कर्नाटक में सियासी हलचल एक बार फिर से तेज हुई है। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के खेमे के लगभग 30 कांग्रेस विधायक बेंगलुरु के एक होटल में इकट्ठा होकर नेतृत्व और आगामी रणनीति पर चर्चा की है।
कर्नाटक कांग्रेस में क्या सबकुछ ठीक है? ये सवाल इस उठ रहा है क्योंकि डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के खेमे के करीब 30 कांग्रेस विधायक बेंगलुरु के एक निजी होटल में बैठक के लिए एकत्र हुए। इनमें दो मंत्री भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसबैठक ने सत्तारूढ़ दल के भीतर संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, एक विधायक के जन्मदिन के बहाने आयोजित इस बैठक में राज्य कांग्रेस में चल रहे नेतृत्व संबंधी मंथन पर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि विधायकों ने अनौपचारिक तौर पर संभावित राजनीतिक कदमों पर विचार-विमर्श किया और नई दिल्ली स्थित पार्टी हाईकमान से किसी भी संकेत पर नजर बनाए रखने की बात कही। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने बार-बार किसी भी तरह की अंदरूनी खींचतान से इनकार किया है, लेकिन राज्य इकाई में सत्ता संतुलन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक में शामिल होने वाले कुछ नेताओं के नाम
- डी सुधाकर
- मगदी बालकृष्ण
- सीपी योगेश्वर
- कडलूर उदय
- रवि गनीगा
- बसवराज शिवगंगा
- नयामा मोट्टम्मा
- शरथ बचेगौड़ा
- कुनिगल रंगनाथ
- प्रकाश कोलिवाड़ा
- अनेकल शिवन्ना
- वेंकटेश पवागड़ा
विदेश दौरे के बाद बढ़ीं अटकलें
यह बैठक उस समय हुई जब 20 से अधिक कांग्रेस विधायक हाल ही में ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के दौरे पर गए थे। इस विदेश यात्रा ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा को हवा दी थी। विधायकों के 1 मार्च को बेंगलुरु लौटने की उम्मीद है। यात्रा में शामिल कुछ विधायकों को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का करीबी माना जाता है। हालांकि इस दौरे को कृषि संबंधी अध्ययन यात्रा बताया है। सिंधनूर के विधायक हंपनगौड़ा बदरली ने कहा था कि यह पूरी तरह निजी दौरा था और राजनीतिक रूप से प्रेरित नहीं था। एक अन्य विधायक ने दावा किया कि वे इस यात्रा का खर्च स्वयं वहन कर रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष का नेतृत्व विवाद से इनकार
बता दें कि लंबे समय से यह चर्चा है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच 2.5-2.5 साल का पावर-शेयरिंग समझौता हुआ था। सिद्धारमैया ने 20 मई 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। पिछले वर्ष सरकार के आधे कार्यकाल के आसपास नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों ने जोर पकड़ा था। हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज करते हुए कहा था कि पार्टी हाईकमान ने किसी तरह का भ्रम पैदा नहीं किया है और राज्य से जुड़े मुद्दों को प्रदेश नेतृत्व ही संभालेगा।
