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75 फीसदी विद्यालयों में नहीं होता मिड डे मील के मेन्यू का पालन

जौनपुर। जिले के 2807 प्राथमिक विद्यालयों में रोजाना जो मिड डे मील का भोजन परोसा जाता है। शिकायत है कि अधिकांश स्कूलों में मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं होता है। बृहस्पतिवार को इसकी पड़ताल कराई गई तो इसमें पाया गया कई स्कूलों में बिना मेन्यू के पालन के ही भोजन बना था। कहीं पानी जैसी दाल मिली तो कहीं सब्जी भी नहीं दी गई।

अधिकतम जगहों पर बच्चे बिना टाट या दरी के जमीन पर खाना खाते दिखे। अखबार की ओर से की गई पड़ताल में बरसठी, मछलीशहर, रामपुर, सुजानगंज, चंदवक, मड़ियाहूं, करंजाकला आदि क्षेत्र के 10 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों में बच्चे मिड डे मील योजना के तहत जमीन पर बिना टाट और दरी के भोजन करते मिले। चंदवक के विद्यालयों में की गई पड़ताल में मिड डे मील के मेन्यू के इतर खाना बच्चों को परोसा गया। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से निर्धारित मेन्यू के अनुसार बृहस्पतिवार को रोटी और सब्जीयुक्त दाल देना तय है लेकिन कई विद्यालयों में इसके इतर दाल चावल, रोटी दाल आदि खाने में परोसा गया।बक्सा ब्लॉक के बेल्छा गांव में प्रधान एवं प्रधानाध्यापक की मिली भगत से खाने योग्य भोजन नहीं दिया जाता!

डीएम ने मांगकर खाया मिड-डे मील का खाना:तहसीलदार को भी खिलाया, स्कूल में लगे हैंडपंप का पानी पीकर हुए नाराज; निरीक्षण करने पहुंचे थे…

पीलीभीत के डीएम ने प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे मील में बच्चों के लिए बनने वाला खाना खाया। साथ ही उन्होंने जहां स्कूल का खाना बनता है, वहां का निरीक्षण भी किया। डीएम ने साथ आई तहसीलदार को भी खाना खाने के लिए बोला। डीएम ने स्कूल में ही लगे हैंडपंप का पानी पिया। क्वालिटी खराब मिलने पर डीएम नाराज हो गए।

दरअसल, बुधवार को डीएम विद्यालय में निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्हें स्कूल में पीने के पानी की व्यवस्था खराब मिली। साथ ही कुछ और खामियां भी मिली। जिन्हें डीएम ने जल्द ही सही करवाने का निर्देश दिया है।

सुबह साढ़े 10 बजे स्कूल पहुंचे थे डीएम

ये मामला पीलीभीत के ललौरीखेड़ा ब्लॉक के मथुडांडी गांव के प्राथमिल विद्यालय का है। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह के साथ स्कूल सीडीओ राजेंद्र कुमार और सदर तहसीलदार अर्ची गुप्ता भी पहुंची थीं।

डीएम सुबह साढ़े 10 बजे विद्यालय पहुंच गए थे। सबसे पहले डीएम बच्चों के क्लास में गए। वहां उन्होंने बच्चों से सिलेबस को लेकर सवाल-जवाब किए। उसके बाद उनसे पढ़ाई के बारे में पूछा। क्लास में मौजूद टीचर से भी सवाल-जवाब किए।

शौचालय की टंकी मिली खाली

क्लास से निकलने के बाद डीएम स्कूल में साफ-सफाई की व्यवस्था देखने लगे। इसके बाद डीएम शौचालय पहुंचे। वहां उन्हें पानी की टंकी खाली मिली। इस बात पर डीएम नाराज हो गए। तुरंत टंकी में पानी भरने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, ऐसे में बच्चे कैसे शौचालय यूज करते होंगे, जब पानी ही नहीं है।

इसी बीच विद्यालय में बच्चों के खाने का समय हो गया। स्कूल परिसर में बच्चों को खाना परोसा जा रहा था। वहां पर डीएम भी पहुंच गए। डीएम ने अपने लिए भी खाना मांगा। रसोइया ने उन्हें एक कटोरी में दाल-चावल दिया। डीएम ने थोड़ा सा दाल-चावल खाने के बाद तहसीलदार को भी खाने के लिए बोला। उनसे कहा, जरा खाकर बताइए कैसा है?

किचन की सीलन ठीक करवाने के आदेश

खाना खाने के बाद डीएम किचन की ओर गए। वो जूते उतारकर किचन के अंदर जाने लगे। तभी तहसीलदार किचन के अंदर गई। उन्होंने किचन में आने वाली सीलन को ठीक करवाने के लिए बोला। साथ ही सारी कमियों को साथ आए कर्मचारी से लिखने के लिए बोला।