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एक है ‘रागा (राहुल गांधी) टच’, उन्होंने छू दिया तो डूबना तय है .विपक्ष में इंडी गठबंधन में विकल्प की तलाश शुरू

    बिहार में महागठबंधन की बड़ी हार से विपक्षी इंडिया ब्लॉक का मंसूबा बुरी तरह से धाराशायी हो गया है। इंडी गठबंधन में शामिल दल अब अपना अलग रास्ता अख्तियार करने की सोचने लगे हैं। सबकी निराशा कांग्रेस और उसके नेता से ज्यादा लग रही है।

नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव में विपक्षी महागठबंधन की करारी हार ने राष्ट्रीय स्तर पर इंडी गठबंधन में खलबली मचा दी है। विपक्षी गठबंधन में शामिल दल, सार्वजनिक तौर पर अपने ही गठबंधन की खिल्ली उड़ाने लगे हैं। जिसे जो मन में आ रहा है, बिहार में विपक्ष की खोखली रणनीति पर अपनी भड़ास निकाल रहा है। लेकिन, सभी की शिकायतों और टिप्पणियों में एक बात सामान्य ये है कि गठबंधन की नाकामी के लिए कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी ही सबके निशाने पर नजर आ रहे हैं

शिवसेना (यूबीटी) ने खोला मोर्चा

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पिछले साल विपक्षी इंडिया ब्लॉक की बहुत ही गंदी वाली हार हो चुकी है। लोकसभा चुनावों में यहां इसने एनडीए का गणित ऐसा बिगाड़ा था कि बीजेपी अपने दम पर केंद्र में सत्ता में नहीं आ सकी। लेकिन, विधानसभा चुनाव में बड़े-बड़े दावे करने वाले विपक्षी दलों को लंगोटी बचानी मुश्किल पड़ गई।

अब बिहार चुनाव में जिस तरह से विपक्षी दलों के मंसूबों का गुब्बारा फूटा है, उसके बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) के निशाने पर कांग्रेस और राहुल गांधी आ चुके हैं। पार्टी के प्रवक्ता आनंद दुबे टीवी चैनलों पर घूम-घूम कर इनका मजाक उड़ा रहे हैं। उनका यह वीडियो काफी वायरल भी हो रहा है। एक जगह वह कह रहे हैं, (इंडी गठबंधन की स्थिति पर) जब हम भंडारे में जाते हैं तो खाना खत्म हो जाता है और जब बाहर आते हैं तो चप्पल गायब हो जाता है..नाच हम पा नहीं रहे हैं और हम कहते हैं कि आंगन भी टेढ़ा है और छत भी टेढ़ी है हम ही सीधे हैं…ये कैसा गठबंधन है हमलोगों का..हमारा दुख कम कम क्यों नहीं होता।

रागा टच से अलर्ट हो जाए गठबंधन’

आम आदमी पार्टी (आप) यूं तो औपचारिक तौर पर इंडी गठबंधन से बाहर हो चुकी है। बिहार में भी वह अलग चुनाव लड़ी। लेकिन,गठबंधन की चिंता उससे छूटती नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर उसके नेता हर महत्वपूर्ण मसले पर विपक्षी दलों के साथ तालमेल करते दिख जाते हैं। लोकसभा चुनाव के समय से ही इंडी अलायंस से आप का रिश्ता क्या कहलाता है, कोई ठीक से दावा नहीं कर सकता।

बिहार में नोटा को भी जिस पार्टी से 6 गुना ज्यादा वोट मिले हैं, उसने भी कांग्रेस और खासकर राहुल को बुरी तरह से लपेट कर सहयोगी दलों को सावधान करना शुरू कर दिया है। पार्टी प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने एक टीवी डिबेट में कहा, यह हाई टाइम है कि कांग्रेस के सभी अलांयस पार्टनर यह मान लें कि….एक है ‘रागा (राहुल गांधी) टच’, उन्होंने छू दिया तो डूबना तय है।

जेएमएम विकल्प पर कर रही विचार

इंडी गठबंधन में दरार तभी नजर आ गई थी, जब जेएमएम को सहयोगियों की बेरुखी की वजह से बिहार चुनाव लड़ने का मंसूबा त्यागना पड़ा था। पार्टी ने बड़े सहयोगी दलों पर उसके साथ किए वादे का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया। उसके बाद से पार्टी के नेताओं ने कहा है कि गठबंधन में क्षेत्रीय दलों के साथ ‘जूनियर पार्टनर’ की तरह बर्ताव होता है। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी इंडी गठबंधन में अपनी भागीदारी पर फिर से विचार कर रही है।

सपा के मन में भी चल रही है मंथन

शिकायत यूपी में समाजवादी पार्टी भी कर रही है। पार्टी के नेता कह रहे हैं कि अखिलेश यादव ने बिहार में महागठबंधन के पक्ष में कई रैलियां कीं, कई स्टार प्रचारक भेजे, लेकिन चुनाव लड़ने के लिए एक भी सीट नहीं छोड़ी गई। बिहार में महागठबंधन को जिस तरह से हैंडल किया गया है, उसको लेकर पार्टी इंडिया अलायंस में सीरियस कोर्स करेक्शन की बात कहने लगी है। यह राज्यों में प्रभावशाली क्षेत्रीय दलों को अहमियत दिए जाने पर जोर दे रही है, जो सीधे-सीधे कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए किसी सियासी चेतावनी से कम नहीं है।