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सुन्दर काव्य रचना का आन्नद ले…ठंड का मौसम देखो! जा ठंडी…… देखो! जा ठंडी, बहुतै घमंडी

काव्य रचना: ठंड का मौसम देखो! जा ठंडी…… देखो! जा ठंडी, बहुतै घमंडी। पगडंडी में छायी, कोहरे की मंडी।। जाडे़ की ओस तो, ऊपर उड़त भाप। गरम पानी खौल, जैसे जल है उड़ात।। पानी में डार हाथ, बहुतै सन्नात। कपकपी मानुष खाँ बहुतै है सतात।। देखो! जा ठंडी, बहुतै घमंडी। पगडंडी में छायी, कोहरे की…

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