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भौतिक विज्ञान में भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर ग्रामोदय विश्वविद्यालय में व्याख्यान माला संपन्न

चित्रकूट,29 सितम्बर 2025। आज महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के विज्ञान और पर्यावरण संकाय के तत्वावधान में भौतिक विज्ञान में भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर व्याख्यान माला का आयोजन किया। इस अवसर प्रो राजेंद्र कुमार कोररिया, कुलगुरु, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा  मुख्य अतिथि रहे। ग्रामोदय विश्वविद्यालय के प्रो भरत मिश्रा ने  अध्यक्षता की।
       मुख्य अतिथि और रीवा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो कोररिया ने कहा कि भौतिकी में भारतीय ज्ञान परंपरा का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने ओम के महत्व और इसके प्रभावों पर चर्चा करते हुए बताया कि ओम का व्यवस्थित ध्यान करने से एंजायटी लेवल कम होता है।
भारत वह देश है जहां चिंता मुक्त और भय मुक्त जीवन जीने की कला में लोक पारंगत रहे। अध्यक्षीय उद्बोधन करते हुए ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी उपाध्याय का चिंतन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधार मानता है और इसी आधार पर उन्होंने समाज के लिए एकात्म मानव दर्शन का प्रतिपादन किया।
      विज्ञान और पर्यावरण सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता प्रो कोररिया ने कहा कि लॉर्ड मैकाले ने सोच कि भारत पर शासन करना है, तो भारत की गुरुकुल शिक्षा परंपरा को ध्वस्त करना होगा। क्रमशः हमारा मानस बदलता गया और हम अपने मूल ज्ञान परंपरा से विमुख होते चले गए हमारे प्राचीन विश्वविद्यालयों जैसे नालंदा विक्रमशिला, तक्षशिला में बहुभाषीय शिक्षा व्यवस्था रही।  मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं हो सकता। जीना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है मानव जीवन मिलना बहुत दुर्लभ है हमें उद्देश्य पूर्ण जीवन को जीना होगा आज नई शिक्षा नीति के तहत हमें नए सिरे से अपनी शिक्षा को डालना होगा ।
      शिक्षा में तकनीक का प्रयोग अवश्य करें। संपूर्ण मानव बनाने की शिक्षा की जरूरत 2047 तक उन्नत भारत का सपना। भारतीय ज्ञान परंपरा पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में मानती है शिक्षा के माध्यम से अच्छा व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र, विश्व, सृष्टि, परमसृष्टि की कल्पना हमारी परंपरा में रही है। पांच कोष भारतीय ज्ञान परंपरा में बताए गए हैं जिनमें अन्यमय कोष शरीर पोषण के लिए, प्राणमय कोष सूक्ष्म प्राणों का आयाम, मनमय कोष मन का प्रशिक्षण, विज्ञानमय कोष विश्लेषणात्मक परीक्षण, आनंदमय कोष आत्मानुभूति।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के तैल चित्र पर  माल्यार्पण द्वारा किया गया। कार्यक्रम परिचय, रूपरेखा , उद्देश्य तथा धन्यवाद ज्ञापन विज्ञान एवं पर्यावरण संकाय के अधिष्ठाता प्रोफेसर सूर्यकांत चतुर्वेदी ने प्रस्तुत किया। संचालन डॉ वंदना पाठक ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो आर सी त्रिपाठी, विज्ञान एवं पर्यावरण संकाय के  डॉ वीरेंद्र उपाध्याय, डॉ साधना चौरसिया, डॉ रवि चौरे, डॉ अनिल अग्रवाल, डॉ सीता शरण गौतम, प्रो घनश्याम गुप्ता सहित  शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी और छात्र छात्राये मौजूद रही।
रविराज सिंह के निधन पर ग्रामोदय विश्वविद्यालय में शोक सभा आयोजित
चित्रकूट, 29 सितम्बर 2025। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय आवश्यक सेवा इकाई अंतर्गत विद्युत विभाग में कार्यरत कर्मी रवि राज सिंह के आकस्मिक निधन पर प्रशासनिक भवन और विज्ञान सभागार में शोक सभा आयोजित हुई। इस मौके पर कुलसचिव प्रो आर सी त्रिपाठी ने शोक पत्र का वाचन किया । इस मौके पर ग्रामोदय परिवार के शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और भौतिक विज्ञान व्याख्यान माला के प्रतिभागियों द्वारा 2 मिनट का प्रतीकात्मक मौन रख कर मृतात्मा के आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से सामूहिक रूप से प्रार्थना की गई