राष्ट्रीय स्वयं संघ, मझगंवा खंड (चित्रकूट) का विशाल युवा सम्मेलन
संघ शताब्दी, व्यक्ति निर्माण की अभिनव पद्धति के 100 वर्ष,पुस्तकों में पढ कर, व्याख्यान सुन कर संघ को नहीं समझ सकते, इसके लिए नियमित शाखा आए; प्रवीण गुप्त चित्रकूट, 12 जनवरी 2026। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को पुस्तकों में पढ़कर अथवा व्याख्यान सुनकर नहीं समझा जा सकता है, यदि संघ को समझना है तो शाखा में आकर समझ सकते हैं। वह भी नियमित रूप से। संघ शाखा, व्यक्ति निर्माण की अभिनव पद्धति है।
बाद में उस सकारात्मक कार्य की स्वीकार्यता होती है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ भी ऐसा ही हुआ है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण 100 वर्ष पूर्व नागपुर की पहली शाखा से आज देश के गांव और नगरों में 80 हजार से अधिक शाखाओ की नियमित संचालन समाज की स्वीकार्यता से संभव हुआ है। श्री गुप्त ने स्वामी विवेकानंद को स्मरण करते हुए कहा कि स्वामी जी कहते थे आगामी 50 वर्षो तक भारत वासी केवल भारत माता की उपासना करे, तो भारत पुनः परम वैभवशाली होगा। स्वामी जी युवाओं को आहवान करते हुए सदैव कहते थे कि उठो, जागो और रुको मत जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो । स्वामी जी के विचारों और आदर्शों को अपनाते हुए सदैव से संघ कार्य करता चला आ रहा है, न संघ की शताब्दी वर्ष में।
उन्होंने पंच परिवर्तन द्वारा समाज परिवर्तन का लक्ष्य लेकर सकारात्मक कार्य करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व बोध और नागरिक कर्तव्य बोध को अपनाकर हम सभी राष्ट्र सेवा में अपनी भूमिका निभा सकते हैं। एक दिवसीय इस सम्मेलन के अंतर्गत मार्गदर्शक व्याख्यान सह बौद्धिक के साथ साथ शाखा में नियमित खेले जाने वाले खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और युवकों के बीच संघ से संबंधित विषयों पर चर्चा सत्र आयोजित हुए। इस अवसर पर युवाओं की सभी श्रेणी यथा – डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर, व्यापारी, उद्यमी,किसान, अधिवक्ता, चार्टड एकाउंटेंट आदि सहित के 1800 से भी अधिक युवाओ ने सहभागिता की

