सरकारी आंकड़ों के हिसाब से अभी तक लगभग 62 करोड़ लोग महाकुम्भ में स्नान कर चुके हैं और, कल महाशिवरात्रि तक ये संख्या लगभग 65 करोड़ तक पहुंच जाने की उम्मीद है.
Arun singh Editor)
अगर इसमें से 5-10 करोड़ की संख्या को रिपीट स्नान भी मान लिया जाए कि उन्होंने प्रयागराज में रहकर बार-बार स्नान किया जिनकी गिनती भी इन 65 करोड़ में है..
फिर भी, ये मानने में कोई झिझक नहीं है कि 50 से 55 करोड़ लोगों ने अपनी अमीरी- गरीबी, जात-पात भूलकर महाकुम्भ में स्नान किया जो कि एक बहुत बड़ी संख्या है.
जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि देश में अभी 22 जनवरी 2023 (श्री रामलला के प्राणप्रतिष्ठा का दिन) की तरह एक धार्मिक माहौल है और लोगों में धार्मिक चेतना का संचार हो रहा है.
इसीलिए, मेरा मानना है कि ये माहौल अपने हिन्दू धर्म और सनातनी हिंदुओं के लिए एक सुनहरा मौका है कि इस महाकुम्भ को अपने हिन्दू सनातन धर्म के पुनरुत्थान के लिए उपयोग किया जाए.
इसके लिए हमें महाकुम्भ के पश्चात…
देश के एक-एक गांव, शहर और एक-एक वार्ड में सर्वे कर महाकुम्भ में सहभागिता किये स्वधर्मियों से संपर्क करना चाहिए और हफ्ते-दस दिन बाद गांव/वार्ड/शहर/जिला लेवल पर सबको एक जगह बुला कर एक संगोष्ठी आयोजित करनी चाहिए.
जहाँ, वे कैसे गए… महाकुम्भ में उनका अनुभव कैसा रहा… महाकुम्भ के आयोजन में और क्या सुधार किए जाने की आवश्यकता है…. आदि पर चर्चा की जाए.
साथ ही किसी बुजुर्ग या असक्षम पुरुष/महिला को उनके इस जज्बे हेतु सम्मानित भी किया जाए ताकि उनका मनोबल बढ़े और वे अपने धर्म तथा हिन्दू समाज से अपना जुड़ाव महसूस कर सकें.
इससे एक आम इंसान को भी लगेगा कि अगर उन्होनें कष्ट करके प्रयागराज की यात्रा की तो कोई तो है जो उनका दुख-दर्द सुनने आया है!!
हालांकि, करने को तो ये काम कोई भी कर सकता है लेकिन ये काम एक राष्ट्रव्यापी संगठन द्वारा किया जाना बेहद सुविधाजनक रहेगा.
और चूँकि, ये कार्यक्रम पूरे देश के लेवल पर होना है..इसीलिए, इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS अपने अनुषांगिक संगठन विश्व हिन्दू परिषद VHP के माध्यम से आराम से आयोजित कर सकती है…
क्योंकि, संघ और विश्व हिंदू परिषद देश के कोने कोने कहें कि हर गांव और कस्बे तक में मौजूद है.
इससे एक तो देश के सभी हिन्दू एक-दूसरे से न सिर्फ जुड़ाव महसूस करेंगे बल्कि उन्हें अपने संगठन के प्रति विश्वास भी पैदा होगा.
साथ ही, संगोष्ठी में अथवा उसके बाद संगठन को … देश के एक-एक गांव/कस्बे और वार्ड में एक संपर्क अभियान चलाना चाहिए ताकि जो लोग किसी कारणवश इस महाकुम्भ में स्नान न कर सके हों…
उन तक भी प्रयागराज के त्रिवेणी संगम का जल वितरित (5 या 10 रुपये के न्यूनतम मूल्य पर) किया जाए…
ताकि, हर एक हिन्दू अपने धार्मिक आस्था के महापर्व महाकुम्भ से अपना जुड़ाव महसूस कर सके.
मैं नहीं जानता कि संगठन ऐसा करेगी या नहीं..लेकिन, यदि संगठन ने ऐसा कर लिया तो निश्चय ही यह देश में अब तक किए गए सबसे बड़े संपर्क अभियानों में से एक होगा जो देश के हिन्दुओ में एकता एवं सद्भाव लाने में एक माइल स्टोन बन जायेगा.