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सीमा पर सरपट दौड़ेगी ‘विकास की रेल’,2374 करोड़ से चमकेगी सरहद, सुरक्षा और समृद्धि को लगेंगे पंख

पहली बार सीमान्त क्षेत्र के लोग जुड़ेंगे रेल कनेक्टिविटी से

अनूपगढ़/श्रीगंगानगर। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों के लिए केंद्र सरकार सौगात देने जा रही है। आने वाले कुछ ही वर्षों में अनूपगढ़ से बीकानेर रेल लाइन का सपना साकार होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने सीमांत क्षेत्र के विकास को रफ्तार देने के लिए 2374 करोड़ रुपये के महाबजट से दो नई रेल लाइनों की सौगात दी है। इस रेल लाइन के बिछने से सुरक्षा, व्यापार, कृषि और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत 186 किलोमीटर लंबा नया रेल नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो सीधे तौर पर सरहद की सुरक्षा को अभेद्य बनाएगा और स्थानीय निवासियों की दशकों पुरानी उम्मीदों को उड़ान देगा।

गौरतलब है कि इस युगांतरकारी परियोजना की घोषणा केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के बीकानेर आगमन के दौरान हुई। अपने बीकानेर दौरे पर पहुंचे रेल मंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों की आवश्यकताओं और संभावनाओं का आकलन करते हुए सरहद की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने तथा स्थानीय जनता को आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से इन दोनों नई रेल परियोजनाओं को स्वीकृति देने की घोषणा की। जिसके बाद गुरुवार को केंद्र सरकार की तरफ से 2374 रुपए का बजट इन रेल लाइन के लिए दिया है।

प्रोजेक्ट एट ए ग्लास: कहां और कितनी बिछेगी पटरी

उत्तर पश्चिम रेलवे के बीकानेर मंडल के अंतर्गत प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी परियोजना में अनूपगढ़ से कानासर तक 131 किलोमीटर तथा रोजड़ी से खाजूवाला तक 54 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। इन दोनों रेल मार्गों के निर्माण के साथ सीमांत क्षेत्र को पहली बार ऐसी रेल कनेक्टिविटी मिलने जा रही है, जो विकास और सुरक्षा दोनों दृष्टियों से मील का पत्थर साबित होगी। अनूपगढ़ के बाद पतरोड़ा, घड़साना, रावला तथा खाजूवाला सहित अनेक क्षेत्र पहली बार बहु प्रतीक्षित रेल के इंजन की सीटी की आवाज सुन पाएंगे।

परियोजना से क्या होंगे बड़े लाभ

सीमावर्ती क्षेत्र में प्रस्तावित यह रेल नेटवर्क केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, कृषि, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे लगभग हर क्षेत्र पर दिखाई देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में सीमांत राजस्थान के विकास की दिशा ही बदल सकती है।

सामरिक मजबूती: सेना और सुरक्षा एजेंसियों को मिलेगी ‘सुपरस्पीड’

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक होने के कारण यह रेल परियोजना रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्तमान में कई सीमावर्ती क्षेत्रों तक भारी सैन्य उपकरणों और रसद सामग्री की आवाजाही सड़क मार्ग पर निर्भर रहती है, जिससे समय और संसाधनों की अधिक आवश्यकता होती है। नई रेल लाइन बनने के बाद सेना, सीमा सुरक्षा बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के लिए जवानों, सैन्य उपकरणों, हथियारों और आवश्यक सामग्री को कम समय में सीमा तक पहुंचना संभव हो सकेगा। किसी भी आपातकालीन स्थिति में यह रेल नेटवर्क देश की सुरक्षा व्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करेगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कृषि और व्यापार में क्रांति: किसानों की बढ़ेगी आमदनी

अनूपगढ़ और आसपास का इलाका कृषि उत्पादन के लिए देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है। इस क्षेत्र में गेहूं, सरसों, कपास, ग्वार, मूंग तथा किन्नू जैसी फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। अब तक किसानों और व्यापारियों को अपनी उपज दूर-दराज की मंडियों तक पहुंचाने के लिए सड़क परिवहन पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे परिवहन लागत काफी बढ़ जाती थी। रेल नेटवर्क विकसित होने के बाद कृषि उपज और अन्य व्यापारिक वस्तुओं का परिवहन सस्ता, तेज और सुविधाजनक हो जाएगा। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ क्षेत्रीय व्यापार को भी नई गति मिलेगी और सीमांत इलाकों के उत्पाद देश के विभिन्न बाजारों तक आसानी से पहुंच सकेंगे।

रोजगार की बहार और नए निवेश के रास्ते:

इस परियोजना के निर्माण कार्य के साथ ही स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी। रेल लाइन निर्माण के दौरान हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। स्थानीय युवाओं, तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरों, मशीन ऑपरेटरों और श्रमिकों के लिए काम के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं बेहतर रेल कनेक्टिविटी के कारण भविष्य में औद्योगिक निवेश की संभावनाए भी बढ़ेंगी। व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार के साथ नए उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे क्षेत्र में स्थाई रोजगार के अवसरों का सृजन होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। इसके अलावा रेल कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा लाभ सीमावर्ती गांवों में रहने वाले विद्यार्थियों और आम नागरिकों को मिलेगा।

उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और तकनीकी संस्थानों तक पहुँच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगी। इसके साथ ही गंभीर रूप से बीमार मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों तक शीघ्रता से पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी। स्वास्थ्य सुविधाओं तक बेहतर पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों के जीवन स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

विकसित भारत-2047 के संकल्प से जुड़ी पटरियां* बीकानेर दौरे के दौरान केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का मानना है कि विकास की वास्तविक परिभाषा तब पूरी होती है जब देश के अंतिम छोर पर बसे नागरिक तक बुनियादी सुविधाए और अवसर पहुंचे। नई रेल लाइनें सीमावर्ती क्षेत्रों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से मजबूती से जोड़ेंगी और विकास की मुख्यधारा को सरहद तक पहुंचाने का माध्यम बनेंगी।

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