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चीन की गोद में बैठे मलेशिया से भारत ने गांठ ली दोस्ती, फरवरी में जा सकते हैं पीएम मोदी?

    मलेशिया भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का प्रमुख पिलर है। मलेशिया में चीन ने निवेश कर रखा है। ऐसे में फरवरी में पीएम मोदी मलेशिया जा सकते हैं। उनकी यह यात्रा अहम साबित हो सकती है।

     नई दिल्ली: प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण पूर्व एशिया तक अपनी पहुंच के तहत फरवरी की शुरुआत में मलेशिया का दौरा करने पर विचार कर रहे हैं। द इकनॉमिक टाइम्स की एक खबर के अनुसार, घरेलू प्रतिबद्धताओं और बिहार विधानसभा चुनावों के कारण पिछले साल अक्टूबर में मलेशिया द्वारा आयोजित आसियान शिखर सम्मेलन में मोदी हिस्सा नहीं ले पाए थे। इसके कुछ महीनों बाद से ही इस यात्रा की योजना बनाई जा रही है। पीएम अगर मलेशिया जाते हैं तो उनकी यह बेहद खास साबित हो सकती है।

चीन 17 साल से मलेशिया का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर

aseanbriefing पर छपी एक खबर के अनुसार, 2024 में चीन और मलेशिया के बीच 212.04 बिलियन डॉलर का ट्रेड हुआ था। वहीं, चीन लगातार 17 सालों से मलेशिया का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बना हुआ है। यह कारोबार अब 20.8 बिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है।

भारत और मलेशिया ने रक्षा साझेदारी बढ़ाई है

भारत और मलेशिया ने अगस्त 2024 में मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम की यहां यात्रा के दौरान अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया। जबकि भारत और मलेशिया ने हाल के वर्षों में अपनी रक्षा साझेदारी का विस्तार किया है। उनसे पहले जब महाथिर मोहम्मद सत्ता में रहे हैं, कश्मीर पर उनकी स्थिति के कारण राजनीतिक संबंध कमजोर रहे हैं।

मलेशिया आसियान में भारत का तीसरा सबसे बड़ा कारोबारी पार्टनर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवंबर 2022 से इब्राहिम के मलेशिया का पीएम बनने से दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों की संभावनाएं हैं। मलेशिया आसियान क्षेत्र में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।

भारत के लिए क्यों मायने रखता है मलेशिया

एक ऐसे देश के रूप में जहां 7.2% आबादी भारतीय मूल की है, मलेशिया भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मलक्का जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर जैसी व्यस्त समुद्री संचार लाइनों से घिरा, मलेशिया भारत की एक्ट ईस्ट नीति का एक प्रमुख स्तंभ है और भारत की समुद्री कनेक्टिविटी रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण है।

मलेशिया के साथ भारत का है FTA

भारत ने 1957 में मलेशिया के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए। भारत और मलेशिया ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) पर हस्ताक्षर किए हैं। सीईसीए एक तरह का मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) है। भारत ने 10 सदस्यीय दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) के साथ सेवाओं और निवेश में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी हस्ताक्षर किए हैं। मलेशिया आसियान में तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। भारत और मलेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार काफी हद तक मलेशिया के पक्ष में है।दोनों देशों के बीच प्रतिवर्ष संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘हरिमऊ शक्ति’ आयोजित किया जाता है।

भारत और मलेशिया के बीच Su-30 फोरम

भारत और मलेशिया ने 19 फरवरी 2025 को कुआलालंपुर में 13वीं मलेशिया-भारत रक्षा सहयोग समिति (MIDCOM) की बैठक आयोजित की। उस समय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और उनके मलेशियाई समकक्ष लोकमान हकीम बिन अली ने रक्षा उद्योग सहयोग, समुद्री सुरक्षा, बहुपक्षीय जुड़ाव और साइबर सुरक्षा और एआई जैसे उभरते क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए वार्ता की सह-अध्यक्षता की। दोनों पक्षों ने अपनी वायु सेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक मामलों के कार्य समूह और एक Su-30 फोरम के लिए संदर्भ की शर्तों (टीओआर) का आदान-प्रदान किया।

भारत-मलेशियाई वायुसेना में Su-30MKI लड़ाकू जेट

इससे पहले मलेशिया में अभ्यास उदार शक्ति 2024 में सफल भागीदारी के बाद भारतीय वायु सेना की टीम 10 अगस्त 2024 को वापस लौट आई थी। रॉयल मलेशियाई वायु सेना के सहयोग से आयोजित संयुक्त वायु अभ्यास में IAF के Su-30MKI लड़ाकू जेट शामिल थे।

क्या है एक्ट ईस्ट पॉलिसी

नवंबर, 2014 में घोषित ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ ‘लुक ईस्ट पॉलिसी’ का अपग्रेड है। यह विभिन्न स्तरों पर विशाल एशिया-प्रशांत क्षेत्र के साथ आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक राजनयिक पहल है। इस प्रयास में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने 1992 में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के साथ भारत के जुड़ाव को रणनीतिक बढ़ावा देने, एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने और चीन के रणनीतिक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए लुक ईस्ट नीति शुरू की थी।

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