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ईरान संघर्ष से हालात चुनौतीपूर्ण, भारत के पास राहत और नीति ढील की गुंजाइश-वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज कहा कि प​श्चिम एशिया संघर्ष अब क्षेत्रीय सुरक्षा चिंता तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह ‘प्रणालीगत झटके’ में बदल गया है। यह वैश्विक ऊर्जा की अहम धमनियों के लिए खतरा पैदा कर रहा है और एक नई बहु-ध्रुवीय वै​श्विक व्यवस्था की रूपरेखा को मजबूती दे रहा है।

वित्त मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित क्षेत्रों को समर्थन देने के लिए भारत के पास पर्याप्त वित्तीय गुंजाइश है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ब्याज दर में कटौती की गुंजाइश है। रिजर्व बैंक गवर्नर की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति बुधवार को मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करेगी।

राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) के स्वर्ण जयंती समारोह को संबो​​धित करते हुए सीतारमण ने कहा, ‘यह मौजूदा साल और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण है क्योंकि हम कभी कभार आने वालों ‘झटकों’ की ​स्थिति से निकलकर स्थायी उतार-चढ़ाव वाले माहौल की ओर बढ़ रहे हैं।’

सीतारमण ने कहा कि इस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिरता, अनिश्चितता, जटिलता और अस्पष्टता के दौर से गुजर रही है। आ​र्थिक विकास संस्थान के निदेशक सव्यसाची कर के एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने खरीफ सीजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए उर्वरकों का पर्याप्त भंडार तैयार कर लिया है। हालांकि उन्होंने कहा कि रबी सीजन के लिए निविदा प्रक्रिया अब शुरू हो जानी चाहिए लेकिन असली चुनौती यह है कि खरीद की निविदा किस कीमत पर लाई जाए।

वित्त मंत्री ने हाल ही में भारत आ रहे वाले ईरानी कच्चे तेल के जहाज को चीन की ओर मोड़ने का जिक्र करते हुए कहा, ‘मुझे मात्रा की चिंता नहीं है क्योंकि बहुत ज्यादा खरीदारी हो रही है। लोग जमाखोरी भी कर रहे हैं। आपूर्तिकर्ता के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं है।’

वित्त मंत्री ने कहा, ‘अब कई बीमा कंपनियों ने उन पोतों का बीमा करने से इनकार कर दिया है जो कुछ खास इलाकों से होकर गुजरते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘गैस ले जाने वाले विशाल टैंकरों जैसे जहाज एक नि​श्चित गंतव्य के लिए होते हैं लेकिन उन्हें अंतिम समय में बदल दिया जाता है। यह ऐसी चीजें नहीं हैं जिनकी आप अपेक्षा करते हैं।’

सीतारमण ने कहा कि वर्तमान समय में बजट बनाने की प्रक्रिया केवल तीसरी और चौथी तिमाही तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि आज जो कुछ भी हो रहा है, उस पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है।

भारत की सार्वजनिक वित्त नीति और ऋण प्रबंधन पर चर्चा करते हुए सीतारमण ने कहा कि विवेकपूर्ण राजकोषीय नीति केवल मितव्ययिता या खर्च में कटौती के बारे में नहीं है बल्कि संसाधनों का कुशलतापूर्वक और पारदर्शी ढंग से उपयोग करने के बारे में भी है। उन्होंने कहा कि व्यापारिक व्यवधान के इस दौर में, जिसने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है, राजकोषीय विवेक पहले की सोच से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हो गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि जहां कई देशों में कर्ज का स्तर ऊंचा है और घाटा भी अ​धिक है वहीं भारत के पास राजकोषीय गुंजाइश है। पूंजीगत व्यय योजना को बनाए रखने, आरबीआई के लिए दरों में कटौती करने और प्रभावित क्षेत्रों को लक्षित सहायता प्रदान करने की गुंजाइश है। यह एक दशक के राजकोषीय विवेक और अनुशासन का लाभांश है।’

वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि कर आधार का विस्तार करना काफी मु​​श्किल होता है मगर उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) का उद्देश्य यह देखना था कि बड़े खर्च करने वाले करदाता हैं या नहीं।

उन्होंने कहा, ‘मैं वास्तव में टीडीएस से आने वाले राजस्व का इंतजार नहीं कर रही हूं। मैं उनके यह कहने का इंतजार कर रही हूं कि देखिए, मैंने टीडीएस का भुगतान किया है लेकिन मेरा कर आकलन यह है…मैं कर भुगतान ढांचे में निचले स्तर पर रहने वाले ज्यादा से ज्यादा लोगों को राहत देना चाहती हूं।’