पहले विदेशी एजेंट, अब अचानक मौत देने वाली साइको ड्रग्स की बड़ी खेप पकड़ी
भारत-म्यांमार सीमा पर करीब 24 करोड़ की गैरकानूनी ड्रग्स की बड़ी खेप पकड़ी गई है। यह खेप एक लावारिस वाहन में मिली है। इससे पहले इसी सीमा के पास म्यांमार के आतंकियों को ड्रोन की ट्रेनिंग देने अमेरिकी और यूक्रेनी आए थे, जो अभी एनआईए की हिरासत में हैं।
नई दिल्ली: भारत-म्यांमार सीमा पर एंटी नॉरकोटिक्स डिपार्टमेंट ने एक बड़े ऑपरेशन में 23.72 करोड़ रुपये की 7.907 किलो की मेथाएंफीटामाइन टैबलेट जब्त की हैं। यह ऑपरेशन सीमा के पास मिजोरम के चंफाई जिले में हुआ है। ऑपरेशन में असम रायफल्स और चंफाई पुलिस ने मिलकर कार्रवाई की। यह ड्रग्स भारत में पूरी तरह से बैन है। यह साइको ड्रग्स है, जो सीधे दिमाग के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को झकझोर कर रख देती है।
आईएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, मेथाएंफीटामाइन टैबलेट की ये खेप एक लावारिस वाहन में मिली, जो हमुनहमेल्था रोड पर खड़ी थी। वाहन को भी जब्त कर लिया गया है। वाहन और ड्रग्स दोनों को ही एक्साइज और नॉर्कोटिक्स डिपार्टमेंट को आगे की जांच के लिए सौंप दी गई है। हाल ही में मिजोरम के रास्ते म्यांमार में घुसे वहां के आतंकियों को ड्रोन की ट्रेनिंग देने आए 6 यूक्रेनी नागरिकों और 1 अमेरिकी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पकड़ा था, जिनसे पूछताछ में देश के खिलाफ साजिश रचने का खुलासा हुआ था।
मेथाएंफीटामाइन क्या होती है, जो भारत में बैन
- क्लीवलैंड क्लीनिक पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, मेथाएंफीटामाइन को शॉर्ट फॉर्म में मेथ भी कहते हैं। इसका इस्तेमाल अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) में किया जाता है। दवा के रूप में इसका इस्तेमाल फोकस बनाए रखने और इंपल्सिव बर्ताव को कमतर करने में किया जाता है।
- यह एक तरह का स्टीमुलेंट है, जो शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम की स्पीड बढ़ा देती है। यह डोपामाइन लेवल को भी बढ़ा देती है, जो एक ब्रेन केमिकल होता है और चलने-फिरने में अहम भूमिका निभाता है। डोपामाइन दिमाग को ऐसे सिग्नल भेजता है, जो आपको खुश महसूस कराने वाले बर्ताव को आपसे बार-बार कराता है।
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साइको ड्रग्स के नाम अनेक, बेहद खतरनाक
- वेबएमडी पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, गैरकानूनी दुनिया में मेथाएंफीटामाइन को आम बोलचाल में स्पीड, क्रिस्टल, क्रैंक, टीना, ग्लास, चाक, गोफास्ट या आइस भी कहा जाता है।
- क्रिस्टल रूप में यह ड्रग्स ग्लास के टुकड़े जैसी दिखती है, इसीलिए इसका एक नाम ग्लास भी है। गैरकानूनी रूप से बेची जाने वाली यह टैबलेट याबा या शाबू नाम से भी जानी जाती है। भारत में इसे आमतौर पर आइस या मेथ कहा जाता है।
दूसरे विश्वयुद्ध में सैनिक करते थे इस्तेमाल
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रिपोर्ट के अनुसार, मेथाएंफीटामाइन मानव निर्मित उत्प्रेरक दवा है। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान मोर्चे पर मुस्तैद रहने और जागने के लिए सैनिक इस ड्रग्स को लिया करते थे। इसका इस्तेमाल वजन घटाने, डिप्रेशन कम करने और एडीएचडी को मैनेज करने के लिए भी लेते थे। अमेरिका-भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में इस ड्रग्स की खरीद-बिक्री गैरकानूनी है।
- अमेरिका में भी बैन ये ड्रग्स, अचानक मौत का खतरा
मेथाएंफीटामाइन टैबलेट्स का इस्तेमाल अमेरिका में भी बैन है। मगर, मेथाएंफीटामाइन हाइड्रोक्लोराइड (Desoxyn) को ही कानूनी मान्यता है, जिसका इस्तेमाल ADHD में किया जाता है।
हालांकि, डॉक्टर Desoxyn को भी देने से बचते हैं। मेथाएंफीटामाइन के इस्तेमाल से अचानक स्ट्रोक, हार्ट अटैक या धड़कनें बेकाबू या सांस लेने में तकलीफ बढ़ सकती है। इससे अचानक मौत भी हो सकती है।भारत में इस ड्रग्स पर पूरी तरह पाबंदी
न्याय डॉट ओआरजी पर छपे एक लेख के अनुसार, मेथाएंफीटामाइन एक साइकोट्रॉपिक पदार्थ है, जिसके बनाने, रखने, लाने-ले जाने, आयात-निर्यात, खरीद-बिक्री और इस्तेमाल पर भारत में पूरी तरह पाबंदी है।
