अमेरिका ने भारत से ट्रेड डील के ऐलान के 8 दिन के भीतर ही बांग्लादेश से भी कारोबारी डील कर ली। बांग्लादेश ने इस डील को लेकर किसी को हवा तक नहीं लगने दी। इस डील के बाद यह तुलना हो रही है कि अमेरिका से डील में भारत को ज्यादा फायदा हुआ है या बांग्लादेश को। ट्यूजडे ट्रीविया में इस नफा-नुकसान की बात को समझते हैं।
नई दिल्ली: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से कुछ ही दिन पहले ही अमेरिका के साथ सीक्रेट डील हुई है। 9 फरवरी को दोनों देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। नतीजतन बांग्लादेशी वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ पहले के 20 फीसदी से 1 प्रतिशत घटकर अब 19 प्रतिशत रह गया है।
वहीं, बांग्लादेश से करीब 8 दिन पहले यानी 2 फरवरी को भारत की भी अमेरिका से ट्रेड डील हुई, जिसमें भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका ने 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी टैरिफ कर दिया गया। अब भारत और बांग्लादेश दोनों की अमेरिका से हुई ट्रेड डील की तुलना हो रही है। देखने की बात ये है कि कौन कितना फायदे में है और यह भी समझेंगे कि क्या यह पाकिस्तान के इशारे पर हुआ है।
मोहम्मद यूनुस सरकार ने अमेरिका से डील पर क्या कहा
ढाका द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बांग्लादेश की ओर से वाणिज्य सलाहकार शेख बशीर उद्दीन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान ने, जबकि अमेरिका की ओर से अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जेमिसन ग्रीर ने इस कारोबारी पर समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने कहा कि यह समझौता रोजगार की रक्षा करने और वैश्विक कपड़ा आपूर्ति श्रृंखला में बांग्लादेश की स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। बीते दो फरवरी को ही भारत और अमेरिका ने एक नई ट्रेड डील का ऐलान किया था।
अमेरिका-बांग्लादेश टैरिफ समझौते में क्या है
सोमवार रात 10 बजे बांग्लादेश और अमेरिका ने एक टैरिफ समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद बांग्लादेशी निर्यात पर मौजूदा शुल्क में एक प्रतिशत की कमी की गई है। परिणामस्वरूप, बांग्लादेशी उत्पादों पर शुल्क 20 प्रतिशत से घटकर 19 प्रतिशत हो गया है। टैरिफ में 19 प्रतिशत की कमी बांग्लादेश के लिए अच्छी खबर है।
शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले साल अप्रैल में इस एशियाई देश पर 37 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। इसे पिछले साल अगस्त में घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया था।
बांग्लादेश को इस मामले में जीरो टैरिफ
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद यूनुस ने सोशल मीडिया X पर एक बयान में कहा-अमेरिका ने बांग्लादेश से कुछ ऐसे वस्त्र और परिधान उत्पादों के लिए एक तंत्र स्थापित करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिनमें अमेरिकी निर्मित कपास और कृत्रिम फाइबर का उपयोग किया गया है, ताकि अमेरिकी बाजार में उन पर कोई पारस्परिक टैरिफ न लगे।
उन्होंने कहा-पारस्परिक शुल्क को 20 प्रतिशत से घटाकर 19 प्रतिशत करने से हमारे निर्यातकों को और अधिक लाभ मिलेगा, वहीं बांग्लादेश से कुछ विशिष्ट वस्त्र और परिधान निर्यात पर जीरो टैरिफ से हमारे वस्त्र क्षेत्र को काफी बढ़ावा मिलेगा।
बांग्लादेशी दवाओं-मछलियों पर भी जीरो टैरिफ
बांग्लादेश से आने वाले औषधीय उत्पादों को भी अमेरिकी बाजार में शून्य शुल्क का लाभ मिलेगा। मछली और पेपरबोर्ड सहित अन्य वस्तुओं पर भी शून्य शुल्क लागू होगा।
बांग्लादेश पर जीरो, भारत के कपड़ों पर 18 फीसदी टैरिफ
यहां यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि अमेरिकी कपास या कृत्रिम रेशे से बने बांग्लादेशी वस्त्रों पर शून्य फीसदी शुल्क लगेगा, जबकि भारत से अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले वस्त्रों पर 18 प्रतिशत शुल्क लगेगा। इससे ढाका को भारत पर बढ़त मिलती है। भारत अमेरिका से 200 मिलियन डॉलर तो वहीं बांग्लादेश 250 मिलियन डॉलर की कपास खरीदता है।
ऐसे में भारत को जहां 18% टैरिफ देने का नुकसान उठाना पड़ेगा, जबकि बांग्लादेश को अपने कपड़ों को जीरो टैक्स पर बेचने की सुविधा मिल गई है। इससे बांग्लादेश के मुकाबले भारतीय कपड़ा इंडस्ट्री को नुकसान हो सकता है।
पाकिस्तान जितना ही बांग्लादेश पर टैरिफ
डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के मुताबिक, बांग्लादेश-अमेरिका समझौते के अनुसार, बांग्लादेशी वस्तुओं पर 19 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। वहीं, अमेरिका को निर्यात की जाने वाली भारतीय वस्तुओं पर 18 प्रतिशत टैरिफ निर्धारित किया गया है।
