सिंधु जल समझौता रोकने को लेकर पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की हर संभव कोशिश करेगा, लेकिन भारत को अपने स्टैंड पर कायम रहना चाहिए। यह राय है पूर्व भारतीय राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन का।
नई दिल्ली: भारत ने पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भले ही सिंधु जल समझौते ( Indus Waters Treaty ) को औपचारिक तौर पर रोका हो, लेकिन इसका आधार बहुत पहले से ही तैयार हो रहा था। तथ्य यह है कि सिंधु जल संधि में भारत के हित ताक पर रख दिए गए थे। पहले भारत ने इस संधि का सम्मान करते हुए अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन जब पाकिस्तान ने आतंकवाद से नाक में दम किया तो भारत को अपने संप्रभु अधिकारों का इस्तेमाल करना पड़ा। भारत के जाने-माने पूर्व राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन का कहना है कि भारत को अपने स्टैंड पर डटे रहना चाहिए।
भारत ने जब अपना यह स्टैंड फिर से साफ किया है कि पाकिस्तान की ओर से प्रायोजित आतंकवाद रुके बिना सिंधु जल समझौते पर फिर से विचार करना असंभव है। पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है। वह इसपर पानी का रोना रोकर अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहा है। साथ ही पाकिस्तान के राजनीतिक दल और सरकार इसपर गीदड़भभकियां भी देने में पीछे नहीं हैं। ऐसे में सैयद अकबरुद्दीन ने भारत का स्टैंड क्या हो, उसपर अपनी एक सधी हुई, लेकिन दूरगामी प्रभाव वाली राय दी है।
भरोसा टूटने के बाद कैसा समझौता
भारत के पूर्व राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन ने अंग्रेजी अखबार द ट्रिब्यून में इसपर एक लंबा-चौड़ा लेख लिखा है और उसे एक्स के माध्यम से शेयर भी किया है। एक्स पर इसके बारे में उन्होंने लिखा है, ‘क्या सिंधु जल समझौता तब भी काम कर सकता है, जब इसकी प्रक्रिया की दिशाएं भिन्न लग रही हों और सहयोग के लिए आवश्यक भरोसा भी टूट चुका हो?’
सिंधु जल समझौते पर क्या हो भारत का आगे का स्टैंड
सैयद अकबरुद्दीन के पूरे लेख का लब्बोलुआब पांच बातों में है-
- पाकिस्तान पानी को मुद्दा बनाकर ‘लाइफ लाइन, रेड लाइन और युद्ध’ जैसी बातें करेगा।
- भारत को ‘आतंकवाद, भरोसा और अधिकार क्षेत्र’ के मसले पर डटे रहना चाहिए।
- अब यह सवाल नहीं रह गया है कि कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन से ‘किसे अवॉर्ड मिला’।
- ऐसे में क्या कोई संधि कायम रह सकती है, जब इसकी ‘प्रक्रियाओं में ही विरोधाभास’ है।
- सबसे बड़ी बात ये है कि सहयोग के लिए जो ‘भरोसा चाहिए, वही टूट चुका’ है।
सिंधु जल समझौते की मौजूदा स्थिति
- सिंधु जल संधि पर भारत की ओर से रोक बरकरार
- पाकिस्तान यूएन समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रहा है मुद्दा
- भारत ने दिया सख्त कूटनीतिक संदेश, पाकिस्तान की आपत्तियों के बावजूद अपने स्टैंड पर कायम
- भारत पर पानी के हथियारीकरण का आरोप लगा रहा है पाकिस्तान
- इस समय भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता आपसी विवाद का बड़ी मुद्दा बन चुका है।

