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UP में ₹35 हजार करोड़ के सोलर प्रोजेक्ट्स की तैयारी, 2027-28 तक 22,000 मेगावाट ऊर्जा का लक्ष्य

   इसके तहत यूपीएनईडीए ने तुस्को लिमिटेड, बुंदेलखंड सोलर एनर्जी लिमिटेड और लखनऊ सोलर पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के साथ तीन जॉइंट वेंचर्स पर काम शुरू किया है

उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा का विस्तार तेजी से हो रहा है। सरकार 2027-28 तक राज्य में 22,000 मेगावाट सोलर पावर लगाने का लक्ष्य रख रही है। इसके लिए पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर मिलकर करीब 35,000 करोड़ रुपये के सोलर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।

इन प्रोजेक्ट्स में सात बड़े सोलर एनर्जी पार्क बनेंगे, जिनकी कुल क्षमता 3,700 मेगावाट होगी। यूपी के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत, नरेंद्र भूषण ने बताया कि इन प्रोजेक्ट्स को एनएचपीसी, टीएचडीसी और अवाड़ा ग्रुप जैसी प्रमुख कंपनियां विकसित करेंगी।

राज्य में अब तक 22,000 मेगावाट के टारगेट में से 8,000 मेगावाट के प्रोजेक्ट्स या तो चालू हो चुके हैं या निर्माणाधीन हैं। बाकी के 14,000 मेगावाट के लिए सरकार सोलर पार्क, पावर प्लांट्स, रूफटॉप और फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स के जरिए काम आगे बढ़ा रही है।

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यूपी बना पीएम सूर्य घर योजना में टॉप पर

पिछले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश नई सोलर कैपेसिटी के मामले में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत नंबर वन राज्य बन गया है। घरेलू सेक्टर में सोलर रूफटॉप स्कीम से लगभग 900 मेगावाट क्षमता तैयार हो चुकी है। सरकार सरकारी इमारतों पर भी रूफटॉप सोलर लगाने में तेजी ला रही है। इसके लिए कैपेक्स मॉडल या रेस्को मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा है।

रेस्को मॉडल में कंपनी पहले सोलर प्लांट लगाती है और उसका रखरखाव करती है। ग्राहक तय रेट पर बिजली खरीदता है और कुछ समय बाद प्लांट का मालिकाना हक ग्राहक को मिल जाता है।

यूपी सोलर एनर्जी पॉलिसी 2022 के तहत राज्य सरकार 22,000 मेगावाट सौर ऊर्जा का लक्ष्य पूरा करने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत यूपीएनईडीए ने तुस्को लिमिटेड, बुंदेलखंड सोलर एनर्जी लिमिटेड और लखनऊ सोलर पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के साथ तीन जॉइंट वेंचर्स पर काम शुरू किया है।

सरकार 37 बड़े जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने की योजना भी बना रही है। इसके अलावा बायोएनर्जी पॉलिसी 2022 के तहत राज्य में रोजाना 250 टन क्षमता वाले सीबीजी प्लांट भी बनाए जा चुके हैं।

केंद्र सरकार की मॉडल सोलर विलेज प्रोग्राम के तहत उत्तर प्रदेश के हर जिले में एक गांव को मॉडल सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे ग्रामीण इलाकों में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ेगा और हर जिले में सोलर प्रोजेक्ट्स का उदाहरण बनेगा।

 

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