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मंदिर में परिक्रमा कितनी बार करनी चाहिए? जानें क्या हैं परिक्रमा के नियम…..

   मंदिर में परिक्रमा के समय अक्सर मन में यह सवाल आता है की परिक्रमा किस तरफ से शुरू करनी चाहिए और किस देवता की कितनी बार परिक्रमा करनी चाहिए? अगर ऐसी ही उलझनें आपके मन में भी बनी रहती हैं, तो आइए विस्तार से जानें परिक्रमा करते समय किन-किन नियमों का ध्यान रखना है…..

   हिंदू धर्म में परिक्रमा का बहुत खास महत्व बताया गया है। मंदिर में पूजा के समय हम भगवान की परिक्रमा भी करते हैं। लेकिन इस दौरान कई बार हम इस बात को लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं की परिक्रमा किस ओर से शुरू करनी चाहिए, किस देवता की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए? इसी प्रकार के सवाल अगर आपके मन में भी आते हैं तो आइए इस बारे में ज्योतिष एक्सपर्ट पंडित वेद प्रकाश शुक्ला  से जानते हैं कि आखिर मंदिर में परिक्रमा करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और भगवान की परिक्रमा करने का सही तरीका क्या है।

मंदिर में परिक्रमा का क्या है महत्व?
    ज्योतिष एक्सपर्ट पंडित वेद प्रकाश शुक्ला  बताते हैं कि परिक्रमा का बहुत खास महत्व होता है। इसका अर्थ है साधक द्वारा भगवान को केंद्र मानकर श्रद्धापूर्वक उनके चारों ओर घूमना यानी परिक्रमा करना। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से भगवान के प्रति समर्पण और भक्ति की भावना प्रकट की जाती है। स्कंद पुराण में भी मंदिर में भगवान की परिक्रमा करने का खास महत्व बताया गया है। हालांकि, इस दौरान कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।खना चाहिए और इसकी सही विधि।

मंदिर में किस देवता की कितनी बार करें परिक्रमा?
मंदिर में परिक्रमा करते समय कुछ नियमों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक होता है। गलत तरीके से परिक्रमा करने से फल अधूरा रह सकता है और साथ ही, प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मंदिर में परिक्रमा करते समय इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि किस देवता की कितनी बार परिक्रमा की जाती है।

कहां से शुरू करें परिक्रमा?
मंदिर में परिक्रमा के वक्त काफी लोगों को यह नहीं पता होता है कि परिक्रमा किस ओर से शुरू करनी चाहिए और कहां समाप्त करनी चाहिए। ज्योतिष एक्सपर्ट पंडित वेद प्रकाश शुक्ला  के अनुसार, परिक्रमा हमेशा दक्षिणावर्त करनी चाहिए यानी घड़ी की दिशा में परिक्रमा करना शुभ माना जाता है।

परिक्रमा के दौरान क्या करें?
आप मंदिर में जिस भी देवी-देवता की परिक्रमा करें उस दौरान मन में उनका ध्यान करना चाहिए। साथ ही, नाम जपना चाहिए और मन को बिल्कुल शांत रखना चाहिए। श्रद्धा और एकाग्रता के साथ परिक्रमा करना बेहद शुभ माना जाता है। इससे जातक को शुभ फल प्राप्त हो सकता है। हालांकि, कभी भी परिक्रमा के समय मन में नकारात्मक विचार नहीं लाने चाहिए।

परिक्रमा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

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