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भारत को बहुआयामी रणनीति की जरूरत

नई दिल्लीः भारत द्वारा हाल ही में किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने सीमा पार मौजूद कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। यह भारत की अब तक की सबसे सटीक और सख्त जवाबी कार्रवाइयों में से एक थी। इसने न केवल आतंकी समूहों को झटका दिया, बल्कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को भी बैकफुट पर ला दिया। लेकिन अब जो संकेत मिल रहे हैं, वो और भी ज़्यादा चिंताजनक हैं-पाकिस्तान एक बार फिर आतंकी ढांचा तैयार करने में जुट गया है। इसमें ISI की मुख्य भूमिका है, और चीन की मदद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

भारत विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा

भारत की सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के बाद, पाकिस्तान के आतंकी ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा। लेकिन ISI की आदत है-जब एक रास्ता बंद होता है, वह दूसरा खोलती है।खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और पीओके में छुपे आतंकी फिर से एक्टिव हो रहे हैं। ISI नकली NGOs, मदरसे, और सोशल मीडिया नेटवर्क्स के ज़रिए युवाओं को बहका रही है। भारत विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देने के लिए डार्क वेब और ब्लैक फंडिंग नेटवर्क्स का इस्तेमाल हो रहा है। मतलब पाकिस्तान भारत के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर छेड़े हुए हैं।

पहलगाम हमले के बाद संकट बढ़ गया

 विश्लेषक कहते हैं कि दक्षिण एशिया में भारत और पाकिस्तान के बीच का विवाद एक बड़ी समस्या है। दुनिया चिंतित है क्योंकि दोनों देशों के पास परमाणु हथियार हैं। वे युद्ध के कगार पर खड़े हैं। कश्मीर में अप्रैल 2025 में हुए एक आतंकवादी हमले ने इस समस्या को फिर से सुर्खियों में ला दिया।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि दोनों देशों के प्रॉक्सी वॉर यानी छुपकर युद्ध। इससे यह विवाद सालों से चल रहा है। 22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में हमला पर्यटकों को निशाना बनाकर किया गया था। इसमें 26 लोग मारे गए और 20 से ज्यादा घायल हो गए। द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) नाम के संगठन ने हमले की जिम्मेदारी ली।

लेकिन, यह भी पता चला कि इस संगठन का संबंध पाकिस्तान के आतंकी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से है। इस हमले से पता चलता है कि स्थिति कितनी खतरनाक है। कई सालों से शांति वार्ता चल रही है। फिर भी, खूनखराबा जारी है। यह सब प्रॉक्सी वॉर की वजह से हो रहा है।

पहलगाम हमले के बाद भारत ने तुरंत कार्रवाई की। भारत ने कुछ राजनयिकों को देश से निकाल दिया। सिंधु जल संधि के कुछ हिस्सों को रोक दिया गया। LoC पर सेना को और सतर्क कर दिया गया। भारत का मानना है कि यह हमला पाकिस्तान द्वारा भारत को कमजोर करने की कोशिश है। भारत पाकिस्तान द्वारा आतंकी संगठनों को समर्थन देने से बहुत परेशान है। प्रॉक्सी वॉर की वजह से तनाव हमेशा बना रहता है।

 प्रॉक्सी वॉर यानी छिपकर युद्ध लड़ना भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का एक मुख्य कारण है। पाकिस्तान, कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी समूहों का इस्तेमाल भारत पर दबाव बनाने के लिए करता है। इससे पाकिस्तान पर सीधे हमला करने का खतरा नहीं होता है। LeT और JeM जैसे संगठन पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े हुए हैं।

ये संगठन पाकिस्तान को भारत पर दबाव बनाने का एक तरीका देते हैं। भारत ज्यादातर सीधे सैन्य कार्रवाई करता है। इसमें सर्जिकल स्ट्राइक और खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकवाद विरोधी अभियान शामिल हैं। भारत छुपकर युद्ध लड़ने जैसे तरीके इस्तेमाल नहीं करता है। भारत की सेना पाकिस्तान से ज्यादा ताकतवर है। लेकिन, पाकिस्तान छुपकर युद्ध लड़कर भारत की ताकत को कम कर देता है। इससे भारत को हमेशा बचाव की मुद्रा में रहना पड़ता है।

चीन की चुप्पी नहीं, सहमति है

पाकिस्तान और चीन की दोस्ती सिर्फ कूटनीतिक नहीं, रणनीतिक भी है। ऑपरेशन सिंदूर के समय भी चीन ने इस पर कोई विरोध दर्ज नहीं कराया, न ही आतंक पर कोई आलोचना की। उल्टा CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) की सुरक्षा के नाम पर चीनी तकनीकी उपकरण भारत-विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल हुए।डिप्लोमैटिक मंचों पर चीन, पाकिस्तान के आतंक पर आंखें मूंदे बैठा है। यह रणनीति चीन की ‘Distract India Doctrine’ का हिस्सा है-भारत को पश्चिमी सीमा पर उलझाकर पूर्वी सीमा (LAC) पर अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास।

वैश्विक प्रॉक्सी वॉर का दौर: ईरान-इजरायल से सीख

दुनिया अब खुले युद्ध नहीं लड़ती। प्रॉक्सी वॉर-यानी किसी और की जमीन, किसी और के नाम पर लड़ाई लड़ना — आज की हकीकत है। ईरान और इज़रायल का हालिया तनाव एक उदाहरण है: हिज़्बुल्ला और हामास जैसे ग्रुप्स का इस्तेमाल किया गया। भारत के खिलाफ भी ‘फ्रंट ग्रुप्स’, sleeper cells और साइबर टूल्स का इस्तेमाल हो रहा है।

भारत को कैसे सतर्क रहना होगा?

भारत को अब सिर्फ फिजिकल सिक्योरिटी नहीं, बल्कि 4D सुरक्षा नीति पर ध्यान देना होगा:

  • पहला डिफेंस (Defence) -सीमाओं पर सेना की सक्रियता, रियल टाइम इंटेलिजेंस।
  • दूसरा, डिप्लोमेसी (Diplomacy) – चीन और पाकिस्तान के गठजोड़ को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर करना।
  • तीसरा डेटा (Data)- साइबर इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, आतंक के डिजिटल फंडिंग ट्रैक्स को रोकना।
  • चौथा डोमेस्टिक रेजिलेंस (Domestic Resilience) भारत के अंदर किसी भी रेडिकल एजेंडे को रोकना, खासकर युवाओं में।

 

भारत को बहुआयामी रणनीति की जरूरत

पाकिस्तान, चीन और अन्य राज्यप्रायोजित ताकतें अब आतंकवाद को एक नए स्वरूप में सामने ला रही हैं। अब यह सिर्फ बंदूक की लड़ाई नहीं, बल्कि डिजिटल, वैचारिक और मनोवैज्ञानिक युद्ध बन चुका है। भारत को अब सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर जैसे सैन्य अभियानों से नहीं, बल्कि सोच, तकनीक, और अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ों से जवाब देना होगा।