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रंगाबिल्ला कौन था…?

   ह्यूमन बिहेवियर साइंस में इस बात की ट्रेनिंग दी जाती है किआप किस उद्देश्य से बाजार में या टीवी चैनल पर या अपने  प्रतिद्वंदी के पास या फिर अपने संभावित कस्टमर के पास जा रहे हैं तो आप सिर्फ अपने उद्देश्य पर फोकस रखिये।
   याद रखिए कि आप वहां थोथी दलीलें देकर बहसबाजी करके मन ही मन यह सोच कर खुश हो रहे हैं कि अरे वाह मैंने इसे बातों से परास्त कर दिया तब आप दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख हैं क्योंकि आपका उद्देश्य उसे बातों से परास्त करना नहीं था बल्कि आपका उद्देश्य उसे अपना ग्राहक बनाना था।
   टीवी चैनल पर किसी भी पार्टी का प्रवक्ता आता है तब ह्युमन बिहेवियरल साइंस के अनुसार उसका उद्देश्य होना चाहिए कि वह अपनी पार्टी के लिए वोट इकट्ठा करें।
   वह अपनी पार्टी के सिद्धांतों को जनता के बीच तर्कों के साथ अच्छे तरीके से सभ्य तरीके से प्रस्तुत करें ताकि जनता के अंदर उसकी राजनीतिक पार्टी की एक अच्छी छवि बन सके।
पता नहीं कैसे सुप्रिया श्रीनेत को कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी ने अपना राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त कर दिया है।
   इन्हें साधारण सलीका,तमीज,खुद को मीडिया पर कैसे अपनी बातों को रखना है ह्यूमन बिहेवियर, सभ्यता,आम जन मानस,ह्यूमन साइकोलॉजी इत्यादि का बेसिक ट्रेनिंग तक नहीं दिया।
     इन्हें लगता है कि एंकर से लड़ने से या बीजेपी के प्रवक्ता से लड़ने से या प्रधानमंत्री और अमित शाह के बारे में अभद्र बातें करने से कांग्रेस पार्टी के वोट बढ़ेंगे तब मुझे सोनिया गांधी और राहुल गांधी की सोच पर बहुत दया आती है की 44 सीटों पर सिमट जाने के बाद भी उन्हें अकल नहीं आती।
    आज एक चैनल पर यह बार-बार  मोदीजी और अमित शाह के लिए रंगा और बिल्ला का प्रयोग कर रही थी उन्हें लग रहा था कि अरे वाह पब्लिक खुश हो जाएगी। हमारे वोट बढ़ जाएंगे लेकिन यह भूल गई बदतमीजी करने से अभद्र बातें करने से वोट नहीं बढ़ते बल्कि पब्लिक 4-5 गालियां देकर तुरंत रिमोट लेकर टीवी बदल देती है। और यह जो रंगा बिल्ला का प्रयोग कर रही थी वह रंगा बिल्ला कांग्रेस के ही कार्यकर्ता थे संजय गांधी के छत्रछाया में रहते थे उस वक्त संजय गांधी कांग्रेस में ही थे और संजय गांधी मरते दम तक कांग्रेस में थे।
संजय गांधी के निधन के बाद जब इंदिरा गांधी ने अपनी गर्भवती बहू को घर से निकाल दिया तब मेनका गांधी ने पार्टी बनाई थी।
     रंगा बिल्ला को संजय गांधी ने हर कोशिश करके बचाया लेकिन उन्होंने सेना के एक अधिकारी के बेटी गीता चोपड़ा का बलात्कार करके मारा था और जब गीता चोपड़ा का भाई अपने बहन को बचाने आया तब उन्होंने उसे भी मारा।
      फिर जब सेना के अधिकारी गुस्से में आ गए और इंदिरा गांधी तक रिपोर्ट गई कि अगर कार्रवाई नहीं हुई फिर सेना में बगावत हो सकती है बल्कि कुछ सैनिकों ने यहां तक कह दिया कि हम रंगा और बिल्ला को गोली मार देंगे भारत सरकार हमें जो चाहे वह सजा दे दे।
   उसके बाद इंदिरा गांधी के आदेश पर रंगा और बिल्ला को पकड़ा गया।उन्हें एक ट्रक में छुपा कर भगाया जा रहा था उसके बाद सेना के दबाव में उन्हें फांसी दी गई।
   और जब बार-बार बदतमीजी से सुप्रिया सीमित के द्वारा रंगा बिल्ला शब्द के प्रयोग पर संबित स्वराज ने सुकन्या देवी बलात्कार का नाम लिया तब सुप्रिया श्रीनेत ऐसे तिलमिला गई जैसे किसी कुत्ते की पूंछ पर आप प्लास्टिक के सोल वाला जूता पहन कर खड़े होकर कसके हचमचा देते हैं।
राहुल जी अच्छी बात है,
   अखिलेश प्रताप सिंह,सुप्रिया समेत जैसे प्रवक्ता बीजेपी के सबसे बड़े एसेट हैं, क्योंकि यह दोनों जब टीवी चैनल पर आते हैं तब कांग्रेस के कुछ लाख वोट कम ही हो जाते हैं और हम चाहेंगे कि यह दोनों अनंत काल तक बदतमीजी
थेथरई करते रहें।
  मोदीजी और अमित शाह देश के   प्रधानमंत्री और गृहमंत्री हैं उनके खिलाफ ऐसी अनर्गल भाषा का प्रयोग अल-खांग्रेस को स्वयं गर्त की और ले जा रहा है।
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