उत्तर प्रदेश में पिछले कई दिनों से प्रदेश में रात के वक्त व्याप्त बिजली का संकट अब दूर होता दिख रहा है। चार दिनों में लगभग चार हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन बढ़ने से दिन में जहां पूरे प्रदेश को बिजली कटौती से मुक्त रखने का दावा किया जा रहा है वहीं रात में भी आधे घंटे से कम ही रोस्टिंग की नौबत आ रही है।
अगले 10 दिनों में लगभग 2400 मेगावाट और उत्पादन बढ़ाकर पावर कारपोरेशन प्रबंधन त्योहारों के दौरान प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की तैयारी में है। कोयले के गीला होने के साथ ही उसकी उपलब्धता घटने, तापीय परियोजनाओं में तकनीकी दिक्कत और नेपाल आपदा के मद्देनजर पहली सितंबर के बाद से राज्य में खासतौर से रात में बिजली का संकट बरकरार था।
*चार हजार मेगावाट बिजली की उपलब्धता बढ़ी
संकट को देखते हुए कारपोरेशन प्रबंधन ने बंद यूनिटों को चालू कराने के लिए जहां एक तापीय परियोजना से दूसरी जगह कोयले को भेजने की व्यवस्था की वहीं तकनीकी दिक्कतों को तेजी से दूर कर 10 से अधिक यूनिटों को चालू कराया। इससे पिछले चार दिनों में लगभग चार हजार मेगावाट बिजली की उपलब्धता बढ़ गई है।
तापीय परियोजना से उपलब्धता बढ़ने, बैंकिंग से 2400 मेगावाट मिलने के साथ ही सोलर पावर के कारण अब सुबह छह से शाम छह बजे तक प्रदेशभर को बिजली कटौती से मुक्त रखा जा रहा है। पावर एक्सचेंज से पर्याप्त बिजली न मिलने से रात में जरूर लगभग आधे घंटे की कटौती हो रही है।
अपर मुख्य सचिव ऊर्जा व पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डा. आशीष कुमार गोयल ने बताया कि शुक्रवार को 27 हजार मेगावाट से ज्यादा बिजली की आपूर्ति की गई। गांव को जहां 21.42 घंटे वहीं अन्य को 24 घंटे बिजली आपूर्ति की गई।
रोजा परियोजना से 300 मेगावाट का उत्पादन सोमवार से शुरू होने की उम्मीद है। इसी तरह मेजा की 660 मेगावाट, हरदुआगंज की 250 मेगावाट, ओबरा की 660-660 मेगावाट की दो यूनिटें भी पहली अक्टूबर तक चालू हो जाएंगी।

