आज हिंदी दिवस है।आज तक हमारी हिन्दी जो स्वतंत्रता संघर्ष के दीवानों के लिए देश को एकता के सूत्र में बांधने के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन थी,वही स्वतंत्रता के बाद तिरस्कृत होती गयी। प्रधानमंत्री के हजार प्रयासों के बाद भी वह राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं पा सकी।आज के दिन वह किसी तरह राजभाषा तो बनी पर क्रियान्वयन आधा अधूरा ही है।
उत्तर दक्षिण के बीच राजनीतिक लोगों के बीच निहित स्वार्थों से जो खाईं खोदी गयी, स्टालिन जैसे नेता उसे सुरंग बनाने में लगे हुए हैं।भाषा ,जनता की सम्पत्ति है।उसके प्रति निष्ठा और स्वाभिमान का भाव यदि जनता ही न विकसित कर पाई तो किसी दूसरे का हाथ नहीं है।
हम दोगले चरित्र के साथ हिंदी की बात करते हैं।सपने हिन्दी में देखेंगे पर अपने बच्चों को कान्वेंट में दाखिला दिलाने पर गर्व करेंगे। तमिलों से भाषाई स्वाभिमान सीखना चाहिए। त्रिभाषा फार्मूले में एक दक्षिण की भाषा अवश्य शामिल करना चाहिए। अनुवाद पर काम करके उत्तर दक्षिण के खांई को पाटना चाहिए। हिंदी को ज्ञान विज्ञान और तकनीक की भाषा बनाना चाहिए।
हिंदी का विकास खूब हुआ और हो भी रहा है,पर यह विकास बोली का है,भाषा का नहीं।और इसे न जनता ने किया है,न सरकारों ने,न ही पत्रकारिता ने। दक्षिण में तो हिंदी अखबारों के व्यूरो तक नहीं खोले गये। विकास का काम बाजार ने अपनी आवश्यकताओं के लिए किया है।हमारी हिन्दी बहुत वैज्ञानिक, कंम्पयूटर के उपयुक्त और मानवता के संदेशों से भरपूर है।पर आज भाषा को अकादमिक तौर पर सक्षम बनाकर नौकरियां सृजित करने का काम बड़ा है। हिंदी अंग्रेजी उर्दू के विवाद व्यर्थ हैं।भाषा बड़ी छोटी नहीं होती,उसमें कंटेंट कैसा है,यह उसे बड़ा छोटा बनाता है।
भारतेंदु, मैथिली शरण,निराला, प्रसाद,पंत,महादेवी,अज्ञेय, नागार्जुन, मुक्तिबोध, धूमिल ने तुलसी,कबीर,सूर , बिहारी की परंपरा को खूबसूरत ढंग से बढ़ाया।आज हमारी बारी है कि हिंदी इंजीनियरिंग, चिकित्सा, न्याय, वाणिज्य की भाषा बनें। हमारा साहित्य मानवता की शिक्षा देता है। हिंदी का जो भी विकास है उसमें निहित संवेदना के कारण है।न तो हमने साम्राज्यवाद का सहारा लिया,न धर्म का।इसपर गर्व भी है।इसके मानवता के संदेश ने इसे सबका प्यार दुलार दिलाया है।आप सबको हार्दिक मंगलकामनाएं।
हिंदी का संदेश है कि “मानवता ही सच्चा धर्म है” क्योंकि मानव के प्रति करुणा, प्रेम और सेवा भाव ही सबसे श्रेष्ठ गुण हैं, जो सभी भेदभावों से परे होकर सभी प्राणियों के कल्याण की बात करता है. यह विचार किसी भी व्यक्ति को धर्म के नाम पर बँटने के बजाय एक-दूसरे के प्रति सहृदयता और एकता का पाठ पढ़ाता है, जिससे सभी का जीवन सुखमय बन सके। पुनः हिन्दी दिवस की बहुत बहुत मंगलकामनाएं।

