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अरब सागर, बंगाल की खाड़ी को लेकर डब्ल्यूएमओ की डरावनी रिपोर्ट

   विश्व मौसम विज्ञान संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के तटीय इलाकों में समुद्र का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसकी दर 4 मिमी प्रति वर्ष हो गई है।

नई दिल्ली: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की एक नई रिपोर्ट से खलबली मच सकती है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के तटीय इलाकों में समुद्र का जलस्तर भयानक रूप से बढ़ रहा है। इसके अनुसार समुद्र का जलस्तर पहले के मुकाबले काफी तेजी से बढ़ने लगा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एशिया में गर्मी तेजी से बढ़ रही है, जिससे मौसम में बदलाव हो रहा है और लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। बता दें कि तटीय इलाकों में इस स्थिति का बहुत बुरा असर पड़ सकता है और निचले इलाकों में समुद्र का पानी भर सकता है।

4 मिमी प्रति वर्ष की दर से बढ़ने लगा समुद्र जलस्तर

      विश्व मौसम विज्ञान संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार समुद्र का जलस्तर हर साल 3.7 से 3.8 मिलीमीटर बढ़ रहा था। लेकिन, अब यह दर बढ़कर 4.00 मिलीमीटर प्रति वर्ष हो गई है। यह बढ़ोतरी समुद्र तट से 50 किलोमीटर के दायरे में देखी जा रही है। इंसानी हरकतों की वजह से ग्लोबल वार्मिंग हो रही है, जिससे समुद्र का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ रहा है। दरअसल, जीवाश्म ईंधन जलाने से ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं। ये गैसें बर्फ की चादरों और ग्लेशियरों को अप्रत्याशित रूप से पिघला रही हैं। इससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। यह तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों और छोटे द्वीपों के लिए बहुत बड़ा खतरा है। भारत का दक्षिणी भाग भी इससे प्रभावित हो रहा है।

दक्षिण चीन सागर के बाद सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

बंगाल की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में भी समुद्र का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। यह भारत के पूर्वी तट (पश्चिम बंगाल से तमिलनाडु तक) को कवर करता है। इस क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने की दर पश्चिमी उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र (दक्षिण चीन सागर) के बाद सबसे ज्यादा है। वैसे, समुद्र का जलस्तर हर जगह एक जैसा नहीं बढ़ रहा है। लेकिन, हिंद महासागर का तापमान, पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटों पर, वैश्विक औसत से ज्यादा है। 2024 में वैश्विक औसत समुद्र जलस्तर 3.4 ± 0.3 मिलीमीटर तक पहुंच गया। भारत के पश्चिमी तट पर यह वृद्धि 3.9 ± 0.4 मिलीमीटर और पूर्वी तट पर 4.0 ± 0.4 मिलीमीटर दर्ज की गई।

गर्मी बढ़ने की वजह से बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं

डब्ल्यूएमओ की ‘स्टेट ऑफ द क्लाइमेट इन एशिया 2024’ रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में गर्मी वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी तेजी से बढ़ रही है। इससे मौसम में बदलाव हो रहा है और क्षेत्र को भारी नुकसान हो रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 1991-2024 के बीच गर्मी बढ़ने की दर 1961-1990 की अवधि के मुकाबले लगभग दोगुनी रही। गर्मी बढ़ने से मध्य हिमालय औ

वायनाड के भीषण भूस्खलन का भी रिपोर्ट में जिक्र

रिपोर्ट में भारत में 2024 में हुई एक बड़ी प्राकृतिक आपदा का भी जिक्र है। इसमें बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण केरल के वायनाड जिले में भीषण भूस्खलन हुआ, जिसमें 350 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। यह घटना 30 जुलाई को हुई थी, जब 48 घंटों में 500 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हुई थी। वहीं, 2024 में भीषण गर्मी के कारण भारत के अलग-अलग हिस्सों में 450 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा, बिजली गिरने से लगभग 1,300 लोगों की जान चली गई। 10 जुलाई को उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और झारखंड में बिजली गिरने से 72 लोगों की मौत हो गई।

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