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INDIA Alliance: ममता और स्टालिन का प्रदर्शन सिर्फ दो दलों की हार नहीं; क्या अब इंडिया गठबंधन टिक पाएगा?

     पांच राज्यों के आए चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी के सामने विपक्षी दलों की स्थिति और भी कमजोर हुई है। बंगाल में टीएमसी और तमिलनाडु में डीएमके की हार के बाद इंडिया गठबंधन की स्थिति और भी कमजोर हो गई है। बंगाल में बीजेपी की जीत कई मायनों में अहम है तो वहीं केरल में लेफ्ट की हार के बाद उसका आखिरी किला भी ढह गया।

नई दिल्ली: 4 मई को अब तक आए चुनावी नतीजों के बाद 5 राज्यों की चुनावी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बंगाल में पहली बार बीजेपी सरकार बनाने जा रही है तो वहीं तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी ने कमाल कर दिया है। बंगाल और तमिलनाडु दोनों ही राज्यों में बदलाव के साथ दो सबसे शक्तिशाली क्षेत्रीय नेताओं को गहरा धक्का लगा है। इन नेताओं की हार का असर आने वाले लोकसभा चुनाव और विपक्षी एकता पर भी पड़ना तय है। बीजेपी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के चौथे कार्यकाल की उम्मीदों पर पानी फेरती दिख रही है तो वहीं तमिलनाडु में स्टालिन अपनी कुर्सी गंवा बैठे हैं और टीवीके प्रमुख थलपति विजय का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है।

इंडिया गठबंधन की आगे की राह और भी मुश्किल
स्टालिन और ममता बनर्जी दोनों विपक्षी इंडिया गठबंधन के सबसे प्रमुख चेहरों में से हैं। दोनों नेता अब तक अपने-अपने राज्यों में भाजपा के विस्तार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे साथ ही ममता बनर्जी को अक्सर नरेंद्र मोदी के संभावित राष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जाता है। पिछले कुछ चुनावों में कांग्रेस की कई हार के बाद विपक्ष के चेहरे के रूप में राहुल गांधी के नाम पर इंडिया गठबंधन के भीतर ही सवाल थे। वहीं अब ममता बनर्जी और स्टालिन को चुनाव में जो झटका लगा है वह इंडिया गठबंधन की स्थिति को और जटिल बना देगा।

2024 के बाद राज्यों में तेजी से बढ़ता बीजेपी का ग्राफ
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी अकेले अपने दम पर सरकार बनाने से चूक गई थी। बीजेपी जितनी सीटों की उम्मीद लगाए बैठी थी उसके मुताबिक उसे सफलता नहीं मिली। साथ ही यह सवाल उठने लगे कि बीजपी की स्थिति अब कमजोर हो रही है लेकिन लोकसभा के बाद कई राज्यों में बीजेपी ने जीत हासिल कर इस आकलन को गलत साबित कर दिया। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद बीजेपी ने महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार, दिल्ली और ओडिशा सहित कई राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत की है। पश्चिम बंगाल में मिली जीत ने इस दायरे को और भी बढ़ाया है।

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