पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेट्री को सुप्रीम कोर्ट ने जमकर फटकार लगाई है। CJI ने मालदा हिंसा से जुड़े मामले पर सुनवाई करते हुए चीफ सेक्रेट्री से कहा कि आप फोन क्यों नहीं उठाते हैं। कड़ी लताड़ लगाते हुए CJI ने पश्चिम बंगाल से सीएस से कहा कि इतने ऊंचे मत हो जाइए कि चीफ जस्टिस भी आप तक नहीं पहुंच पाएं।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने मालदा हिंसा के दौरान उनके रवैये पर सवाल उठाए। दरअसल, पश्चिम बंगाल में भीड़ ने SIR प्रक्रिया के दौरान न्यायिक अधिकारियों (3 महिलाओं सहित) को 9 घंटे तक बंधक बनाकर रखा था, जिसके चलते CJI को उसी दिन देर रात हस्तक्षेप करना पड़ा था।
मुख्य सचिव बोले- मैं दिल्ली में था
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल के शीर्ष नौकरशाही की प्रतिक्रिया पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा कि क्या दिक्कत है, मुख्य सचिव महोदय? आप तो चीफ जस्टिस (पश्चिम बंगाल के) का फोन भी नहीं उठाते? वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश होते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि वे एक बैठक के सिलसिले में दिल्ली में थे और उन्हें कोलकाता से कोई कॉल नहीं आया। हालांकि, बेंच इससे संतुष्ट नहीं हुई।
इतने ऊंचे मत हो जाइए की कोई पहुंच न पाए
जस्टिस बागची ने कहा कि ये कॉल शाम के समय आई होगी। अगर आपने अपना मोबाइल नंबर साझा किया होता तो इससे चीफ जस्टिस और हाई कोर्ट प्रशासन को बेहद मदद मिलती। मुख्य सचिव ने यह कहा कि उनका नंबर उपलब्ध है तो जस्टिस बागची ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आप इतने ऊंचे नहीं हो सकते कि चीफ जस्टिस की आप तक पहुंच ही न हो। कृपया थोड़ा नीचे उतरें ताकि चीफ जस्टिस भी आपसे संपर्क कर सकें।
हाई कोर्ट से लिखित में मांगनी होगी माफी
CJI ने एक कदम आगे बढ़ते हुए मुख्य सचिव और DGP, दोनों को निर्देश दिया कि वे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से लिखित माफी मांगें। कोर्ट ने कहा कि आपको माफी मांगनी ही होगी। यह आपके नागरिक प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की घोर विफलता है कि हमें न्यायिक अधिकारियों को शक्तियां देनी पड़ीं।
घंटों बाद भी नहीं मिला कोई जवाब
बेंच ने गौर किया कि मुख्य सचिव से संपर्क करने के लिए ‘घंटों की कोशिशों’ के बावजूद, कोई जवाब नहीं मिला, जबकि इस घटना के दौरान 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया गया था। CJI ने टिप्पणी की कि ब्यूरोक्रेसी इसी तरह काम करती है! इस राज्य में तो अफरा-तफरी मची हुई है।
और ज्यादा बिगड़ सकते थे हालात
हालात की गंभीरता पर ज़ोर देते हुए CJI ने कहा कि यह घटना दोपहर करीब 3:30 बजे शुरू हुई थी, लेकिन उन्हें रात 11:30 बजे ही इसकी जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि तब तक, न जाने क्या-क्या हो सकता था? हजारों लोगों को इकट्ठा होने दिया गया और वे लगातार इकट्ठा होते रहे। जस्टिस बागची ने आगे कहा कि हालात को और ज्यादा बिगड़ने से रोकने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश के दखल की जरूरत पड़ी।
अधिकारी बस मौके पर तमाशा देख रहे थे
अदालत ने जमीन पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी उनकी खिंचाई की। इस बात का जिक्र करते हुए कि जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक मौके पर मौजूद थे, जस्टिस बागची ने कहा कि वे बस तमाशा देख रहे थे। जब SP से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मैं क्या कर सकता हूं, वहां औरतें भी मौजूद हैं अगर हमने कोई कार्रवाई की, तो औरतों की जान जा सकती है।

