आपने भृंगी ऋषि के बारे में सुना होगा।
भृंगी ऋषि जो थे वो केवल शिव को पूजना चाहते थे माता पार्वती को नही आपने यह भी पढ़ा होगा जब भृंगी ऋषि शिव की पूजा करने गए तो केवल भगवान शिव की परिक्रमा कर रहे थे ।
हमारे ऋषि बताते है जब यह माता पार्वती देखती है कि भृंगी ऋषि केवल भगवान शिव की परिक्रमा कर है तो माता पार्वती भगवान शिव के थोड़ा करीब आकर बैठ जाती है उन दोनों के बीच मात्र थोड़ी सी जगह बचती है फिर जब भृंगी अपने आप आपको एक पतले सांप में बदल लेते है और शिव और पार्वती के बीच जो थोड़ी जगह बची होती है वो उसके बीच केवल शिव की परिक्रमा करने लगते है।
जब यह माता पार्वती देखती है माता पार्वती भगवान शिव से मिल जाती है और आधा पुरुष और आधा नारी का रूप बन जाता है।
फिर भी भृंगी अपने सरीर को एक सूक्ष्म जीव का आकार लेकर शिव के शरीर के आधे भाग के अंदर से घुसकर परिक्रमा करना चाहते है।
तो यहाँ पर माता पार्वती कहती है जब ये मान नही रहा है तो इससे मैं वह सब वापिस ले लेती हूं जो इसके पास मेरी वजह से है और आप कथा में सुने होंगे जैसे माता पार्वती अपना सब कुछ भृंगी ऋषि के शरीर से लेती है भृंगी ऋषि के सरीर में केवल हड्डियों का ढांचा बचता है वो भी कुछ मात्रा में ही बाकी उनके सरीर के सभी मांस रक्त और सब कुछ गायब हो जाता है केवल सरीर का ढांचा ही बचता है।
1980 से 1990 तक वैज्ञानिकों ने यह पता कर लिया था कि शरीर में जीन होते हैं जेनेटिक होते हैं डीएनए होते हैं और एक बच्चे में उसके माँ और बाप दोनों के आधे आधे जीन आते हैं कहीं पे उसके माँ के जीन कहीं पे उसके पिता के जीन
लेकिन 1980 में वैज्ञानिकों को एक हैरान कर देने वाली एक अजीब चीज पता चली कि हमारी जो पूरी बॉडी है ये छोटे छोटे सेल्स से बनी हुई है और अपने जीव विज्ञान में पढ़ा होगा कि उस छोटे सेल्स को जो ऊर्जा देता है वो होता है माइटोकॉन्ड्रिया जिसे पावर हाउस भी बोलते है।
अब वो जो माइटोकॉन्ड्रिया हमारी बॉडी में होते है उनका जो 100% डीएनए आता है हमेशा वो आता है माँ से यानी फीमेल से। यानी हमारी बॉडी का जो पावर हाउस है जो हमारे सरीर के सेल्स को ऊर्जा देता है उसका डीएनए पिता से आता ही नही वह आता है केवल माता से।
ये बेसिक लेवल पर है उसके बाद जो हम भोजन या प्रकृति से ऊर्जा लेते है वो तभी ले पाते है क्योंकि उसके पहले हमारे सरीर का पावरहाउस सेल्स को ऊर्जा देता है फिर वो सेल्स भोजन से ऊर्जा लेने लायक बन पाते है। अगर वो एनर्जी हमारे सरीर के सेल्स को ना मिले तो हमारे सरीर में जो खून मांस सब कुछ है वो सब नष्ट हो जाएगा
जैसे इंसान के मरने के बाद केवल इंसान में केवल हड्डियों का ढांचा बच जाता है और सब कुछ गायब हो जाता है हड्डियाँ इसलिए भी बच जाती है क्योंकि वो मात्र ढांचा होता है।
इसीलिए हमारे ऋषियों ने माता पार्वती को शक्ति या ऊर्जा बताया है पूरे ब्रह्मांड को और साथ मे सभी स्त्रियों को भी शक्ति या ऊर्जा बताया है इसीलिए आप सनातन धर्म मे तमाम देवियों के शक्तिपीठ भी देखते होंगे।
क्योंकि हमारे ऋषियों मुनियों को वैज्ञानिकों और टेक्नोलॉजी से पहले पता था जो सबमें शक्ति है ऊर्जा है वो स्त्रियों से ही आता है इसीलिए स्त्रियां शक्ति का प्रतीक मानी गई है।
अगर आपके ही सरीर से आपकी माँ के द्वारा गर्भ में मिला हुआ वो माइटोकॉन्ड्रिया यानी पावर हाउस आपके सरीर से किसी तरह निकाल दिया जाए तो आपके शरीर मे केवल हड्डियों का ढांचा मात्र बचेगा आपके सरीर से आपकी चमड़ी से लेकर मांस खून सब कुछ गायब हो जाएगा।
ऋषि भृंगी की कहानी के माध्यम से हमारे ऋषियों ने हमे बहुत ही सूक्ष्म विज्ञान समझाया था।
सनातन धर्म मे जो जो लाइन लिखी है वह सब एक रहस्य है यदि वो जिसको काल्पनिक लगती है इसका मतलब अभी उसके दिमाग का उतना विकास नही हो पाया है

