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पीएम मोदी और पुतिन 24 घंटे में 3 बार मिले… कई महत्वपूर्ण डील लेकिन क्यों S-500, Su-57 पर नहीं खोले पत्ते?

   रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा खत्म हो चुकी है। पुतिन की इस यात्रा पर दुनियाभर की निगाहें टिकी थीं। दोनों देशों को बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों की घोषणा हुई। हालांकि, जिस डील पर सब लोगों की नजरें थी, S-500 और Su-57 फाइटर प्लेन को लेकर कोई ऐलान नहीं हुआ।

नई दिल्ली : रूसी राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा पूरा हो चुका है। रूसी राष्ट्रपति की इस भारत यात्रा पर दुनियाभर की नजरें लगी थीं। नई पुतिन ने दिल्ली में 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान भारत और रूस के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और तकनीकी समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई और समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा। खास बात है कि इस दौरे में पुतिन और पीएम मोदी की तीन बार मुलाकात हुई। इसके बावजूद दोनों नेताओं की तरफ से बहुप्रतीक्षित S-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम और Su-57 फाइटर प्लेन से जुड़े समझौते या किसी भी घोषणा का जिक्र नहीं हुआ।

डिफेंस पार्टनरशिप में बदलाव के संकेत

भारत और रूस ने अपनी दशकों पुरानी डिफेंस पार्टनरशिप में एक बड़े बदलाव का संकेत दिया है। दोनों देशों ने ट्रेडिशनल बायर-सेलर मॉडल से जॉइंट रिसर्च, डेवलपमेंट, को-प्रोडक्शन और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी शेयरिंग पर आधारित मॉडल में बदलने की योजना की घोषणा की। मोदी-पुतिन समिट के बाद जारी एक जॉइंट स्टेटमेंट में कहा गया कि यह बदलाव डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में भारत की आत्मनिर्भरता की कोशिशों से मेल खाता है। इससे उम्मीद है कि मॉस्को आने वाले समय में नई दिल्ली का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर बना रहेगा।

दोनों पक्ष पहले से सर्विस में मौजूद रशियन प्लेटफॉर्म को बनाए रखने के लिए जरूरी स्पेयर पार्ट्स, कंपोनेंट्स और दूसरे इक्विपमेंट का भारत में जॉइंट प्रोडक्शन बढ़ाने पर सहमत हुए। इसमें मेक इन इंडिया पहल के तहत मैन्युफैक्चरिंग शामिल है। इसे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर कमिटमेंट्स से सपोर्ट मिला है। स्टेटमेंट में कहा गया कि दोनों देश भारत की आर्म्ड फोर्सेस को सप्लाई करने और आखिर में बाद में आपसी फ्रेंडली तीसरे देशों को एक्सपोर्ट करने के लिए जॉइंट वेंचर्स पर भी विचार करेंगे।

एस-500, एसयू-57 पर क्यों नहीं हुई घोषणा?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत और रूस की तरफ से भले ही इस बारे में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है लेकिन दोनों पक्षों की तरफ से इस दिशा में पर्दे के पीछे सकारात्मक चर्चा चल रही है। चूंकि दुनियाभर की निगाहें इस मीटिंग पर थी, ऐसे में भारत और रूस रणनीति के तहत इस पर प्रत्यक्ष रूप से कोई घोषणा नहीं की। अमेरिका जैसे देश रूस से बड़े हथियारों की खरीद पर अपनी चिंता जताते रहे हैं।

डिफेंस एक्सपर्ट्स के अनुसार ऐसे में यदि भारत और रूस की तरफ से तुरंत कोई बड़ी घोषणा होती तो पूरा मोमेंट उस तरफ शिफ्ट हो जाता। एक्सपर्ट का कहना है कि रक्षा सौदे अक्सर एक लंबी और गोपनीय प्रक्रिया होते हैं। यह कोई नई बात नहीं है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछली S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद को लेकर भी शुरुआत में कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई थी। डील को सार्वजनिक करने से पहले दोनों देश सभी तकनीकी, वित्तीय और रणनीतिक पहलुओं को अंतिम रूप देने को तरजीह देते हैं।

एसयू-57 पर फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

भारत Su-57 के लिए पूरी तरह से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और रूस के साथ मिलकर प्रोडक्शन करना चाहता है। हालांकि, रूस की तरफ इस दिशा में सकारात्मक संकेत दिए जा चुके हैं। ऐसे में दोनों पक्ष डील के सभी पहलुओं पर पर्दे के पीछे व्यापक चर्चा कर रहे हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, रूस अभी भी Su-57 को अपनी वायुसेना के लिए सीमित संख्या में यूज कर रहा है। ऐसे में उसका पूरा फोकस अभी घरेलू डिमांड को पूरा करना है। डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह ने पहले ही संकेत दिया था कि बातचीत का ध्यान व्यापक रक्षा सहयोग पर होगा, न कि सुर्खियां बटोरने वाली घोषणाओं पर।