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ग्रामोदय विश्वविद्यालय में स्वतंत्रता पर्व हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया,कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा ने किया ध्वजारोहण

आत्मनिर्भर और विकसित भारत अभियान में ग्रामोदय की प्रासंगिकता : प्रो भरत मिश्रा 
     चित्रकूट, 16 अगस्त 2025।स्वतंत्रता पर्व पर महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में  स्वतंत्रता पर्व हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा ने रजत जयंती भवन में ध्वजारोहण किया। इस मौके उन्होंने आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत अभियान में ग्रामोदय विश्वविद्यालय की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए ग्रामोदय विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलाधिपति भारत रत्न राष्ट्र ऋषि नाना जी देशमुख की ग्रामोदय संकल्पना और कार्यशैली पर प्रकाश डाला।ध्वजारोहण,सामूहिक राष्ट्रगान, कुलगुरु प्रो मिश्रा का मार्गदर्शक उद्बोधन, सैनिकों का सम्मान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, एक पेड़ मां के नाम पर वृक्षारोपण, खेलकूद आदि कार्यक्रम स्वतंत्रता दिवस पर्व के मुख्य आकर्षण रहे।
कार्यक्रम का प्रारंभ कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा के परिसर आगमन, पूज्य बापू और  नानाजी की प्रतिमाओं को माल्यार्पण और आत्मीय नमन के साथ हुआ। तत्पश्चात रजत जयंती भवन में कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा ने ध्वजारोहण किया। सामूहिक राष्ट्रगान हुआ।
     कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा ने अपने उद्बोधन के माध्यम से उन सभी अमर बलिदानियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनके त्याग, साहस और अदम्य संघर्ष के कारण देश को अनमोल स्वतंत्रता मिली।  प्रो मिश्रा ने कहा कि गुणवत्तायुक्त शिक्षा हमारा संकल्प है। छात्र हमारी प्रेरक शक्ति हैं, गाँव हमारी प्रयोगशाला है, आत्मनिर्भर ग्राम हमारा लक्ष्य है। विश्वविद्यालय का गौरव बड़ें, राष्ट्र  का गौरव बढ़े, यही कामना है। हम सब मिलकर स्वतंत्रता की इस अमूल्य धरोहर को संजोएँ और एक समृद्ध, सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में समर्पित हों।
        उन्होंने कहा कि कल ही देश ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया। यह मानव इतिहास की सबसे भीषण त्रासदियों में से एक थी—लाखों निर्दोष लोगों की जानें गईं, लाखों लोगों को अपने घर-आँगन छोड़कर विस्थापन झेलना पड़ा। आज हम उन सभी पीड़ित परिवारों को भी नमन करते हैं, जिन्होंने असीम कष्ट सहकर भी राष्ट्र की सेवा का संकल्प नहीं छोड़ा।
       भारत की आन-बान-शान के प्रतीक तिरंगे के नीचे आज मैं गर्व और उत्साह से परिपूर्णता का अनुभव कर रहा हूँ। शान से फहराया तिरंगा हमारे साहस, गौरव,  हमारी सामूहिकता, हमारी एकता का जयघोष है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  के आव्हान पर हर घर तिरंगा, घर-घर तिरंगा” और “स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग” कार्यक्रम में पूरा विश्वविद्यालय परिवार सम्मिलित रहा। प्रदेशवासियों की सेवा में निरंतर समर्पित यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  के संकल्पों को साकार करने में प्रतिबद्ध ग्रामोदय भी अपना सतत योगदान दे रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ ने ग्रामोदय की भूमिका को भारत जैसी ग्रामीण प्रधान व्यवस्था के लिए संजीवनी कहा। वास्तव में, ग्रामोदय से राष्ट्रोदय के संकल्प को हम सबके समर्पण, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता ने नये आयाम दिये है।
 हमने कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोया। हम चलते रहे, बढ़ते रहे और निखरते रहे। हमने जो ठाना, वह लक्ष्य प्राप्त हुआ। हम सबके समर्पित प्रयासों से ही
         नेक से ए डबल प्लस ग्रेड प्राप्त हुआ, जो हमारी गुणवत्ता, पारदर्शिता और नवाचार का प्रमाण है। जुलाई में यूजीसी से श्रेणी एक का दर्जा प्राप्त हुआ , जिससे हमें अकादमिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता में नए अवसर मिले।
शैक्षणिक नवाचार और NEP 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन के साथ साथ नये नये पाठ्यक्रम प्रारंभ हुये।
