स्वावलंबन अभियान 2.0 (साइन) का शुभारंभ, स्वावलंबन शपथ का हुआ वाचन
युग दृष्टया और युग मनीषी थे राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख – राजगुरु प्रपन्नाचार्य
नानाजी परंपरागत ज्ञान एवं आधुनिक ज्ञान को समावेश कर युगानुकूल सामाजिक पुनर्रचना के पक्षधर थे। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो एडीएन वाजपेई ने अपने उद्बोधन में कहा कि नाना जी का व्यक्तित्व सर्व समावेशी था। मैं 2003 में एपीएस विश्वविद्यालय रीवा का कुलपति होने के बाद श्रद्धेय नाना जी के मार्गदर्शन से मुझे ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति का भी प्रभार मिला और नाना जी के ग्राम विकास के प्रयोगों को नजदीकी से देखने का अवसर मिला। रीवा कमिश्नर बीएस जामोद ने कहा कि नानाजी ने भौतिक चकाचौंध को छोड़कर चित्रकूट जैसे पिछड़े क्षेत्र में अपनी प्रयोगशाला बनाई और पीड़ित, उपेक्षित लोगों के विकास के लिए विविध प्रकल्पों के माध्यम से सर्वांगीण विकास का प्रयोग करके दिखाया।
ऐसे देव तुल्य व्यक्तित्व को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धा पुष्प अर्पित करता हूं। श्रद्धांजलि समारोह के अवसर पर स्वावलंबन अभियान 2.0 की प्रस्तावना रखते हुए दीनदयाल शोध संस्थान के कोषाध्यक्ष वसंत पंडित ने बताया कि नानाजी ने जब 26 जनवरी 2002 को चित्रकूट के ग्रामों में स्वावलंबन अभियान की शुरुआत पांच प्रमुख बिंदुओं जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार, हराभरा विवाद मुक्त ग्राम की कल्पना को शामिल किया था, अब आधुनिकता के आधार पर स्वावलंबन अभियान 2.0 ‘शाइन’ के रुप में शुरुआत करने का प्रयास किया जा रहा है।
जिसमें ग्रामोदय से सर्वोदय से शुरू करके और अभ्युदय की ओर बढ़ते हुए एक ऐसा मॉडल बनाने का प्रयास है जो मापने योग्य, टिकाऊ और प्रतिकृति योग्य हो, जहां व्यक्तिगत और सामुदायिक लक्ष्यों में खुशी और पूर्ति शामिल होगी। इसे SHINE: Sustainability and Happiness Index for a New Era (एक नए युग के लिए स्थिरता और खुशहाली सूचकांक) के माध्यम से मापा जाएगा। जो स्वावलंबी ग्राम विकास ढ़ांचा तैयार करने में सहायक सावित होगा। यह मॉडल ‘पुनर्योजी अर्थशास्त्र‘ के सिद्धांतों को मूर्त रूप देने की इच्छा रखेगा। यह बदलाव पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के साथ गहराई से प्रतिध्वनित होता है, एकात्म मानववाद में गांव-स्तरीय योजना को जड़ देकर और इसे पुनर्योजी आर्थिक सिद्धांतों के साथ संरेखित करके, मॉडल प्रमुख वैश्विक विकास मॉडल के लिए एक व्यावहारिक, मापने योग्य और प्रतिकृति योग्य विकल्प का प्रोटोटाइप बनाने की कोशिश करता है।
यह मॉडल, जन अभियान परिषद मध्य प्रदेश, राज्य आनंद संस्थान मध्य प्रदेश, नीति आयोग और सेंटर फॉर कॉम्प्लेक्सिटी इकोनॉमिक्स, एप्लाइड स्पिरिचुअलिटी एंड पब्लिक पॉलिसी, जिंदल स्कूल ऑफ गवर्नमेंट एंड पब्लिक पॉलिसी सोनीपत के साथ साझेदारी में, चित्रकूट परियोजना क्षेत्र के 108 राजस्व गांवों में आयोजित करने का प्रस्ताव है, और एक आधार रेखा सर्वेक्षण से शुरू होगा, जो सभी सामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक संकेतकों को मापेगा और उपभोग, अपशिष्ट और सामाजिक सद्भाव पर भी डेटा एकत्र करेगा। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान स्वावलंबन अभियान 2.0 की शपथ का वाचन आचार्य आश्रम चित्रकूट के राजगुरु स्वामी श्री प्रपन्नाचार्य जी महाराज द्वारा सभी लोगों को कराया गया; “हम सभी ग्रामवासी परस्पर सहयोग के आधार पर अपने ग्राम को स्वावलम्बी बनाने की प्रतिज्ञा करते हैं। हम अपने ग्राम से गरीबी, बेकारी, बीमारी और अशिक्षा का उन्मूलन करेंगे।
हमारे ग्राम का प्रत्येक परिवार सुख, समृद्धि और आध्यात्मिकता से भरा जीवन व्यतीत करेगा। हम ऐसी सतत जीवन‑शैली अपनाएँगे जो प्रकृति की रक्षा करे, संसाधनों का संरक्षण करे और देशज परंपरा और आधुनिक ज्ञान के समन्वय के साथ सभी के लिए खुशहाली लाए।
हमारे ग्राम का कोई विवाद न्यायालय में नहीं जाएगा; नए‑पुराने विवाद हम आपसी समझदारी से सुलझाएँगे। हमारा ग्राम स्वच्छ, सुंदर और पेड़-पौधों से सुसज्जित रहेगा। हम सब मिलकर अपने ग्राम को स्वावलम्बी और खुशहाली के अनुकरणीय नमूने के रूप में प्रस्तुत करेंगे। अपने आशीर्वचनों में राजगुरु स्वामी श्री प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने कहा कि ऋषि तो हमेशा युग दृष्टया होता है। नानाजी निश्चित रूप से युग मनीषी थे। जिस तरह महर्षि वाल्मीकि जी ने प्रभु श्री राम को चित्रकूट का मार्ग सुझाया था, चित्रकूट गिरि करहुँ निवासू, तहं तुम्हार सब भांति सुपासू। उसी तरह यहां के ऋषियों ने नाना जी को बुलाकर चित्रकूट के लिए विविध क्षेत्रों में विकास का मार्ग प्रशस्त किया।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए दीनदयाल शोध संस्थान के वरिष्ठ उपाध्यक्ष उत्तम बनर्जी ने कहा कि प्रसन्नता का विषय है कि नाना जी द्वारा जनता की पहल और पुरुषार्थ से प्रारंभ किए गए कार्यों को अब जन मानस संचालित कर रहा है। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में हजारों लोगों की सामूहिक सहभागिता इसे सामाजिक चेतना के महाकुंभ के रूप में प्रदर्शित कर रही है। सर्वे भवंतु सुखिनः कल्याण मंत्र के साथ श्रद्धांजलि सभा का समापन हुआ।

