नेपाल के जन आंदोलन के बाद अब फ्रांस में भी सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा (France anti-government protests) है। ताजा जानकारी के अनुसार, लगभग 1 लाख लोग सड़कों पर उतर आए हैं। जगह-जगह हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की खबरें आ रही हैं। सरकार विरोधी इस बड़े प्रदर्शन (Paris protest today) ने पूरे देश को हिला दिया है, खासतौर पर राजधानी पेरिस को जहां प्रदर्शन सबसे उग्र रूप में सामने आया। फ्रांस की सड़कों पर हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कई प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। दुकानों और सार्वजनिक इमारतों में तोड़फोड़ की गई। पेरिस, लियोन, मार्से और लिली जैसे शहरों में हिंसा की घटनाएं सबसे ज़्यादा देखी गईं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में
इस बीच बुधवार (10 सितंबर) को जब फ्रांस की राजधानी पेरिस में प्रदर्शनकारी सड़कों पर दिखे तो यूरोपीय देश में चिंताएं साफ देखी गईं। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर फ्रांस में क्या हो रहा है? वहां लोग सड़कों पर क्यों उतर आए हैं? सरकार की किन नीतियों और राजनीतिक संकट को लेकर प्रदर्शन किए जा रहे हैं? इन प्रदर्शनों की अगुवाई कौन कर रहा है? साथ ही मौजूदा समय में देश में क्या हाल हैं? आइये जानते हैं…आग की लपटें और पुलिस के साथ झड़पें साफ देखी जा सकती हैं।
पहले जानें- फ्रांस में सरकार की किन योजनाओं पर भड़के लोग?
फ्रांस में 15 जुलाई को प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरू ने राष्ट्रीय बजट पेश किया था। इसमें 2026 के लिए वित्तीय योजना में खर्चों को घटाने का जिक्र था। बायरू ने एलान किया था कि फ्रांस अपने बजट खर्च को 4.38 करोड़ यूरो (करीब 452 करोड़ रुपये) घटा रहा है। इसके जरिए सरकार अपने बढ़ते आर्थिक घाटे को कम करने की कोशिश को दर्शा रही थी। हालांकि, इस बजट कटौती के अलावा तीन ऐसी चीजों को खत्म करने की बात कही गई, जिसे फ्रांस के लोग मानने के लिए तैयार नहीं दिखे।
इधर फ्रांस में बायरू सरकार ने अपनी योजनाओं को आगे रखा, उधर सोशल मीडिया पर एक बड़ा तबका इनके खिलाफ आंदोलन की तैयारी करने लगा। देखते ही देखते पोस्ट्स में Boycott, désobéissance et solidarité वायरल हो गया, जिसका मतलब है ‘बहिष्कार, अवज्ञा और एकजुटता। यहीं से फ्रांस में 10 सितंबर को राष्ट्रीय आंदोलन की नींव पड़ी। इन प्रदर्शनों को पहले ही- ब्लॉक एवरीथिंग नाम दे दिया गया। यानी इस दिन सरकार की नीतियों के विरोध में लोग सड़कों पर उतरकर शहरों को जहां-तहां रोक देंगे। इस प्रदर्शन को फिलहाल सिर्फ एक दिन के लिए सीमित रखा गया है।
