रूस अमेरिका द्वारा चलाए जा रहे टैरिफ वार में खुलकर भारत के साथ खड़ा है. अब रूस ने कहा है कि अगर टैरिफ की वजह से अमेरिका को भारत का आयात प्रभावित होता है तो वह अपने दरवाजे भारतीय सामान के लिए खोल देगा.
यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए भारत पर प्रतिबंध लगा रहे राष्ट्रपति ट्रंप…. अमेरिका का पाखंडी चेहरा आया सामने
अमेरिका बोला-भारत पर प्रतिबंध का मकसद रूस पर दबाव बनाना
* इससे यूक्रेन जंग रोकने में मदद मिलेगी
* भारत पर अब तक 50% टैरिफ लगाया
* भारत के रूस, चीन और अमेरिका से रिश्ते जटिल बने हुए हैं
* पीएम मोदी शंघाई सहयोग संगठन में भाग लेने चीन जा रहे हैं
* वहां वे तीन महत्वपूर्ण लक्ष्य साधेंगे
* इनमें राजनयिक संबंधों को मजबूत करना, पाकिस्तान पर लगाम लगाना और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना शामिल है
* भारत रूस और चीन के साथ संबंधों को संतुलित कर रहा है
अमेरिका ने रूस पर दबाव बनाने के लिए भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लीविट ने इसकी जानकारी दी।
■ भारत और अमरिका के बीच टैरिफ को लेकर बढ़ते तनाव के बीच रूस ने भारत को बड़ा ऑफर दिया है.
■ रूस ने कहा है कि अगर टैरिफ की वजह से भारतीय सामानों के लिए अमेरिकी बाजार के दरवाजे बंद होते है तो रशियन मार्केट इंडियन प्रोडक्ट्स को अपनाने के लिए हमेशा तैयार है.
■ भारत लगातार रूस से अपनी जरूरत के हिसाब से तेल खरीद रहा है. इस बीच रूस ने बड़ा फैसला लेते हुए भारत को तेल खरीद पर पांच फीसदी का डिस्काउंट देने का फैसला किया है.
■ राजनीतिक स्थिति के बावजूद भारत लगभग उसी स्तर का तेल आयात करता रहेगा.
■ अमेरिका ने भारत पर आरोप लगाया है कि वह रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है.
■ अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए 50 फीसदी टैरिफ लगाया है.
■ व्हाइट हाउस के ट्रेड सलाहकार पीटर नवारो ने कहा, ‘भारत रूस के तेल का वैश्विक क्लियरिंगहाउस की तरह कार्य करता है, प्रतिबंधित कच्चे तेल को उच्च-मूल्य के निर्यात में बदलता है और मॉस्को को डॉलर मुहैया कराता है.
डोनाल्ड ट्रंप शुरुआत से ही ब्रिक्स देशों को धमकी देते रहे हैं. उन्होंने रूस को धमकी देते हुए कहा था कि अगर यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया तो वह मॉस्कों पर भी प्रतिबंध लगाएंगे. उन्होंने कहा था कि उन देशों पर भी प्रतिबंध लगाए जाएंगे, जो उसका तेल खरीदते हैं. बता दें कि चीन और भारत रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार हैं
