अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच पूरे खाड़ी में अफरा-तफरी का माहौल है। खाड़ी गए 57,000 भारतीयों की सकुशल वापसी कराई गई है। कुछ भारतीय जो अपने देश लौटना चाहते हैं तो कुछ हैं जो सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं। जानते हैं खाड़ी में फंसे रहे कुछ भारतीयों की कहानी।
नई दिल्ली: ‘हम तो बहरीन कमाने आए थे। सोचा था कुछ साल रुककर पैसे बना लेंगे, मगर यहां तो लड़ाई छिड़ गई है। हम लोग डर-डरकर लुक-छिपकर काम कर रहे हैं। काम करते हैं और फिर चुपचाप अपने-अपने कमरों में रहने चले जाते हैं। बाजार की ओर भी नहीं जाते हैं। डर लगता है कि पता नहीं कब कौन सा बम या मिसाइल आकर गिर जाए।’ दुबई में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करने वाले पंकज राय !
बहरीन में पानी की किल्लत कहीं शुरू न हो जाए
पंकज राय बताते हैं कि वह बहरीन की राजधानी मनामा में कमाने की चाहत में अपने गांव के कुछ साथियों के साथ आए थे। मगर, जब से ईरान ने यहां पर हमला किया है, पानी का संकट सताने लगा है। एक तो वैसे ही यहां पानी महंगा है। डर लगता है कि कहीं बहरीन में पानी की किल्लत न शुरू हो जाए। बहरीन या पूरे खाड़ी में समुद्री खारे पानी को मीठा पानी बनाने वाले संयंत्र हैं, जिनकी सप्लाई होती है। हाल ही में ईरान ने बहरीन के एक डीसैलिनेशन प्लांट को ड्रोन से हमला करके उड़ा दिया था।
दुबई से लौटे तो कहते हैं-थोड़ा कमाना, अपने देश रहना
- वहीं, सीतापुर के हरगांव तहसील के आईटी प्रोफेशनल हरेंद्र नाथ पाठक भी दुबई में अच्छी सैलरी पर एक कंपनी में काम करते थे। वह बताते हैं कि दुबई की लग्जरी लाइफ उन्हें शुरुआत में बहुत अच्छी लगती थी।
- अमेरिका-ईरान के हमले तेज होने से पहले ही वह किसी तरह बच बचाकर इंडिया आ गए। उनका कहना था कि जैसा भी हो, अपना देश अपना ही है। थोड़ा कमाना, मगर सुरक्षित और सुखी रहना ही मेरे जीवन का मकसद है। उनका कहना है कि अब वह अपने देश में ही पैसे कमाएंगे और फिर दुबई लौटकर नहीं जाएंगे।
दुबई जैसे शहर ठप पड़े, एयरपोर्ट-मार्केट सब मायूस
- द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक खबर के अनुसार, जब से अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बमबारी शुरू की, तो दोनों देशों के हमलों और ईरान के जवाबी हमलों की एक ऐसी सीरीज को जन्म दिया, जिसके चलते पड़ोसी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं।
- खाड़ी के मुहाने पर स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग पूरी तरह से जहाजों के लिए बंद हो गया है। दुबई जैसे शानदार शहर, जिन्हें लंबे समय से इस क्षेत्र में व्यवसायों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना माना जाता था, ठप पड़ गए हैं, हवाई अड्डे और शेयर बाजार ठप हो गए हैं।
खाड़ी में रहते हैं 93 लाख भारतीय
- द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, भारत की आबादी अब 140 करोड़ से अधिक है और यह दुनिया भर में सबसे अधिक प्रवासी कामगारों को विदेशों में भेजता है। इनमें से 1.5 करोड़ लोग अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और लगभग हर जगह अपना नाम कमा रहे हैं।
- इनमें से सबसे बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी में स्थित है, जो भारत से तीन घंटे की उड़ान की दूरी पर है। भारत सरकार के नवीनतम अनुमान के अनुसार, खाड़ी में 93 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं, जबकि अमेरिका में यह संख्या 20 लाख है।
होर्मुज के गलियारे सभी के लिए अहम
- न्यूयॉर्क टाइम्स ने नई दिल्ली में रहने वाली और फारस की खाड़ी में पली-बढ़ी प्रवास नीति शोधकर्ता नम्रता राजू के हवाले से कहा-होर्मुज का यह गलियारा सभी देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत और फारस की खाड़ी के देश व्यापार संतुलन से लेकर बोलचाल की भाषा तक, हर चीज में एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
- दुबई में भारतीय स्वास्थ्य सेवा अधिकारी रेहान खान ने कहा-मैं यहां लगभग सभी से हिंदी में बात करता हूं। कई अरब लोग भी इसे बोलते हैं। रेहान खान अपनी कामकाजी लाइफ के लिए दुबई और मुंबई के बीच सफर करते रहते हैं।
खाड़ी में सबको जोड़ती है हिंदी
हिंदी बॉलीवुड की लोकप्रिय भाषा है, उन दक्षिण एशियाई लोगों के लिए एक सेतु भाषा का काम करती है जो पश्तून, मलयालम या बंगाली बोलते हुए बड़े हुए हैं। खान ने कहा कि वो कार्यालय और घर के अलावा शायद ही कहीं अंग्रेजी बोलते हैं। यहां सब इसी हिंदी में ही बात करते हैं।
खाड़ी से अब तक 52,000 से ज्यादा लोग लाए गए
- विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है कि पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के बाद 1 से 7 मार्च के बीच खाड़ी क्षेत्र से 52,000 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रूप से भारत वापस लाया गया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इनमें से 32,107 यात्रियों ने भारतीय विमानों से यात्रा की। वहीं, बाकी विदेशी एयरलाइंस से आए।
- विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रही है। खासकर पारगमन में या अल्पकालिक यात्राओं के दौरान फंसे भारतीय नागरिकों के कल्याण पर विशेष ध्यान दे रही है।
