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मचान विधि से करें कद्दूवर्गीय सब्जियों की खेती, पाएं बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता-डॉ. सीमा सिंह राणा

जिला उद्यान अधिकारी ने अवगत कराया है कि वर्तमान मानसूनी मौसम में जनपद जौनपुर के किसानों के लिए कद्दूवर्गीय सब्जियों (करेला, नेनुआ, लौकी, खीरा आदि) की खेती में मचान विधि का प्रयोग अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है। जिसके दृष्टिगत उद्यान विभाग द्वारा प्रथम बार मचान विधि से सब्जी की खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मिशन योजनानतर्गत इसे सम्मिलित किया गया है। जनपद को 40 हे0 लक्ष्य (30 हे0 सामान्य व 10 हे0 अनु0 जाति के कृषकों के लिए) आवंटित है।

जिला उद्यान अधिकारी, जौनपुर, डॉ. सीमा सिंह राणा ने किसानों से अपील की है कि वे इस विधि को अपनाकर न केवल अपनी उपज में वृद्धि कर सकते है, बल्कि उससे गुणवत्ता भी सुनिश्चित होगी। डॉ. राणा ने बताया कि बारिश के मौसम में, खासकर कद्दूवर्गीय सब्जियों में, पानी की अधिकता के कारण फसल खराब होने और फलों के सड़ने की समस्या आम हो जाती है। जब पौधे जमीन पर फैले होते हैं, तो फलों का सीधा संपर्क मिट्टी और अधिक नमी से होता है, जिससे वे गलने लगते हैं और भारी नुकसान होता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए मचान विधि एक प्रभावी समाधान है। मचान तैयार करने के लिए खेत में बांस के टुकड़ों को गाड़कर उन पर लकड़ियों या सूखी टहनियों को बांधा जाता है, जिस पर सब्जियों के पौधे चढ़ा दिए जाते हैं। मचान पर चढ़ाने से फल मिट्टी के संपर्क में नहीं आते, जिससे उनके सड़ने का खतरा समाप्त हो जाता है।
इसके अतिरिक्त इस विधि से फलों को पर्याप्त हवा और धूप मिलती है, जिससे उनकी गुणवत्ता और आकार बेहतर होता है। डॉ. सीमा सिंह राणा ने जोर दिया कि थोड़ी सी सावधानी और मचान विधि का उपयोग करके किसान वर्षा ऋतु में भी कद्दूवर्गीय सब्जियों से बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। सभी किसान भाइयों से अनुरोध है कि वे इस वैज्ञानिक विधि को अपनाएं और अपनी फसल को सुरक्षित व लाभकारी बनाएं। इस पर लागत का 50 प्रतिशत तक का अनुदान देय है। योजना का लाभ प्रथम आवक प्रथम पावक के आधार पर दिया जायेगा। कृषको से अपील है। कि वे http://dbt.uphorticulture.in/ पोर्टल पर पंजीयन कराये अथवा अधिक जानकारी हेतु कार्यालय मे सर्म्पक करे।

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