       दूरवर्ती शिक्षा में भी एम बी ए, एम एस सी, बी एस सी जैसे नए पाठ्यक्रम मिले हैं, अब दूरवर्ती शिक्षा को प्रदेश के सभी जिले तक विस्तार का लक्ष्य है।छात्र संख्या में उल्लेखनीय  वृद्धि है, जो 2020-21 में 8,965 थी और अब  2024-25 में पांच गुना बढ़ कर 44,341 हो गई है।
सामाजिक प्रतिबद्धता के लिए स्वास्थ्य शिविर, मतदाता जागरूकता, स्वच्छता अभियान, ग्राम प्रवास, जल संरक्षण के लिये विभिन्न  संरचना निर्माण आदि हुए हैं।
      प्रशासनिक एवं अधोसंरचनात्मक सुधार के रूप में नए छात्रावास, कला दीर्घा, ग्रामदर्शन, कृषि तकनीकी सूचना केंद्र, वन स्टॉप स्टूडेंट हेल्प डेस्क, पूर्ण डिजिटल सेवाएँ (माइग्रेशन, पी डी सी, डिग्री प्रमाणपत्र, डिजीलॉकर), नगद रहित भुगतान, शिक्षकों के और कर्मचारी  के लंबित अधिकांश प्रकरणों का निराकरण/समाधान हो चुका है।
बहुत दिनों से प्रतीक्षित पेंशन लागू किये जाने के शासन को प्रस्ताव प्रेषित है, जिसे लागू किये जाने के लिये हरसंभव प्रयास जारी है, चित्रकूट के प्रयास फलित होतें है, यह हमने देखा है और हमारा विश्वास भी है कि हम होंगे कामयाब ‌अब हमारी आर्थिक स्थिति सुधार की ओर है और आने वाले समय में यह और सुदृढ़ होगी। अब हम आत्मनिर्भरता की ओर भी बढ़ चले है।यह सब  सहयोग, परिश्रम, समर्पण और प्रतिबद्धता का परिणाम है।
      संस्थापक कुलाधिपति नानाजी के जन्मदिन 11 अक्टूबर को दीक्षांत समारोह प्रस्तावित है। दीक्षांत समारोह में हमनें सदैव नवाचार किया है और इस बार भी हम नवाचारी संदेश देते हुए भव्य दीक्षांत आयोजन करेंगे। स्वतंत्र भारत ने अपनी विरासत को संरक्षित रखते हुए विकास की दिशा में कदम बढ़ाया।  हमारे देश ने विज्ञान, तकनीक, कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। देश की अर्थव्यवस्था में सुधार, औद्योगिकीकरण और तकनीकी उन्नति ने भारत को वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है।
आज हमारे वैज्ञानिकों ने विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में मंगल मिशन, चंद्रयान-3, आदित्य एल-1, गगनयान, जैसी उपलब्धियों ने दुनिया को आश्चर्यचकित किया है।
     वर्त्तमान के वर्षों में, भारत सरकार की नीतियों ने विकास को गति दी है। “मेक इन इंडिया,” “डिजिटल इंडिया,” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों ने देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान किया है। इन प्रयासों ने न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाया है।
        हम सभी का सौभाग्य है कि हम स्वत्रंत भारत के इस ऐतिहासिक कालखंड के साक्षी बन रहे हैं, जिसमें भारत उन्नति के नित नए आयामों को छू रहा है। आपरेशन सिंदूर से भारत की शक्ति को दुनिया ने जाना कि नया भारत क्या है? और इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस की थीम “नया भारत “(New India) है. इस थीम का उद्देश्य 2047 तक एक समृद्ध, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत बनाने के संकल्प को मजबूत करना है।
नया सत्र प्रारंभ हो चुका है — हमारी सभी गतिविधियों के केंद्र में हमारे विद्यार्थी हैं। विश्वविद्यालय का वातावरण रचनात्मकता से परिपूर्ण हो, पठन-पाठन का बेहतर वातावरण बने, अकादमिक कैलेण्डर का पूर्णतया पालन हो, नवाचारों एवं परियोजना के लिये पहल हो, मितव्यतता तथा संसाधनों का समुचित प्रयोग हो। हमारी अपनी श्रेष्ठ परंपराओं का निरंतर संवर्धन एवं अभिसिंचन होता रहे, इसके लिए हम सबकी  सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।
    प्रिय विद्यार्थियो, आप इस देश का भविष्य हैं। युवा ही वह शक्ति है, जो भारत को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकती है और विकसित भारत @2047 के संकल्प को साकार करेगी। अपनी शिक्षा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास के लिए भी होगा तभी जीवन की सार्थकता है। पर्यावरण संरक्षण के लिये हम सबको सहभाग करना होगा। पानी बचाने, प्लास्टिक घटाने, पेड़ लगाने, स्वच्छता  तथा स्वदेशी अपनाने का संकल्प लेना होगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ ललित सिंह ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव, अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, निदेशक, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और छात्र छात्राओं ने सहभागिता की।
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