पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण एलपीजी की खेप में देरी, पंजाब में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई अस्थायी रूप से रोकी गई
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में रसोई गैस की सप्लाई पर भी दिखने लगा है। गैस सप्लाई करने वाले देशों से आने वाली खेप देर से पहुंच रही है, जिससे भारत के बंदरगाहों पर गैस की डिलीवरी धीमी हो गई है। इसलिए सरकार और सरकारी तेल कंपनियां पहले घरेलू जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान दे रही हैं।
पंजाब में कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई रोकी गई
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से पंजाब में कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई फिलहाल रोक दी गई है। इसमें 19 किलो, 47.5 किलो और 425 किलो के बड़े सिलेंडर शामिल हैं। साथ ही गैस एजेंसियों से कहा गया है कि 25 दिन पूरे होने से पहले नया सिलेंडर बुक न करें। गैस की कमी का असर कुछ शहरों में दिखने लगा है। पुणे में गैस से चलने वाले शवदाह गृह कुछ समय के लिए बंद कर दिए गए हैं। इसकी वजह यह है कि प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है।
अमेरिका की ईरान को चेतावनी
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि सैन्य अभियान जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन उन्होंने कोई तय समय नहीं बताया। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर उसने स्ट्रेट ऑफ होरमुज से तेल की आवाजाही रोकी, तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। वहीं ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने कहा कि युद्धविराम तभी हो सकता है जब ईरान पर आगे कोई हमला न हो। उन्होंने यह भी बताया कि चीन, रूस और फ्रांस सहित कई देशों ने संघर्ष रोकने के लिए ईरान से संपर्क किया है।
ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह ईरान के तेल संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका के कदमों का उद्देश्य ईरान के तेल भंडार पर अवैध नियंत्रण हासिल करना है। ईरान के स्वास्थ्य उप मंत्री अली जाफरियन के अनुसार, देश में जारी हमलों में अब तक 1,255 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 200 बच्चे और 11 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। मरने वालों की उम्र 8 महीने से 88 साल के बीच बताई गई है।
स्ट्रेट ऑफ होरमुज पर तनाव
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कहा है कि जो देश इजराइल और अमेरिका के राजदूतों को निकाल देंगे, उन्हें स्ट्रेट ऑफ होरमुज से गुजरने की पूरी अनुमति दी जाएगी। यह जलमार्ग दुनिया के तेल कारोबार के लिए बहुत अहम है और यहां किसी भी तरह का खतरा वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चिंता पैदा कर सकता है।
वहीं सऊदी अरब ने ईरान की कार्रवाई की आलोचना की है। सऊदी अरब का कहना है कि अगर हमले जारी रहे तो संघर्ष और बढ़ सकता है और क्षेत्र के देशों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है। साथ ही उसने कहा कि देश को अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का पूरा अधिकार है।
इस बीच मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। इससे पहले सोमवार को कीमतें तीन साल से ज्यादा के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थीं। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 6.51 डॉलर गिरकर 92.45 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 6.12 डॉलर गिरकर 88.65 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
इजराइल-ईरान संघर्ष की शुरुआत
इजराइल और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष 28 फरवरी से शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके बाद ईरान ने भी मिसाइल हमलों से जवाब दिया। अब तक जारी हमलों में ईरान में 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। (एजेंसियों के इनपुट के साथ)