संयोगवश, बांग्लादेश पर लगने वाला अमेरिकी टैरिफ 19 प्रतिशत पाकिस्तान पर लगने वाले टैरिफ के समान है। अन्य जिन देशों पर 19 प्रतिशत टैरिफ लगता है, उनमें मलेशिया और थाईलैंड शामिल हैं।
क्या पाकिस्तान के इशारे पर की गई ऐसी डील
लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, बांग्लादेश-अमेरिका की ट्रेड को लेकर एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या बांग्लादेश की ऐसी डील पाकिस्तान के इशारे पर की गई है। दरअसल, बांग्लादेश में भारत विरोधी मोहम्मद यूनुस सरकार की नजदीकियां पाकिस्तान और चीन के साथ ज्यादा बढ़ गई हैं।
यहां तक कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भी बांग्लादेश में अपनी पैठ बनाने में लगी हुई है। वहीं, बांग्लादेश ने चीन से निकटता बढ़ाकर सैन्य ड्रोन फैक्ट्री लगाने की डील कर ली है। सोढ़ी के मुताबिक, कोई बड़ी बात नहीं कि ऐसी डील पाकिस्तान के इशारे पर हुई हो, क्योंकि कुछ भी अमेरिका पाकिस्तान को अपना करीबी दोस्त मानता आया है।
बांग्लादेश को 14 बोइंग विमान भी देगा अमेरिका
समझौते के अनुसार, बांग्लादेश ने रसायन, चिकित्सा उपकरण, मशीनरी, मोटर वाहन और पुर्जे, सोया उत्पाद और डेयरी उत्पाद, गोमांस, मुर्गी पालन, मेवे और फल सहित अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण तरजीही बाजार पहुंच प्रदान करने पर सहमति जताई है।
इसके अलावा, व्हाइट हाउस ने कहा कि बांग्लादेश अमेरिकी वाहन सुरक्षा और उत्सर्जन मानकों को स्वीकार करके, अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के प्रमाणपत्रों को मान्यता देकर और पुनर्निर्मित वस्तुओं पर आयात प्रतिबंध हटाकर गैर-शुल्क बाधाओं को भी कम करेगा। इस समझौते में यह भी कहा गया है कि बांग्लादेश अमेरिका से 14 बोइंग विमान भी खरीदेगा।
यह समझौता बांग्लादेश के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
समझौते के तहत, वाशिंगटन कुछ वस्त्रों और परिधानों पर शुल्क छूट देने की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह बांग्लादेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा वस्त्र उत्पादक देश है।
यह क्षेत्र बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कुल निर्यात आय का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। इसमें लगभग 40 लाख कामगार लगे हुए हैं। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इसका योगदान 10 प्रतिशत है।
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, कम टैरिफ दर से बांग्लादेशी निर्माताओं को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद मिल सकती है, जो उनके सबसे बड़े निर्यात गंतव्यों में से एक है।
अमेरिका और भारत के बीच समझौते की टाइमलाइन अजीब
बांग्लादेश और अमेरिका के बीच हुए समझौते का समय अजीब है। यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच व्यापार समझौते की घोषणा के ठीक एक सप्ताह बाद हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय निर्यात पर शुल्क कम किया जाएगा।
अब भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत हो गया है, जो बांग्लादेश से एक प्रतिशत कम है। भारतीय अधिकारियों और विश्लेषकों का कहना है कि कम टैरिफ से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में मामूली लाभ मिलेगा।
भारत-अमेरिका डील में यह है बड़ी शर्त
कुछ दिनों बाद जारी एक संयुक्त बयान में यह भी बताया गया कि भारत अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामान खरीदेगा। समझौते के अनुसार, भारत ने सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं के साथ-साथ कई खाद्य और कृषि उत्पादों पर अपने मानक टैरिफ को कम करने का वादा किया है।
दूसरी ओर अमेरिका केवल उन पारस्परिक टैरिफ को कम करेगा जो वर्तमान में लगभग 55 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर लागू हैं। उन्हें 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा।
एशिया में इन देशों पर सबसे ज्यादा टैरिफ
हालांकि, लाओस और म्यांमार पर काफी अधिक 40 प्रतिशत शुल्क लगता है, जबकि चीन पर यह 34 प्रतिशत से 37 प्रतिशत के बीच है। एशिया के बाहर कुछ सबसे अधिक अमेरिकी शुल्क ब्राजील पर 50 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीका पर 30 प्रतिशत लागू होते हैं। तुलनात्मक रूप से, अमेरिका से सबसे कम शुल्क पाने वाले देशों में यूनाइटेड किंगडम 10 प्रतिशत, यूरोपीय संघ, स्विट्जरलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया लगभग 15 प्रतिशत शुल्क पर हैं।
