी निवेश किया है, जो CPEC का महासागर तक विस्तार है. चीन का 80% तेल आयात हिन्द महासागर, खास तौर पर मलक्का जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. भारत की विझिनजाम पोर्ट एक मजबूत, आधुनिक भारतीय बंदरगाह के रूप में इन महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की निगरानी करने और संभावित रूप से उन्हें प्रभावित करने की भारत की क्षमता को बहुत बढ़त देता है, जिसे चीन अपने रणनीतिक कमजोरी ‘मलक्का दुविधा’ के रूप में देखता है…. सिर्फ इतना ही नहीं..! विझिनजाम बंदरगाह सीधे तौर पर चीन के प्रमुख समुद्री अवरोध बिंदुओं पर हावी होने के प्रयासों का मुकाबला करता है, कोलंबो तथा हंबनटोटा जैसे चीनी-प्रभाव वाले बंदरगाहों पर भारत की निर्भरता को कम करता है.
हालांकि विझिनजाम एक वाणिज्यिक बंदरगाह है, लेकिन भारत के दक्षिणी सिरे के पास इसका रणनीतिक स्थान नई दिल्ली को हिन्द महासागर में एक मजबूत समुद्री स्थिति प्रदान करता है. इससे भारत को चीनी नौसेना की गतिविधियों पर बेहतर निगरानी रखने और, यदि आवश्यक हो, तो संकट के समय शक्ति का प्रदर्शन करने या पहुंच को प्रतिबंधित करने की अनुमति देती है, जिससे क्षेत्र में चीन की सैन्य परिचालन जटिल हो सकती है. गहरे पानी के बंदरगाह वाणिज्यिक समुद्री प्रभुत्व विस्तार करने के लिए बुनियादी ढांचे मुहैया कराती है.
● चीन भी समझता है कि यह केवल व्यापार के लिए नहीं है. इसीलिए चीन ने भारत की बंदरगाहों को नष्ट ब बाधित करने में वह सब कुछ करना शुरू कर दिया है जो वह गैर-सैन्य तरीके से सबसे अच्छा करता रहता है.
1 = वह अपने स्वयं के वाणिज्यिक जहाजों को डुबो देगा ताकि मलबे से बड़े जहाजों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न हो सके. वर्तमान की खबर में इसके सभी गुण परिलक्षित हो रहे हैं, क्योंकि दुनिया का सबसे बड़ा कंटेनर जहाज MS सीरिना उसी दिन विझिनजाम बंदरगाह पर पहुंचा था. चीनियों को यह बिलकुल पसंद नहीं आया होगा. इसलिए आपलोग आज चीनी प्रशंसा से खुश न हों.
2. GPS और AIS स्पूफिंग: शंघाई और अन्य चीनी बंदरगाहों में, दुसरे देशों की जहाजों ने स्पूफिंग हमलों का अनुभव किया है जो उनके GPS और स्वचालित पहचान प्रणाली AIS डेटा में हेरफेर करते हैं. इस तरह के हमलों से जहाजों को एक साथ कई स्थानों पर दिखाई दे सकता है या उनकी वास्तविक गतिविधियों को छिपा सकता है, जिससे वे बंदरगाहों का बिना पता लगाए प्रवेश कर सकते हैं या छोड़ सकते हैं या नेविगेशन सिस्टम को भ्रमित करके अराजकता पैदा कर सकते हैं.
3. सैन्य उद्देश्य के लिए वाणिज्यिक वाहनों का उपयोग एक और आम चीनी तरीका है. इसलिए भारत को हिन्द महासागर में चीनी चालों से अपने बुनियादी ढांचे की रक्षा करने की आवश्यकता है. इससे निपटने के लिए भी भारत तैयार है.
      उधर चीन के नौकरानी पाकिस्तान सिंधु जल संधि निरस्तीकरण जैसी एक और गंभीर स्थिति का सामना करने जा रहा है. इस बार यह होर्मुज जलडमरूमध्य में होगा जो पाकिस्तान की ऊर्जा और अन्य आपूर्ति के लिए जीवन रेखा की तरह है. अगर पाकिस्तान भारत के खिलाफ एक और दुस्साहस करता है, तो भारतीय नौसेना कार्रवाई करेगी, और वह और भी घातक होगी. न केवल कराची, जो पाकिस्तान के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक शहर है, बल्कि उनकी आपूर्ति और भंडार भी खतरे में होंगे.
       भारतीय नौसेना अपने आप को तेजी से आधुनिकीकरण कर रही है और भारत द्वारा बनाए जाने वाले  जहाज मुख्य रूप से भारतीय नौसेना के लिए बनाए जाते हैं. तो हमें इसका क्या मतलब निकालना चाहिए..!? भारत हिन्द महासागर पर भारतीय तरीके से अपना दबदबा बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है. यह केवल भारतीय नौसेना ही नहीं होगी जो समुद्र पर अपना दबदबा बनाएगी, बल्कि वाणिज्यिक और व्यापारिक नौसेना भी इसमें शामिल होगी. मोदीजी ने 10 लाख करोड़ रुपये के बजट के साथ स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए हैं. पाकिस्तान की एक और नापाक हरकत उसे कराची और होर्मुज जलडमरूमध्य तक ले जा सकती है. चीन पहले ही केरल में हमारे सामरिक बुनियादी ढांचे पर विचलित होकर प्रतिक्रिया दे रहा है, आने वाले दिनों में और भी इस तरह के दृश्य हमें देखने को मिल सकते हैं….