बैठक में वैश्विक शांति और सांस्कृतिक समरसता पर हुई चर्चा
बैठक का संचालन संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री राजेश लाम्बा द्वारा किया गया।
लखनऊ। चौक स्थित बड़ी काली मठ में शनिवार को धर्म संस्कृति संगम की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक आयोजित की गई, जिसमें देशभर से आए पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा बौद्ध धर्म के भिक्षुओं (भंते) ने भाग लिया। बैठक में अरुण जी राष्ट्रीय मंत्री के संयोजन में चौक स्थित काली मठ में 6मार्च से ही कार्यकर्ता पहुंच गए तथा रात्रि विश्राम के उपरांत 7मार्च की सुबह 10 बजे राष्ट्रगीत के साथ आरम्भ हुआ।
बैठकआयोजन में बैठक में धर्मों के बीच संवाद, सांस्कृतिक समरसता और वैश्विक शांति के विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इन्द्रेश कुमार ने अपने संबोधन में वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में धर्म के नाम पर संघर्ष और युद्ध की स्थिति देखी जा रही है। उन्होंने अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे समय में भारत की सांस्कृतिक परंपरा पूरी दुनिया के लिए मार्गदर्शक बन सकती है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म की मूल भावना ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ है, जिसमें किसी भी दूसरे धर्म का अपमान नहीं किया जाता, बल्कि सभी आस्थाओं का सम्मान करने की परंपरा रही है। इसके विपरीत दुनिया के कई देशों में धर्म के आधार पर संघर्ष और विवाद देखने को मिलते हैं। उन्होंने कहा कि भारत ही एक ऐसा देश है जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और अन्य सभी धर्मों के लोग एक साथ शांतिपूर्वक रहते हैं।
इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारियों ने आगामी कार्यक्रमों और सामाजिक गतिविधियों की रूपरेखा पर भी चर्चा की तथा देश में धार्मिक सौहार्द और सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, धर्माचार्य, बौद्ध भिक्षु और संगठन के सदस्य उपस्थित रहे। बैठक का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ

