ओडिशा के पारादीप बंदरगाह के पास महीनों से रोके गए तेल टैंकर एमटी यूनिटी पर सवार रूसी नाविकों की घर वापसी के लिए भारत ने कदम उठाए हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह रूसी दूतावास के लगातार संपर्क में है, जबकि जहाज से जुड़े समुद्री दावों और क्रू की बकाया सैलरी का मामला अदालत में चल रहा है।
नई दिल्ली: ओडिशा के पारादीप बंदरगाह के पास महीनों से रोके गए तेल टैंकर MT यूनिटी पर सवार रूसी नाविकों की वापसी के लिए भारत ने कदम उठाना शुरू कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस मामले में भारत रूसी दूतावास के लगातार संपर्क में है और रूसी क्रू सदस्यों को वापस भेजने के लिए जरूरी कार्रवाई की जा रही है। जहाज को अदालत के आदेश के बाद रोका गया था और इससे जुड़े कई समुद्री दावे अभी कानूनी प्रक्रिया में हैं।
रूसी दूतावास के संपर्क में भारत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को मंत्रालय की मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि सरकार को इस घटना की जानकारी है और वह भारत में रूसी दूतावास के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने कहा कि रूसी क्रू सदस्यों को वापस भेजने के संबंध में भारत जरूरी कार्रवाई कर रहा है। जायसवाल ने यह भी बताया कि जहाज को ओडिशा हाई कोर्ट के आदेश के बाद रोका गया था।
मई से समुद्री दावों में फंसा है MT यूनिटी
कैमरून के झंडे वाला क्रूड टैंकर MT यूनिटी मई से समुद्री दावों से जुड़े कई मामलों में फंसा हुआ है। ओडिशा हाई कोर्ट ने सबसे पहले 11 मई को जहाज को जब्त करने का आदेश दिया था। यह कार्रवाई संयुक्त अरब अमीरात की कंपनी ट्रेस्टा इंटरनेशनल एफजेडई की ओर से दायर मामले के बाद हुई थी। कंपनी ने जहाज को सप्लाई किए गए बंकर ईंधन के कथित बकाया भुगतान को लेकर अदालत का रुख किया था। अदालत में दर्ज जानकारी के अनुसार, कुछ भुगतान किए जाने के बावजूद 4 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बकाया होने का दावा किया गया था।
पारादीप पहुंचा था कच्चा तेल उतारने
उस समय की जानकारी के मुताबिक, MT यूनिटी भारतीय तेल निगम के लिए कच्चा तेल उतारने पारादीप पहुंचा था, तभी जहाज को जब्त करने का आदेश लागू किया गया। हालांकि, इसके बाद मामला केवल बंकर ईंधन के भुगतान तक सीमित नहीं रहा। जहाज पर मौजूद क्रू सदस्यों की स्थिति ने इस पूरे मामले को और जटिल बना दिया।
क्रू सदस्यों की सैलरी और वापसी का मामला भी उठा
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के संयुक्त डेटाबेस में यूनिटी को नाविकों को बीच में ही छोड़ दिए जाने से जुड़े एक अनसुलझे मामले के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है।
- भारत आने से पहले इस जहाज के चीन के झोउशान में छोड़े जाने की खबर सामने आई थी। जुलाई में डेटाबेस में दर्ज जानकारी के अनुसार, जहाज के मास्टर ने बताया था कि क्रू सदस्यों के अनुबंध समाप्त हो चुके थे और मई-जून की कुल 2,23,533 अमेरिकी डॉलर की सैलरी का भुगतान नहीं हुआ था। क्रू सदस्यों ने अपने-अपने देशों में वापस लौटने की मांग भी की थी।
रूसी नाविकों की सैलरी भी थी बकाया
कोलकाता स्थित रूसी महावाणिज्य दूतावास ने जुलाई में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन की प्रक्रिया में बताया था कि रूसी नाविकों के अनुबंध समाप्त हो चुके थे और उनकी काफी सैलरी बकाया थी। बताया गया था कि घर लौटने का इंतजार कर रहे रूसी क्रू सदस्य अपने अनुबंध की अवधि खत्म होने के बाद भी जहाज पर रुके हुए थे।
राशन, वेतन और वापसी का खर्च भी कानूनी दावे में शामिल
ओडिशा हाई कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, बाद में क्रू सदस्यों से जुड़ा मामला भी जहाज की कानूनी कार्यवाही का हिस्सा बन गया। अगस्त में सोग्लासी इंश्योरेंस कंपनी ने समुद्री दावों से जुड़ा मामला दायर किया, जिसमें राशन, क्रू सदस्यों की सैलरी और उन्हें वापस भेजने में हुए खर्च को शामिल किया गया। इस मामले में भी अदालत ने जहाज को जब्त करने का आदेश दिया।
23 लोगों के क्रू में कजाख नागरिक भी शामिल
हाल ही में कजाखस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि जब्त किए गए जहाज पर मौजूद 23 लोगों के क्रू में एक कजाख नागरिक भी शामिल है और उसे वापस लाने की कोशिश की जा रही है। विदेश मंत्रालय के ताजा बयान से यह स्पष्ट है कि भारत रूसी क्रू सदस्यों की वापसी के लिए कार्रवाई कर रहा है, जबकि MT यूनिटी से जुड़े समुद्री विवाद अभी अदालत में चल रहे हैं।
