एक अध्ययन में पाया गया है कि विटामिन डी का लेवल यदि शरीर में कम है तो इससे टाइप 2 डायबिटीज और ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है. विटामिन डी की कमी मेटाबोलिक सिंड्रोम के जोखिम को बढ़ा देती है.
सर्दी में जब तापमान में अचाक कमी आ जाती है तो हर तरह से हमारे शरीर पर इसका असर पड़ता है. एक तो वातावरण में नमी के कारण असंख्य हानिकारक सूक्ष्मजीव पनपने लगते है जिससे शरीर पर इसका हमला बढ़ जाता है दूसरा हमारा मूवमेंट कम हो जाता है जिसके कारण शरीर में शिथिलता आ जाती है. इससे शरीर के हर अंग पर असर पड़ता है. इन सबके बीच सर्दी में एक तो धूप की कमी हो जाती है दूसरा लोग बाहर भी कम जाते हैं.
इस कारण विटामिन डी की भारी कमी हो जाती है. विटामिन डी की कमी होने से पूरे शरीर का सिस्टम हिल जाता है. विटामिन डी की कमी हो जाएगी तो कैल्शियम का अवशोषण भी नहीं होगा इस कारण सबसे अधिक हड्डियों पर असर पड़ेगा. रिसर्च के मुताबिक विटामिन डी की कमी के कारण हड्डियों की कमजोरी के अलावा डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम भी बढ़ जाता है.
इन बीमारियों के हो जाएंगे शिकार
एनसीबीआई की रिपोर्ट में कहा गया कि अगर सर्दी में विटामिन डी की कमी हो जाए तो सबसे पहले शुगर लेवल बढ़ने लगता है. वहीं ब्लड प्रेशर भी तेजी से शूट करने लगता है. विटामिन डी की कमी का सबसे ज्यादा असर हड्डियों पर पड़ता है. सर्दी के मौसम में विटामिन डी की कमी से हड्डियों में फ्रेक्चर का डर रहता है. सर्दी में विटामिन डी की कमी से ऑस्टियोमेलोसिस, रिकेटस, मसल्स वीक की शिकायतें आती है.इस कारण हार्ट पर भी दबाव बढ़ता है जिससे हार्ट संबंधी परेशानियां बढ़ सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक विटामिन डी का कम लेवल ऑटोइम्यून डिजीज के रिस्क को बढ़ाता है.
इन परेशानियों से भी करना पड़ेगा सामना
अमेरिकी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसीन जर्नल में अध्ययन के हवाले से कहा गया कि विटामिन डी का लेवल कम होने की वजह से मेटाबोलिक सिंड्रोम का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. वहीं विटामिन डी का संबंध जेशटेशनल डायबिटीज से भी है. यानी प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में टाइप 2 डायबिटीज के मामले भी विटामिन डी की वजह से बढ़ सकते हैं. लेकिन अगर विटामिन डी की खुराक सही है तो जेशटेशनल डायबिटीज को रोकने में मदद मिल सकती है. अध्ययन टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में ग्लाइसेमिक कंट्रोल और डी 3 लेवल के बीच विटामिन डी 3 के संबंधों की पड़ताल की गई थी जिसमें पाया गया कि विटामिन डी का कम लेवल सीधे टाइप 2 डायबिटीज से जुड़ा हुआ है.
अमेरिकी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, विटामिन डी का कम स्तर मेटाबोलिक सिंड्रोम के जोखिम को बढ़ा सकता है. इसके अलावा, विटामिन डी का संबंध जेशटेशनल डायबिटीज से भी है, यानी गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा भी बढ़ सकता है. हालांकि, यदि विटामिन डी की उचित खुराक ली जाए तो जेशटेशनल डायबिटीज को रोका जा सकता है. इस अध्ययन में टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में ग्लाइसेमिक कंट्रोल और विटामिन डी 3 के स्तर के बीच संबंध का विश्लेषण किया गया, जिसमें यह पाया गया कि विटामिन डी का कम स्तर सीधे तौर पर टाइप 2 डायबिटीज से जुड़ा हुआ है.
सर्दियों में विटामिन डी की पूर्ति कैसे करें
सूरज की रोशनी विटामिन डी का सबसे प्रमुख स्रोत है. हालांकि इसके अलावा कुछ खाद्य पदार्थों से भी विटामिन डी प्राप्त किया जा सकता है.विटामिन डी के लिए अंडा, फैटी फिश, टूना, सैल्मन, और मैकरल का सेवन करना चाहिए. शाकाहारी लोगों के लिए अनाज, संतरा, छाछ, और सोया ड्रिंक भी अच्छे स्रोत हो सकते हैं. वहीं मशरूम भी विटामिन डी का अच्छा स्रोत है. यह जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है और विटामिन ए की कमी को भी पूरा करता है.