पीएम मोदी सरकार के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में भारत ने आधुनिक तकनीक और सख्त कानूनों के बल पर 2019 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों का प्रत्यर्पण कर राष्ट्रीय सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को एक नई ऊंचाई दी है।
नई दिल्ली: पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपना रही है। वर्ष 2019 से लेकर अब तक 36 अलग-अलग देशों से 274 भगोड़ों को भारत वापस लाया जा चुका है। केंद्र सरकार के इस मिशन में आतंकवादियों, गैंगस्टरों, नशीले पदार्थों के तस्करों और गंभीर आर्थिक अपराधों के आरोपियों को निशाना बनाया गया है।
ऑपरेशन त्रिशूल’ के तहत ट्रैक हुए अपराधी
आपको बता दें कि यह बड़ी सफलता गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में विकसित एक नए एकीकृत और तकनीक-संचालित मॉडल के कारण संभव हो सकी है। सुरक्षा एजेंसियों ने सैटेलाइट डेटा, डिजिटल फुटप्रिंट्स और प्रोफाइल-मैपिंग के जरिए पहचान बदलकर रह रहे अपराधियों को ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ के तहत ट्रैक किया। इसके अलावा, CBI के ‘ग्लोबल ऑपरेशन्स सेंटर’ और जनवरी 2025 में लॉन्च हुए ‘BHARTPOL’ पोर्टल ने केंद्रीय व राज्य एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने का समय घटाकर केवल 3 से 10 दिन कर दिया है।
मोदी सरकार ने लागू किया ये प्रावधान
2014 से पहले, प्रत्यर्पण कानून पुराने पड़ चुके थे और केवल 37 देशों के साथ ही प्रत्यर्पण संधियां थीं। आर्थिक भगोड़ों को पकड़ने या उनकी संपत्ति जब्त करने के लिए कोई विशेष कानून नहीं था। नए आपराधिक कानून (BNSS) की धारा 355 और 356 के तहत ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ का प्रावधान लागू किया गया है, जिससे आरोपी की गैर-मौजूदगी में भी अदालत में मुकदमा चलाया जा सकता है। इसके साथ ही, PMLA कानून के सख्त क्रियान्वयन से 2019 और 2026 के बीच भगोड़ों की ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई और ₹18,762 करोड़ से अधिक की राशि सफलतापूर्वक वापस वसूल की गई है। पिछले 2019 से 2026 तक जिन 274 भगोड़े अपराधियों को वापस लाया गया है, वो इस प्रकार है।
सरकार को कैसे मिली ये सफलता
भगोड़े अपराधियों के खिलाफ मिली सफलता महज संयोग नहीं है, बल्कि यह विश्वसनीयता, कानूनी तैयारी, कूटनीतिक दृढ़ता और लगातार फॉलो-अप का नतीजा है। वर्तमान में IB, CBI, R&AW, NIA, ED और MEA जैसी सभी प्रमुख एजेंसियां ‘पूरे-सरकार’ (Whole-of-Government) दृष्टिकोण के साथ मिलकर काम कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंटरपोल का सहयोग बढ़ाते हुए रेड कॉर्नर नोटिस की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की गई है, जो 2022 में 40 से बढ़कर 2026 में अब तक 182 तक पहुंच गई है। जनवरी 2026 में बने विशेष स्टैंडिंग फोकस ग्रुप के जरिए अब विदेशी सहयोगियों के साथ लगातार फॉलो-अप करके पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने की प्रक्रिया जारी है।
