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जन्म-दिवस विशेष :पंडवानी गायिका तीजनबाई

8 अगस्त/जन्म-दिवस पंडवानी गायिका तीजनबाई    पांडवों की वाणी (पंडवानी) छत्तीसगढ़ के वनवासी अंचलों में प्रचलित लोकगायन की एक विशिष्ट शैली है। इसमें महाभारत के विभिन्न प्रसंग तथा पात्रों के बीच संवाद प्रस्तुत किये जाते हैं। गाने के साथ ही इसमें चेहरे के हावभाव और हाथ में लिये तंबूरे की क्रियाओं का भी विशेष महत्व…

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कुछ याद उन्हें भी कर लो……देश की आजादी का मासूम मतवाला, 13 साल की उम्र में हो गया शहीद

   14 अगस्त, 1942 को उत्तर प्रदेश के देवरिया की कहचरी में अंग्रेजों की गोलियों के बीच मासूम रामचंद्र विद्यार्थी ने यूनियन जैक को फाड़कर उसके स्थान पर तिरंगा झंडा फहरा दिया. देश आजादी के उत्सव की तैयारी कर रहा है. वीर शरीदों को याद करने का दिन आ रहा है. क्या खूब कहा है-…

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सावन में व्रत रखने के धार्मिक एवं वैज्ञानिक लाभ

   सावन के महीने में व्रत रखने के धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक लाभ भी माने जाते हैं। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा करने के साथ ही व्रत भी रखा जाता है। ऐसा करने से जहां आपको शिव भक्ति की कृपा प्राप्‍त होती है। वहीं आपकी सेहत भी अच्‍छी होती है। आइए जानते…

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श्रावण मास विशेष:दुनिया का इकलौता अद्भुत शिवलिंग! 1001 नेत्र,सफेद रंग, हर मौसम में अलग रंग, दर्शन से मिलती है अलौकिक शक्ति

    मध्यप्रदेश के रीवा जिले के किले में अनोखा शिव लिंग विराजमान है. शिवलिंग का रंग सफेद है, जो मौसम के अनुसार बदल जाता है. शिव पुराण के मुताबिक भगवान भोलेनाथ ने महासंजीवनी महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति की थी. रीवा ….. मध्यप्रदेश     वैसे तो महादेव कई रुपों में विराजमान हैं. सभी रूप…

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सच्चाई को जानिये:जब मुमताज का इंतकाल 1631 में हुआ तो फिर कैसे उन्हें 1631 में ही ताजमहल में दफना दिया गया, जबकि ताजमहल तो 1632 में बनना शुरू हुआ था

इतिहास में पढ़ाया जाता है कि ताजमहल का निर्माण कार्य 1632 में शुरू और लगभग 1653 में इसका निर्माण कार्य पूर्ण हुआ।     अब सोचिए कि जब मुमताज का इंतकाल 1631 में हुआ तो फिर कैसे उन्हें 1631 में ही ताजमहल में दफना दिया गया, जबकि ताजमहल तो 1632 में बनना शुरू हुआ था।…

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पुण्यतिथि विशेष :राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो0 राजेन्द्र सिंह,हम सबके रज्जू भैया

14 जुलाई/पुण्यतिथि सबके रज्जू भैया     राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो0 राजेन्द्र सिंह का जन्म 29 जनवरी, 1922 को ग्राम बनैल (जिला बुलन्दशहर, उत्तर प्रदेश) के एक सम्पन्न एवं शिक्षित परिवार में हुआ था। उनके पिता कुँवर बलबीर सिंह  अंग्रेज शासन में पहली बार बने भारतीय मुख्य अभियन्ता थे। इससे पूर्व इस…

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जन्म-दिवस विशेष:वेदों के मर्मज्ञ डा. फतह सिंह जिन्हे ‘दिनकर’ ने उन्हें वर्तमान युग का ऋषि और आधुनिक पाणिनी कहा था

13 जुलाई/जन्म-दिवस वेदों के मर्मज्ञ डा. फतह सिंह वेदों के मर्मज्ञ डा. फतह सिंह का जन्म ग्राम भदेंग कंजा (पीलीभीत, उ.प्र.) में आषाढ़ पूर्णिमा 13 जुलाई, 1913 को हुआ था। जब वे कक्षा पांच में थे, तो आर्य समाज के कार्यक्रम में एक वक्ता ने बड़े दुख से कहा कि ऋषि दयानन्द के देहांत से…

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कुछ याद उन्हें भी कर लो जिन वीरो को इतिहास में जगह नहीं दी गई: बलिदान-दिवस बाजीप्रभु देशपाण्डे का बलिदान

13 जुलाई/बलिदान-दिवस बाजीप्रभु देशपाण्डे का बलिदान       शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिन्दू पद-पादशाही की स्थापना में जिन वीरों ने नींव के पत्थर की भांति स्वयं को विसर्जित किया, उनमें बाजीप्रभु देशपाण्डे का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।         एक बार शिवाजी 6,000 सैनिकों के साथ पन्हालगढ़ में घिर गये।…

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इतिहास स्मृति- वीर सावरकर की ऐतिहासिक छलांग

8 जुलाई/इतिहास-स्मृति वीर सावरकर की ऐतिहासिक छलांग     अंग्रेजों के विरुद्ध लड़े गये भारत के स्वाधीनता संग्राम में वीर विनायक दामोदर सावरकर का अद्वितीय योगदान है। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर देश ही नहीं, तो विदेश में भी क्रांतिकारियों को तैयार किया। इससे अंग्रेजों की नाक में दम हो गया। अतः ब्रिटिश शासन…

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कितना बड़ा मजाक किया गया भारत वर्ष के इतिहास के साथ….

      एक बार मेरा मित्र अपने दोस्तों के साथ हिमाचल के पालमपुर से होकर ट्रेकिंग पर जा रहे थे, मार्ग में माँ भगवती ज्वाला जी का प्रसिद्ध मंदिर आता है, जोकि कांगड़ा नगर से 30 किलो मीटर दूर एक नदी के तट पर है। हमने सोचा चलो माँ भगवती के दर्शन करते हुए…

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