यह जांच उन संदेशों पर केंद्रित है, जिनमें संभावित इंटरनेट बंदी की स्थिति में संपर्क बनाए रखने की तैयारी और आंदोलन के लिए जान देने जैसी बातें कही गईं हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी के चलो संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा की जांच में दिल्ली पुलिस ने एक नया मोड़ लिया है। पुलिस प्रदर्शनकारियों के कुछ कथित चैट संदेशों और एक सीक्रेट एप के इस्तेमाल की पड़ताल कर रही है। यह जांच उन संदेशों पर केंद्रित है, जिनमें संभावित इंटरनेट बंदी की स्थिति में संपर्क बनाए रखने की तैयारी और आंदोलन के लिए जान देने जैसी बातें कही गईं हैं।
अन्य साक्षयों का विश्लेषण किया जा रहा
पुलिस के अनुसार, उन डिजिटल सामग्रियों का विश्लेषण सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन से प्राप्त वीडियो, मोबाइल फोन से बनाए गए वीडियो और जांच के दौरान एकत्र किए गए अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ किया जा रहा है। यह एक व्यापक जांच का हिस्सा है जिसमें विभिन्न प्रकार के साक्ष्यों को एक साथ जोड़ा जा रहा है। संदेशों में कुछ राजनीतिक टिप्पणियां और लोगों को आंदोलन में शामिल होने के आह्वान भी शामिल है। एक संदेश में तो यह दावा किया गया कि अगला दिन मोदी सरकार का आखिरी दिन होगा। कुछ अन्य संदेशों में आंदोलन के दौरान जान देने तक की तैयारी जताई गई है। पुलिस इन टिप्पणियों के संदर्भ की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे केवल व्यक्तिगत विचार थे या प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं से जुड़े किसी समन्वित प्रयास का हिस्सा थे।
पुलिस के अनुसार डिजिटल संचार की फॉरेंसिक जांच जारी है और साइबर विशेषज्ञ संदेशों की उत्पत्ति, प्रसार तथा प्रामाणिकता की पुष्टि करने में जांचकर्ताओं की सहायता कर रहे हैं। हर संदेश को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने से पहले उसका तकनीकी सत्यापन किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार जांच पूरी तरह साक्ष्य आधारित है और आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के दौरान एकत्र पुष्टिकारक सामग्री पर निर्भर करेगी। पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों को ध्यान में रख रही है।

