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ईरान के खिलाफ किस मुद्दे पर UNSC में खड़ा हुआ भारत, पाकिस्तान भी आया साथ

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने बुधवार को खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के खिलाफ प्रस्ताव को पारित कर दिया। इसके बाद तेहरान ने सुरक्षा परिषद के खुलेआम दुरुपयोग की निंदा की। ईरान के खिलाफ ये प्रस्ताव बहरीन की ओर से रखा गया, जिसमें खाड़ी देशों पर ईरान के हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों की निंदा की गई।

संयुक्त राष्ट्र: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उस प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया जिसमें खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों एवं जॉर्डन के खिलाफ ईरान द्वारा किए गए ”भीषण” हमलों की निंदा की गई है। इसमें सभी ईरानी हमलों को तत्काल रोके जाने की मांग की गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकियों की भी निंदा की गई है। अमेरिका की अध्यक्षता वाली 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद ने 13 मतों के साथ इस प्रस्ताव को बुधवार को पारित किया। इसके खिलाफ कोई मत नहीं पड़ा जबकि वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

ईरान के खिलाफ प्रस्ताव में कौन-कौन से देश शामिल

भारत ने 130 से अधिक देशों के साथ मिलकर बहरीन के नेतृत्व वाले इस प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया। इस प्रस्ताव को प्रायोजित करने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बांग्लादेश, भूटान, कनाडा, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, यूनान, इटली, जापान, कुवैत, मलेशिया, मालदीव, म्यांमा, न्यूजीलैंड, नॉर्वे, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सिंगापुर, स्पेन, यूक्रेन, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, अमेरिका, यमन और जाम्बिया शामिल हैं।

खाड़ी देशों पर हमलों के खिलाफ ईरान की कड़ी निंदा

इस प्रस्ताव के कुल 135 सह-प्रायोजक थे। इसमें बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता एवं राजनीतिक स्वतंत्रता के प्रति मजबूत समर्थन को दोहराया गया है। इसमें बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन के क्षेत्रों पर ईरान के ”भीषण हमलों” की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा गया है कि इस प्रकार के कृत्य अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं तथा अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।

खाड़ी देशों के खिलाफ हमलों को तुरंत रोकने की अपील

इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि ईरान जीसीसी देशों एवं जॉर्डन के खिलाफ सभी हमलों को तत्काल रोके और पड़ोसी देशों के खिलाफ छद्म समूहों के इस्तेमाल समेत किसी भी उकसावे वाली या धमकाने वाली कार्रवाई को ”तुरंत और बिना शर्त” रोके। इसमें दोहराया गया कि व्यापारिक एवं वाणिज्यिक पोतों के नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रता का विशेष रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के आसपास अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप सम्मान किया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव में सदस्य देशों के उस अधिकार को संज्ञान में लिया गया है जिसके तहत वे ”हमलों और उकसावों से अपने पोतों की रक्षा कर सकते हैं।”

ईरान की निंदा की गई

इस प्रस्ताव में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय नौवहन को बंद करने, बाधित करने या किसी भी तरह से हस्तक्षेप करने या बाब अल मंदाब में समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने के उद्देश्य से की गई हर प्रकार की कार्रवाई या धमकी की निंदा की गई। इस प्रस्ताव में कहा गया कि रिहायशी इलाकों पर हमला किया गया, असैन्य साजो सामानों को निशाना बनाया गया और इन हमलों में आम नागरिक हताहत हुए तथा असैन्य इमारतों को नुकसान पहुंचा। प्रस्ताव में उन देशों और लोगों के साथ एकजुटता जताई गई जो हमलों का शिकार हुए हैं।

अमेरिका ने ईरान पर साधा निशाना

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के प्रतिनिधि राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि इस प्रस्ताव को अपनाया जाना ”ईरानी शासन की क्रूरता की निंदा करने वाला खाड़ी देशों का सीधा और स्पष्ट बयान है। ईरानी शासन की आम नागरिकों और असैन्य अवसंरचना को निशाना बनाने की प्रवृत्ति निंदनीय है।” वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम ने कूटनीतिक बातचीत की हर कोशिश की।

अमेरिकी दूत ने ट्रंप की कूटनीति की तारीफ की

वाल्ट्ज ने कहा, ”उन्होंने शांति की कोशिश की और 47 वर्षों की शत्रुता एवं हमलों को खत्म करने का प्रयास किया लेकिन ईरान ने केवल और अधिक मिसाइल, और अधिक ड्रोन तथा परमाणु प्रलय की ओर अग्रसर होने का रास्ता खोजा। राष्ट्रपति ट्रंप ने लक्ष्मण रेखा खींच दी है। ईरान ने इसे एक बार फिर पार किया और अब दुनिया इसके परिणामों का सामना कर रही है।” वाल्ट्ज ने प्रस्ताव का सह-प्रायोजन करने वाले 135 देशों के प्रति आभार जताया।

ईरान ने प्रस्ताव को अवैध और अन्यायपूर्ण करार दिया

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अमीर सईद इरावानी ने परिषद की इस कार्रवाई को ”अन्यायपूर्ण और अवैध” बताते हुए कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है तथा यह ऐसी कार्रवाई है जो आक्रामकता एवं शांति भंग करने के कृत्यों को नियंत्रित करने वाले स्थापित सिद्धांतों की पूर्णतय: अवहेलना करती है। उन्होंने कहा, ”कोई भूल न करे: आज ईरान है; कल कोई और संप्रभु देश हो सकता है।”

ईरान ने अमेरिकी-इजरायली हमलों में मौतों का आंकड़ा गिनाया

इरावानी ने कहा कि 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजराइल के लगातार सैन्य हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 1,348 से अधिक आम नागरिक मारे गए हैं, 17,000 से अधिक आम नागरिक घायल हुए हैं और 19,734 असैन्य स्थलों को नष्ट या क्षतिग्रस्त किया गया है। ईरानी दूत ने कहा, ”इन हमलों का पैमाना और उनका व्यवस्थित स्वरूप युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ स्पष्ट रूप से अपराध है।”

ईरान ने खाड़ी देशों पर हमलों का बचाव किया

इरावानी ने कहा कि ईरान फारस की खाड़ी क्षेत्र के देशों के साथ पारस्परिक सम्मान, अच्छे पड़ोसी होने के सिद्धांत और एक-दूसरे की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए ”प्रतिबद्ध” है। उन्होंने कहा, ”क्षेत्र में अमेरिका के सैन्य अड्डों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की ईरान की रक्षात्मक कार्रवाई किसी भी तरह से क्षेत्रीय देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ नहीं है।