बांग्लादेश में चीन की पैठ मजबूत होती जा रही है, जिससे भारत की टेंशन बढ़ सकती है। हाल में ही चीन और बांग्लादेश ने 2+2 डायलॉग का ऐलान किया है, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा और कूटनीतिक संबंध मजबूत होंगे। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के अंतर्राष्ट्रीय विभाग के मंत्री इस वर्ष के अंत में बांग्लादेश का दौरा करने वाले हैं।
ढाका: बांग्लादेश और चीन 2+2 डायलॉग शुरू करने वाले हैं। इसका मकसद दोनों देशों में रक्षा और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करना है। इसका ऐलान बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने किया है। चीनी राजदूत याओ वेन के साथ मुलाकात के दौरान उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले दिनों में बांग्लादेश-चीन संबंधों में और अधिक वृद्धि होगी। यह घटनाक्रम तब सामने आया है, जब भारत-बांग्लादेश संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में चीन और बांग्लादेश की दोस्ती भारत की टेंशन बढ़ा सकती है।
चीन-बांग्लादेश संबंधों में आई तेजी
इस मुलाकात के दौरान हुमायूं कबीर ने चीनी राजदूत की जमकर तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में चीनी राजदूत के काम को जबरदस्त प्रसिद्धि मिली है और उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन की सफल यात्रा में उनके योगदान की सराहना की। हुमायूं कबीर ने राजदूत वेन के कार्यकाल के दौरान, बांग्लादेश-चीन संबंधों को साझा समुदाय के स्तर तक पहुंचाने का दावा किया और कहा कि बांग्लादेश और चीन में राज्य मंत्री स्तर के 2+2 तंत्र सहित कई तंत्र शुरू होने वाले हैं।
बांग्लादेश दौरे पर आएंगे CPC के अंतर्राष्ट्रीय विभाग के मंत्री
इस मौके पर चीनी राजदूत ने कहा कि बांग्लादेश में तीन साल और नौ महीने तक सेवा करना उनके लिए बहुत सम्मान की बात रही है। उन्होंने विदेश मंत्री खलीलुर रहमान को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी और इसे बांग्लादेश के लिए गौरव का क्षण बताया। राजदूत ने इस बात की पुष्टि की कि चीन बांग्लादेश के विकास पथ में उसका समर्थन करना जारी रखेगा। उन्होंने यह भी बताया कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति (आईडीसीपीसी) के अंतर्राष्ट्रीय विभाग के मंत्री इस वर्ष के अंत में बांग्लादेश का दौरा करने के लिए उत्सुक हैं।
बांग्लादेश में चीन की बढ़ रही भूमिका
बांग्लादेश से शेख हसीना सरकार के पतन के बाद चीन की भूमिका काफी ज्यादा बढ़ गई है। मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार चलाने के दौरान चीन का दौरा किया था और कई गुप्त समझौते भी किए थे। तारिक रहमान भी प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने पहले विदेश दौरे के दौरान चीन गए थे। चीन तीस्ता नदी प्रोजेक्ट में भी शामिल होने वाला है, जो भारत के लिए रणनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है। इसके अलावा चीन, बांग्लादेश की सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए भी काम कर रहा है, जिससे पूर्वोत्तर में भारत के लिए चिंता बढ़ सकती है।
