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एक्सीडेंट के बाद अब नहीं होगी मौत, डॉ. लालजी सिंह रिसर्च सेंटर कलवारी में विशेष व्याख्यान, नार्वे से आए वैज्ञानिक ने साझा किए शोध

डॉ. लालजी सिंह रिसर्च सेंटर कलवारी में विशेष व्याख्यान, नार्वे से आए वैज्ञानिक ने साझा किए शोध

    जौनपुर: सड़क हादसों और गंभीर चोटों के बाद अक्सर ‘मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर’ के कारण होने वाली मृत्यु दर अब बीते दिनों की बात हो सकती है। नार्वे के ओस्लो यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल से आए सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. सचिन कुमार सिंह ने इस दिशा में एक क्रांतिकारी तकनीकी खोज की है। कलवारी स्थित डॉ. लालजी सिंह रिसर्च सेंटर में आयोजित एक विशेष व्याख्यान के दौरान उन्होंने अपनी इस उपलब्धि को साझा किया।

​     डॉ. सचिन कुमार सिंह, जो पिछले 15 वर्षों से नार्वे में ‘प्रोटोमिक्स’ (Proteomics) विभाग में शोध कर रहे हैं, ने बताया कि उन्होंने एक ऐसी विशेष तकनीकी विकसित की है जो एक्सीडेंट के बाद शरीर के महत्वपूर्ण अंगों (मल्टीपल ऑर्गन) को फेल होने से रोक सकती है। आमतौर पर दुर्घटना के बाद गंभीर चोट और आंतरिक क्षति के कारण अंग काम करना बंद कर देते हैं, जिससे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। डॉ. सिंह की खोज इसी मृत्यु दर को न्यूनतम करने पर केंद्रित है।
​गुरु डॉ. लालजी सिंह की विरासत को बढ़ाएंगे आगे
​      स्वर्गीय डॉ. लालजी सिंह (DNA फिंगरप्रिंटिंग के जनक) को अपना मार्गदर्शक और गुरु मानते हुए डॉ. सचिन ने भावुक होकर कहा कि वे उनके पैतृक गांव कलवारी स्थित इस रिसर्च सेंटर को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तत्पर हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में वे इस सेंटर के साथ मिलकर संयुक्त रूप से शोध कार्य (Research Work) करेंगे ताकि ग्रामीण क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें
​     इस व्याख्यान के दौरान उपस्थित बुद्धिजीवियों ने डॉ. सिंह के कार्यों की सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीकी धरातल पर आती है, तो आपातकालीन चिकित्सा (Emergency Medicine) के क्षेत्र में यह मानव समाज के लिए एक बड़ा वरदान साबित होगी। डॉ. सिंह ने सेंटर के विकास और आधुनिक प्रयोगों के लिए हर संभव तकनीकी सहयोग देने का वादा किया।

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