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पाकिस्तान चुपचाप बना रहा है न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल, अमेरिका की बढ़ी टेंशन

     Pakistan Ballistic Missile: अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने एक बड़ा दावा किया है। इससे अमेरिका समेत कई देशों की टेंशन बढ़ गई है। खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान गुपचुप तरीके से परमाणु-युक्त इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) बना रहा है। यह मिसाइल सीधे अमेरिका तक हमला कर सकती है। ये रिपोर्ट प्रतिष्ठित अमेरिकी पत्रिका ‘फॉरेन अफेयर्स’ में. छपी है। इस रिपोर्ट के बाद अमेरिका की टेंशन बढ़ गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान चीन के समर्थन से अपने परमाणु हथियारों को अपग्रेड करने की कोशिश कर रहा है।

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मई में ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के आईसीबीएम कार्यक्रम में तेज़ी आई है। जबकि पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर कहता है कि उसके परमाणु हथियारों का इस्तेमाल सिर्फ भारत के खिलाफ बचाव के तौर पर किया जाता है। इधर अमेरिकी अधिकारियों को शक है कि आईसीबीएम के विकास का मकसद संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों का मुकाबला करना है।

क्या करेगा अमेरिका?

वहीं अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर पाकिस्तान ऐसी मिसाइल बनाता है, तो अमेरिका के पास उसे  परमाणु दुश्मन घोषित करने के सिवाय कोई चारा नहीं बचेगा। परमाणु हथियार रखने वाले किसी भी देश को अमेरिका अपना विरोधी ही मानता है। मौजूदा समय में रूस, चीन और उत्तरी कोरिया को अमेरिका अपना विरोधी मानता है। संयुक्त राज्य अमेरिका को निशाना बनाने वाले ICBM वाले किसी भी अन्य देश को मित्र नहीं माना जाता है।

जानिए ICBM क्या है

इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के वारहेड से लैस हो सकती है। यह 5500 किमी से अधिक दूरी तक लक्ष्य को भेद सकती है। मौजूदा समय में पाकिस्तान के पास कोई आईसीबीएम नहीं है। साल 2022 में, पाकिस्तान ने सतह से सतह पर मार करने वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल शाहीन-III का परीक्षण किया। यह मिसाइल 2,700 किलोमीटर से अधिक दूरी तक के लक्ष्यों को भेद सकती है। जिससे कई भारतीय शहर इसकी जद में आ गए हैं।

         अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करने के पीछे पाकिस्तान की मंशा अमेरिका को किसी एहतियाती हमले की स्थिति में अपने परमाणु शस्त्रागार को नष्ट करने से रोकना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान अब चीन की मदद से अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को तकनीकी रूप से अपग्रेड कर रहा है। चीनी कंपोनेंट्स, फ्यूल टेक्नोलॉजी और रडार अवॉइडेंस सिस्टम की मदद से पाकिस्तान कथित तौर पर एक लिक्विड-फ्यूल या सॉलिड-फ्यूल ICBM पर काम कर रहा है।

अमेरिका ने लगाई थी पाबंदी

पाकिस्तान की ओर से की जा रही ऐसी हरकतों को लेकर अमेरिका की टेंशन बढ़ गई है। पिछले साल, वाशिंगटन ने पाकिस्तान के लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से संबंधित नए प्रतिबंध लगाए थे। ये प्रतिबंध मिसाइल कार्यक्रम की देखरेख करने वाली सरकारी रक्षा एजेंसी नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स और तीन अन्य फर्मों पर लगाए गए थे। जबकि, पाकिस्तान ने इस कदम को पक्षपाती बताया था।

NPT पर पाक ने नहीं किए हस्ताक्षर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के पास करीब 170 परमाणु हथियार हैं। पाकिस्तान ने परमाणु अप्रसार संधि पर भी हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इस संधि का मकसद परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना

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