न जाने क्यों मुझे अभी अमेरिका के साथ चल रहे टैरिफ वार के दौरान मोदी जी वो बात बार-बार याद आती है कि… “ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है बल्कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है”
और, वर्तमान की परिस्थिति को देखकर लग रहा है कि शायद मोदी जी ने ऑपरेशन सिंदूर जारी रहने की बात पकिस्तान के संबंध में नहीं बल्कि अमेरिका के संबंध में ही कही थी.
असल में बहुत पहले एक फ़िल्म आई थी “कंपनी”.
उसमें एक सीन था कि जब दाऊद पर भारत में शिकंजा कसा तो वो अपने परिवार और विश्वस्त मित्रों के साथ मलेशिया पलायन कर गया..
और, बैकग्राउंड से आवाज आती है कि “दाऊद इस समय का वर्षों से तैयारी कर रहा था”
कहने का मतलब कि भारत में रहते हुए वो समझ चुका था कि भारत में उसका दाना-पानी ज्यादा समय तक नहीं लिखा है..
इसीलिए, वर्षों से वो किसी दूसरे देश में अपने लिए सुरक्षित ठिकाने की तैयारी कर रहा था और भारत में शिकंजा कसते ही वो यहाँ से निकल गया..!
ठीक वैसा ही अभी वास्तविकता में हो रहा है.
शायद केंद्र की सभी सरकारें शुरू से ही ये जानती थी कि पकिस्तान के पास जो परमाणु जखीरा है वो उस कंगले का नहीं बल्कि अमेरिका का है.
इसीलिए , पकिस्तान के लाख उत्पातियों के बाद भी केंद्र की सरकारें पकिस्तान पर एक्शन लेने से झिझकती थी क्योंकि इससे अमेरिका से दुश्मनी हो जाने का खतरा था.
बाद में राष्ट्रवादी मोदी सरकार के आने के बाद इन्हें भी “उस राज” की जानकारी हुई..लेकिन, मोदी जी सबकुछ जानकर भी अनजान बने रहे क्योंकि उस समय हमारी स्थिति अमेरिका से टकराने की नहीं थी.
इसीलिए, मोदी जी ने पकिस्तान को न घेर कर सिर्फ आतंकवाद की बात की और 10 साल पूरी दुनिया घूम घूम कर दुनिया भर में आतंकवाद के खिलाफ माहौल तैयार किया.
मजे की बात ये है कि… दुनिया में “गरीब, महिला, बच्चे और आतंकवाद” आदि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिसपर असहमत होने पर भी कोई देश इसका विरोध नहीं कर पाता है.
इसीलिए, कोई मोदी जी के इस आतंकवाद के खिलाफ कैम्पेनिंग का भी कोई विरोध नहीं कर पाया.
खैर, एक तरफ मोदी जी आतंकवाद के खिलाफ कैम्पेनिंग करते रहे और दूसरी तरफ “आत्मनिर्भर भारत”, “मेक इन इंडिया” आदि के साथ भारत को मजबूत और आत्मनिर्भर भी बनाते गए.
यहाँ तक कि… खुद को मजबूत करने के लिए उन्होंने फ्रांस, जर्मनी, रूस के अलावे खुद अमेरिका से भी हथियार लिया.
खैर… जब भारत इतना मजबूत हो गया कि वो अब निपट सके तो फिर बिना अमेरिका की चिंता किए ऑपरेशन सिंदूर किया और पकिस्तान को पीट दिया.
न सिर्फ, पीट दिया बल्कि दुनिया में अमेरिका को एक्सपोज भी कर दिया कि यहाँ दक्षिण एशिया में अमेरिका दशकों से क्या खेल रच रहा था.
यहाँ एक बात स्पष्ट कर दूँ कि अगर पहलगाम हमला नहीं होता तो ऑपरेशन सिंदूर भी नहीं होता.
लेकिन, मोदी सरकार ये बात अच्छे से जानती थी किपकिस्तान.. आज न कल… छोटी या बड़ी कुछ न कुछ घटना करेगा ही करेगा.
फिर उसी बहाने पकिस्तान को पीटा जाता …
भले उस ऑपरेशन का नाम ऑपरेशन सिंदूर न होकर “ऑपरेशन प्रचंड” या “ऑपरेशन प्रलय” ही क्यों न हो.
खैर, ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिकी हलचल देख कर मोदी सरकार समझ गई कि वे जिस घड़ी की तैयारी इतने वर्षों से कर रहे थे..
अब वो समय आ चुका है.
इसीलिए, उन्होंने देशवासियों को इशारों इशारों में बता दिया कि “ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है…बल्कि, जारी है.”
अर्थात, देश और देशवासी अभी और हलचल के लिए मानसिक रूप से तैयार रह सकें
शायद इसीलिए… भूरेलाल की इतनी बयानबाजी के उपरांत भी मोदी सरकार न तो उत्तेजित हुई और न ही घबड़ाई क्योंकि उन्हें इसका आभास पहले से ही था कि पिग्गिस्तान और कैराना हिल पर हमले के बाद ऐसा कुछ हो सकता है.
इसीलिए, भूरेलाल की ऐसी बयानबाजी के शूरू होते ही मोदी सरकार फालतू के बयानबाजी की जगह काम पर लग गई…
और, आज की कहानी ये है कि…
उधर, NSA अजित डोभाल रूस में पुतिन से मिल रहे हैं …
इधर, विदेशमंत्री एस. जयशंकर चीन मे जिनपिंग से मिल रहे हैं
इसी महीने खुद मोदी जी चीन पहुँच रहे हैं
और, इसी वर्ष पुतिन भी भारत आ रहे हैं.
मतलब कि शायद ऑपरेशन सिंदूर के क्लाइमेक्स की तैयारी जोरों पर है.
और, शायद ऑपरेशन सिंदूर का क्लाइमेक्स इतना धमाकेदार होने जा रहा है कि पूरा वर्ल्ड आर्डर और डॉलर का भोकाल इससे चिन्दी-चिन्दी होकर बिखर जायेगा.. !
क्योंकि, अभी के सारे घटनाक्रम तो उसी ओर इशारा कर रहे हैं..!

