भारत और यूरोपीय संघ एक बड़ी रक्षा डील करने जा रहे हैं। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख ने बताया कि इस साझेदारी पर अगले सप्ताह दिल्ली में होने जा रहे शिखर सम्मेलन में हस्ताक्षर होंगे।
ब्रसेल्स: भारत और यूरोपीय संघ (EU) अगले सप्ताह एक महत्वपूर्ण सुरक्षा और रक्षा साझेदारी करने जा रहे हैं। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने EU संसद में यह जानकारी दी है। यूरोपियन संसद में बोलते हुए कलास ने कहा कि यह साझेदारी एक बड़े रणनीतिक एजेंडे का हिस्सा होगी, जिस पर नई दिल्ली में होने वाले EU-भारत शिखर सम्मेलन में हस्ताक्षर किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यूरोप भारत के साथ एक मजबूत नए एजेंडा पर काम करने के लिए तैयार है। इस सम्मेलन में भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा की भी उम्मीद है।
द्विपक्षीय संबंधों के लिए बताया अहम पल
कलास ने कहा, ‘कुछ ही दिनों में यूरोपियन यूनियन और भारत नई दिल्ली में मिलेंगे। यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों के लिए अहम पल है। इसमें नए सिरे से राजनीतिक गति और मकसद की साफ भावना है।’ उन्होंने सम्मेलन के संयुक्त बयान और रणनीतिक एजेंडा पर EU और भारतीय अधिकारियों की बातचीत का जिक्र किया और कहा कि दोनों पक्ष इस संकल्प और समझ से प्रेरित हैं कि यह शिखर सम्मेलन सफल होना चाहिए।
EU-इंडिया शिखर सम्मेलन
यूरोपीय संघ और भारत का 60वां शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में होने जा रहा है। इस दौरान दोनों पक्षों के 2030 तक चलने वाले एक नए EU-भारत व्यापाक रणनीतिक एजेंडा को अपनाने की उम्मीद है। कलास ने भारत और यूरोपीय संघ को दो बड़े लोकतंत्र बताया और कहा कि दोनों में से कोई भी हिचहिचाकट नहीं दिखा सकता। उन्होंने कहा, हमें और ज्यादा महत्वाकांक्षी साझेदार बनना होगा।
यूरोपीय संघ की नेता ने कहा एक ज्यादा खतरनाक दुनिया में भारत और EU को साथ मिलकर काम करने से फायदा होगा। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ पहले से ही भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और भारत यूरोप की आर्थिक मजबूती के लिए बहुत जरूरी बनता जा रहा है।
यूरोप के लिए भारत क्यों है अनिवार्य?
काजा कलास ने अपने संबोधन में भारत को यूरोप के लिए ‘अनिवार्य’ (Indispensable) बताया है। उन्होंने कहा कि यूरोप के आर्थिक लचीलेपन और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के साथ एक शक्तिशाली नया एजेंडा लागू करना समय की मांग है। इस साझेदारी के तहत सूचना सुरक्षा समझौते पर भी बातचीत शुरू होगी, जिससे दोनों देशों के बीच खुफिया और गोपनीय जानकारी साझा करना आसान हो जाएगा और 2030 तक के लिए एक व्यापक रणनीतिक एजेंडा तैयार किया जा रहा है, जो व्यापार, तकनीक और रक्षा के क्षेत्र में भारत-यूरोप को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

