“हाँ, मैं उस उत्तर प्रदेश से हूँ ……..जहाँ संन्यास ही राजसत्ता का रक्षक है और न्याय ही साक्षात कालभैरव का संकल्प!”
“गाय का गोबर उठाने वाला, घंटी बजाने वाला यह बाबा क्या ख़ाक अर्थव्यवस्था चलाएगा?” ज़रा अपनी सांसें थामिए और सोचिए—जो व्यक्ति अपनी देह पर जेब तक नहीं रखता, वह 25 करोड़ लोगों की तिजोरी का ऐसा पहरेदार कैसे बन गया कि 70 साल का लुटेरा तंत्र एक झटके में घुटनों पर आ गया?…
