आज इस विधि से करें मां स्कंदमाता की पूजा, भरेगी झोली,जानें सही भोग- मंत्र

   नवरात्रि के नौ दिन माँ के अलग-अलग रूप मे पूजा व आरधना की जाती है. नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की उपासना करने का महत्व है. मां स्कंदमाता क़ो कौनसा भोग और क्या विधि से पूजा कि जाए है आइए जानते हैं इस दिन की खास बातें…

    उज्जैन. चैत्र नवरात्रि शुरू हो चुकी है. सनातन धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है. नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के 9 रूपों की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है. माना जाता है कि नवरात्रि के दिनों में भगवती मां दुर्गा पूरे नौ दिन तक धरती पर आकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं. इस साल चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से प्रारंभ हो चुकी है. आज नवरात्रि के पांचवे दिन माँ स्कंदमाता की किस विधि से उपासना की जाए और कौन सा भोग लगाया जाए.

जानिए कैसा है मां स्कंदमाता का स्वरूप

चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की बात करे तो इस देवी की चार भुजाएं हैं. ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से भगवान स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं. नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है. बाईं तरफ ऊपर वाली भुजा वरदमुद्रा में है. नीचे वालीभुजा में कमल पुष्प है. ये कमल पर विराजमान रहती हैं. इसलिए इन्हें पद्मासना देवी के नाम से भी जाना जाता है. ऐसा माना जाता है कि स्कंदमाता अपने भक्तों से बहुत जल्द प्रसन्न होती हैं. साथ ही माना गया है कि माता की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

जानिए मां स्कंदमाता का प्रिय भोग

नवरात्रि के नौ दिन अलग-अलग देवी को तरह-तरह का भोग लगाया जाता है. पांचवे दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाएं. इसके बाद इसको प्रसाद रूप में ग्रहण करें. इसे ग्रहण करने से संतान और स्वास्थ्य, दोनों की बाधाएं दूर होंगी. शास्त्रों में मां स्कंदमाता की महिमा बताई गई हैं. इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं. सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है. इसलिए मन को एकाग्र और पवित्र रखकर इस देवी की आराधना करने वाले भक्त को भवसागर पार करने में कठिनाई नहीं आती है.

जानिए किन मंत्रो से प्रसन्न होंगी स्कंदमाता

– सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।

– या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।